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सोलन: निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता को लेकर सीपीआईएम ने राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन, एसआईआर रोकने की मांग
Ankesh Dogra
Updated Wed, 30 Sep 2026 03:05 PM IST
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निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता और विश्वसनीयता के साथ पात्र नागरिकों के मताधिकार की सुरक्षा को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की जिला कमेटी सोलन ने अपनी आवाज उठाई है। पार्टी ने राष्ट्रपति के नाम अतिरिक्त उपायुक्त दिव्यांशु सिंगल के माध्यम से ज्ञापन भेजकर कई मांगें रखीं।
सीपीआईएम ने विशेष रूप से मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया रोकने और पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने से बचाने की मांग की।
पार्टी ने कहा कि गरीबी, दूसरे स्थान पर रहने की स्थिति, किराये के मकान में रहना, दस्तावेजों से जुड़ी कठिनाई या प्रशासनिक गलती के कारण किसी भी पात्र व्यक्ति को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
सीपीआईएम ने मांग की कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान ऐसे मामलों पर विशेष ध्यान दिया जाए और पात्र नागरिकों के मताधिकार की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
ज्ञापन में बिहार में एसआईआर से संबंधित सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का उल्लेख करते हुए प्रभावित नागरिकों को पर्याप्त सूचना देने की मांग की गई।
पार्टी ने कहा कि मतदाता सूची से प्रभावित लोगों को दावा और आपत्ति दर्ज कराने के साथ प्रभावी उपचार का अवसर मिलना चाहिए, ताकि किसी पात्र नागरिक का नाम गलती से सूची से बाहर न हो।
सीपीआईएम ने गरीबों, मजदूरों, प्रवासी श्रमिकों, किरायेदारों, महिलाओं, बुजुर्गों और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए विशेष सहायता केंद्र और शिविर लगाने की मांग भी उठाई।
पार्टी का कहना है कि ऐसे वर्गों के लोगों को दस्तावेज और मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करने में कई तरह की व्यावहारिक दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए उनके लिए सहायता की व्यवस्था जरूरी है।
ज्ञापन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के संबंध में उठाई गई शिकायतों पर संविधान के अनुच्छेद 324(5) के अनुरूप कार्रवाई करने की मांग भी की गई।
इसके अलावा निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और स्वतंत्र बनाने की मांग रखी गई।
सीपीआईएम ने निर्वाचन आयोग की सूचना प्रौद्योगिकी प्रणालियों की स्वतंत्र तकनीकी समीक्षा कराने की मांग भी की।
पार्टी ने कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया में लोगों का भरोसा बनाए रखने के लिए आयोग की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना जरूरी है।
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