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रामपुर बुशहर: रक्षाबंधन पर कोटला में सजा ऐतिहासिक देरची मेला, देवताओं के साथ झूमे देवलू और ग्रामीण
रक्षाबंधन के पावन अवसर पर कोटला में आयोजित ऐतिहासिक देरची मेले में रविवार को देव आस्था और लोक संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। क्षेत्र के आराध्य देवी-देवताओं के आगमन से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। देवताओं के साथ पहुंचे देवलुओं ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर नृत्य किया तो बड़ी संख्या में ग्रामीण भी इस उत्सव में शामिल हो गए।
मेले में देवता महारुद्र गसो, देवता दत्त महाराज बसारा और मेजबान देवी सिंहासिनी विशेष रूप से विराजमान रहे। देवताओं के आगमन के बाद देवलुओं ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों की ताल पर नृत्य किया। इस दौरान ग्रामीणों ने भी देवताओं के साथ नृत्य कर अपनी आस्था प्रकट की।
देरची मेले में क्षेत्र के अलग-अलग स्थानों से ग्रामीण बड़ी संख्या में पहुंचे। देवताओं के मिलन और पारंपरिक रीति-रिवाजों को देखने के लिए लोगों में खासा उत्साह रहा। देव परंपरा के अनुसार आयोजित कार्यक्रमों ने मेले को धार्मिक और सांस्कृतिक रंग प्रदान किया।
देवी सिंहासिनी मंदिर कमेटी कोटला के प्रधान केवल राम वर्मा ने बताया कि कोटला का ऐतिहासिक देरची मेला रक्षाबंधन के पर्व के साथ शुरू होता है। यह मेला क्षेत्र की सदियों पुरानी देव परंपरा, धार्मिक आस्था और लोक संस्कृति से जुड़ा हुआ है।
उन्होंने कहा कि मेले में दूर-दराज के गांवों से लोग पहुंचते हैं और देवी-देवताओं का आशीर्वाद लेने के साथ पारंपरिक आयोजनों में हिस्सा लेते हैं। यह आयोजन स्थानीय लोगों के लिए धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक मेलजोल का भी महत्वपूर्ण अवसर है।
देवताओं की मौजूदगी और देवलुओं के पारंपरिक नृत्य से पूरा कोटला क्षेत्र देवमय नजर आया। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज और नृत्य ने मेले की रौनक बढ़ा दी। ग्रामीणों ने भी उत्साह के साथ देवताओं के साथ नृत्य में भाग लिया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि देरची जैसे पारंपरिक मेले केवल धार्मिक आयोजन नहीं हैं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखने का माध्यम भी हैं। ऐसे आयोजनों के जरिए नई पीढ़ी को अपनी देव संस्कृति, परंपराओं और लोक रीति-रिवाजों से परिचित होने का अवसर मिलता है।
रक्षाबंधन के मौके पर कोटला में उमड़ी ग्रामीणों की भीड़ और देवताओं के साथ हुआ पारंपरिक नृत्य क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की जीवंत तस्वीर पेश करता नजर आया।
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