फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Automobiles News ›   Supreme Court Dismisses Plea Seeking Mandatory Ethanol Content Disclosure at Petrol Pumps and Fuel Bills

पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बताने की मांग वाली याचिका खारिज: सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट जाने की दी छूट

Mon, 31 Aug 2026 12:08 PM IST
Amar Sharma ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amar Sharma Updated Mon, 31 Aug 2026 12:08 PM IST
सार

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने उस जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें पेट्रोल पंपों के डिस्पेंसिंग नोजल पर और पेट्रोल के रसीद पर इथेनॉल की सटीक प्रतिशत मात्रा छपे होने का निर्देश देने की मांग की गई थी।

विज्ञापन
Supreme Court Dismisses Plea Seeking Mandatory Ethanol Content Disclosure at Petrol Pumps and Fuel Bills
Supreme Court Rejects Ethanol Content Disclosure Plea - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें पेट्रोल पंपों पर दिए जाने वाले पेट्रोल में मिलाए गए इथेनॉल की सटीक मात्रा को अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करने की मांग की गई थी। याचिका में यह भी मांग की गई थी कि पेट्रोल की रसीद, बिल और अन्य दस्तावेजों पर इथेनॉल का प्रतिशत स्पष्ट रूप से दर्ज किया जाए। 

विज्ञापन


न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने याचिकाकर्ता और अधिवक्ता एन. के. गोस्वामी को अपनी शिकायतों के समाधान के लिए संबंधित हाई कोर्ट जाने की स्वतंत्रता दी।

विज्ञापन

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने क्या दलील दी?

  • सुनवाई के दौरान एन. के. गोस्वामी ने कहा कि उपभोक्ताओं को यह जानने का अधिकार है कि वे जिस पेट्रोल को खरीद रहे हैं, उसमें इथेनॉल की कितनी मात्रा मिलाई गई है।
  • उन्होंने पेट्रोल की रसीद का हवाला देते हुए कहा कि उसमें इथेनॉल का कोई उल्लेख नहीं है और उपभोक्ताओं को ईंधन की संरचना की जानकारी मिलनी चाहिए।
  • गोस्वामी ने यह भी कहा कि पिछली सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल ने इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को एक “प्रयोग” बताया था। जबकि बाद में सरकार ने इस तरह का बयान दिए जाने से इनकार करते हुए स्पष्टीकरण जारी किया। उन्होंने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से स्पष्ट आश्वासन देने की मांग की।
     

केंद्र सरकार की ओर से क्या जवाब दिया गया?

  • भारत के अटॉर्नी जनरल ने याचिका को आगे बढ़ाने के तरीके पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता सरकार को अपने प्रति जवाबदेह बनाना चाहते हैं।
  • इस पर गोस्वामी ने जवाब दिया कि उनकी मांग व्यक्तिगत हित के लिए नहीं, बल्कि देश के नागरिकों के अधिकारों से जुड़ी है। उनका कहना था कि नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि वे क्या खरीद रहे हैं।
  • अटॉर्नी जनरल ने याचिका को “प्रॉक्सी याचिका” भी बताया और कहा कि सुप्रीम कोर्ट पिछले वर्ष इसी तरह की एक याचिका खारिज कर चुका है।

Supreme Court Dismisses Plea Seeking Mandatory Ethanol Content Disclosure at Petrol Pumps and Fuel Bills
पेट्रोल पंप - फोटो : संवाद

सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?

सुप्रीम कोर्ट ने आखिरकार इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने याचिकाकर्ता को अपनी मांगों और शिकायतों के लिए संबंधित हाई कोर्ट में उचित राहत मांगने की छूट दे दी।


याचिका में पेट्रोल पंपों के लिए क्या मांग की गई थी?

  • याचिका की प्रमुख मांगों में पेट्रोल भरने वाली प्रत्येक नोजल पर पेट्रोल में मौजूद इथेनॉल की सटीक मात्रा को स्पष्ट और एक समान तरीके से प्रदर्शित करना शामिल था।
  • इसके अलावा, पेट्रोल की हर रसीद, बिल या चालान में भी इथेनॉल का प्रतिशत स्पष्ट रूप से लिखने की मांग की गई थी।
विज्ञापन

वाहनों की इथेनॉल अनुकूलता से जुड़ी क्या मांग थी?

  • याचिका में एक आधिकारिक और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध वाहन-वार अनुकूलता डेटाबेस तैयार करने की भी मांग की गई थी। इसमें निर्माता, मॉडल, इंजन प्रकार और निर्माण वर्ष के आधार पर यह जानकारी उपलब्ध कराने का प्रस्ताव था कि कौन-सा वाहन इथेनॉल के किस मिश्रण के लिए उपयुक्त है।
  • याचिकाकर्ता ने पुराने और इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के अनुकूल नहीं होने वाले वाहनों के लिए एक पारदर्शी बदलाव व्यवस्था तैयार करने की भी मांग की। इसमें तकनीकी, आर्थिक और लॉजिस्टिक रूप से संभव होने पर कम इथेनॉल वाले पेट्रोल की उपलब्धता पर विचार करने का सुझाव दिया गया था।
     

विशेषज्ञ समिति बनाने की मांग क्यों की गई थी?

  • याचिका में एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग की गई थी। इसमें पेट्रोलियम मंत्रालय, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारतीय मानक ब्यूरो, एआरएआई/आईकैट, उपभोक्ता संगठनों, ऑटोमोबाइल इंजीनियरों, ईंधन विशेषज्ञों, पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों तथा जल संसाधन विशेषज्ञों के प्रतिनिधियों को शामिल करने का प्रस्ताव था।
  • इस समिति से इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के कई पहलुओं की जांच करने की मांग की गई थी।

Supreme Court Dismisses Plea Seeking Mandatory Ethanol Content Disclosure at Petrol Pumps and Fuel Bills
पेट्रोल पंप - फोटो : संवाद

E20 पेट्रोल के किन पहलुओं की जांच की मांग थी?

याचिका के अनुसार, प्रस्तावित विशेषज्ञ समिति को इन मुद्दों की जांच करनी थी:

  • भारत में मौजूदा वाहन बेड़े के साथ E20 ईंधन की वास्तविक परिस्थितियों में अनुकूलता।

  • ईंधन दक्षता, इंजन की उम्र और रखरखाव लागत पर इसका प्रभाव।

  • वाहन वारंटी और बीमा से जुड़े संभावित प्रभाव।

  • टेलपाइप उत्सर्जन और इथेनॉल उत्पादन में होने वाली पानी की खपत सहित पर्यावरण पर इसका समग्र असर।

  • इथेनॉल उत्पादन से जुड़े खाद्य सुरक्षा और खाद्य सामग्री के दूसरे उपयोग में जाने से संबंधित मुद्दे।

सरकार से कौन-कौन से दस्तावेज मांगे गए थे?

  • याचिका में सुप्रीम कोर्ट से यह निर्देश देने की भी मांग की गई थी कि सरकार E20 पेट्रोल को अनिवार्य रूप से लागू करने के आधार से जुड़े सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज अदालत के समक्ष रखे।
  • इनमें नीति से संबंधित फाइलें, तकनीकी अध्ययन, वाहन अनुकूलता रिपोर्ट, सुरक्षा मानक, उपभोक्ता सलाह और सार्वजनिक परामर्श से जुड़े रिकॉर्ड शामिल थे। 


उपभोक्ताओं को जानकारी देने के लिए क्या व्यवस्था मांगी गई थी?

  • याचिका में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के लिए एक राष्ट्रीय उपभोक्ता सूचना प्रोटोकॉल तैयार करने की मांग भी की गई थी। इसे केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण और भारतीय मानक ब्यूरो के साथ परामर्श के बाद तैयार करने का प्रस्ताव दिया गया था।
  • हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई से इनकार कर दिया है और याचिकाकर्ता को अब अपनी मांगों को लेकर संबंधित हाई कोर्ट का रुख करने की छूट दी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें ऑटोमोबाइल समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। ऑटोमोबाइल जगत की अन्य खबरें जैसे लेटेस्ट कार न्यूज़, लेटेस्ट बाइक न्यूज़, सभी कार रिव्यू और बाइक रिव्यू आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed