सतना जिला न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं के चैंबर बिना किसी पूर्व सूचना के तोड़े जाने और हटाए जाने की घटना को लेकर जिला अधिवक्ता संघ पूरी तरह लामबंद हो गया है। अधिवक्ताओं ने इस कार्रवाई के विरोध में जिला न्यायाधीश के खिलाफ नाराजगी जताते हुए जमकर नारेबाजी की और ज्ञापन सौंपा।
‘तानाशाही नहीं चलेगी’ के लगे नारे, सौंपा गया ज्ञापन
जानकारी के मुताबिक, बीते 10 और 11 अक्तूबर 2026 के अवकाश के दौरान न्यायालय परिसर से अधिवक्ताओं की गुमटियां और चैंबर बिना किसी पूर्व सूचना के तोड़े गए। अधिवक्ता विमलेश त्रिपाठी की गुमटी और शेड को हटाने के साथ ही अधिवक्ता पुष्पेंद्र सिंह बघेल और अधिवक्ता आशीष विश्वकर्मा के चैंबर को कटर से काटकर उसका दरवाजा अलग कर दिया गया। इससे इन अधिवक्ताओं को काफी नुकसान हुआ है।
जिला अधिवक्ता संघ ने इसे तानाशाही रवैया करार दिया है और भविष्य में इस प्रकार की बिना सूचना के की जाने वाली कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है। विरोध प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने ‘तानाशाही नहीं चलेगी’ के नारे लगाते हुए रोष व्यक्त किया और अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा।
अधिवक्ता संघ अध्यक्ष ने गिनाईं समस्याएं, निराकरण की जताई अपेक्षा
जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष सुनील शर्मा ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि अधिवक्ताओं के चैंबर नियम विरुद्ध तरीके से हटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि बिना जानकारी और पूर्व सूचना के अधिवक्ताओं के चैंबर नहीं हटाए जाने चाहिए।
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अध्यक्ष ने यह भी कहा कि न्यायालय की नई बिल्डिंग नहीं बन पा रही है, वकीलों के बैठने की उचित व्यवस्था नहीं है, बाउंड्री वॉल नहीं है और सुरक्षा का अभाव है। इसके अलावा शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं है तथा महिला अधिवक्ताओं के लिए शौचालय भी उपलब्ध नहीं है।
उन्होंने बताया कि इन विभिन्न समस्याओं के संबंध में जिला अधिवक्ता संघ की ओर से जिला न्यायाधीश के नाम ज्ञापन सौंपा गया है और समस्याओं के निराकरण की अपेक्षा जताई गई है।