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Devendra received the Punctuality Award, Rakesh was recognized as an Active Participant, and Satendra and Mukesh were honored with the Learning Champion Award.
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देवेंद्र पंक्युअलिटी, राकेश एक्टिव पार्टिसिपेंट और सतेंद्र व मुकेश लर्निंग चैंपियन अवार्ड से सम्मानित
झज्जर। राजकीय मॉडल संस्कृति प्राथमिक विद्यालय मातनहेल में बुनियादी साक्षरता एवं संख्याज्ञान के तहत आयोजित छह दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण शिविर के दूसरे बैच का समापन हुआ।
प्रशिक्षण के समापन पर देवेंद्र कुमार जीएमपीएस बहु को पंक्चुअलिटी अवार्ड, राकेश कुमार जीपीएस झांसवा को एक्टिव पार्टिसिपेंट अवार्ड और सतेंद्र कुमार जीपीएस कालियावास व मुकेश कुमार जीपीएस रूडियावास को लर्निंग चैंपियन के अवार्ड से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में सभी 40 प्रतिभागी अध्यापकों को समापन प्रमाण पत्र सौंपकर सम्मानित किया गया।
इस छह दिवसीय प्रशिक्षण के सफल मार्गदर्शन एवं आयोजन में खंड शिक्षा अधिकारी का विशेष मार्गदर्शन रहा, ब्लॉक कोऑर्डिनेटर बीआरपी मोनिका ने प्रशिक्षण के सुचारू संचालन में अहम भूमिका निभाई। वहीं की-रिसोर्स पर्सन के रूप में वेद प्रकाश और सरिता ने शिक्षकों को बुनियादी शिक्षा की आधुनिक एवं प्रभावशाली तकनीकों का गहन अभ्यास कराया। प्रशिक्षण के दौरान अध्यापकों को बाल वाटिका, हिंदी, अंग्रेजी और गणित विषयों में नवाचारों का प्रयोग कर बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया। प्रशिक्षण में शिक्षण अधिगम सामग्री, गतिविधि आधारित शिक्षण के माध्यम से प्राइमरी के विद्यार्थियों में बुनियादी पढ़ने, लिखने और गणितीय समझ को बेहतर बनाने की बारीकियों पर जोर दिया गया।
समापन पर जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी राजबाला मलिक ने सभी अध्यापकों से आह्वान किया कि वे बच्चों के साथ भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करें। विद्यालय और कक्षा में ऐसा वातावरण बनाएं, जहां प्रत्येक बच्चा स्वयं को घर जैसा सुरक्षित, सहज और प्रसन्न महसूस करे। उन्होंने कहा कि प्रेम, स्नेह और अपनत्व के साथ दिया गया शिक्षण बच्चों के सर्वांगीण विकास की आधारशिला है। जिला एफएलएन समन्वयक डॉ. सुदर्शन पूनिया ने कहा कि हम सबका अंतिम लक्ष्य बच्चा है। प्रशिक्षण का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब प्रशिक्षण से प्राप्त नवीन शिक्षण विधियों और गतिविधियों को कक्षा में प्रभावी ढंग से लागू कर प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाई जाएगी। उन्होंने अध्यापकों का आह्वान किया कि पहले बच्चे को सीखने में सक्षम बनाएं, तभी शिक्षण की सार्थकता सिद्ध होगी।
उन्होंने कहा कि समाज में अध्यापक पर बच्चों और अभिभावकों का विश्वास अत्यंत गहरा होता है। अध्यापक केवल ज्ञान देने वाला नहीं बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण और उनके उज्ज्वल भविष्य का मार्गदर्शक होता है। प्रत्येक शिक्षक अपने दायित्व का पूरी निष्ठा, संवेदनशीलता और समर्पण के साथ निर्वहन करते हुए प्रशिक्षण के उद्देश्यों को सफल बनाए। खंड शिक्षा अधिकारी सुरेश पाल सुहाग ने अधिकारियों को विश्वास दिलाया गया कि यहां सीखी गई सभी बातों का कक्षा कक्ष में सभी अध्यापक रूपांतरित करेंगे।
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