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Black Marketing Racket for Life-Saving Drugs Counterfeit Medicines Being Transported via Train Parcels
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ट्रेन पार्सल से भेजते नकली दवाएं: एक्सपायरी दवाओं में खाली पाउडर मिलाकर बेचा, ऐसे हुआ रैकेट का खुलासा
शुजात आलम, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अनुज कुमार
Updated Thu, 07 May 2026 10:32 PM IST
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मनोज कुमार जैन और राजू कुमार मिश्रा का गिरोह नकली दवाइयां बेचकर आम लोगों की सेहत और जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे थे। गिरोह सरकारी अस्पतालों में मिलने वाली और नकली दवाइयों को बेहद शातिर तरीके से पूरे देश में भेज देते थे। पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया है कि यह लोग बड़े-बड़े कार्टन में दवाइयां पैक करने के बाद उनको ट्रेन पार्सल से पूरे देश में भेजते थे।
मोटी रकम की लेनदेन के लिए हवाला के जरिए पेमेंट दी और ली जाती थी। पुलिस की छानबीन में कई और लोगों के नाम सामने आए हैं। अपराध शाखा की टीम इनकी तलाश में दिल्ली-एनसीआर के अलावा पंजाब, चंडीगढ़, प्रयागराज समेत दूसरे स्थानों पर छापेमारी कर रही है। पुलिस ने इनके मोबाइल फोन और दूसरे दस्तावेजों से मामले की जांच कर रही हैं।
छानबीन के दौरान पुलिस टीम को पता चला है कि आरोपी एक्सपायर हो चुकी दवाइयों को भी खरीद लेते थे। इसके बाद इन दवाइयों को री-पैकेजिंग और री-लेबलिंग कर उनको नए सिरे से बाजार में उतार दिया जाता था। आरोपियों को इस बात से कोई मतलब नहीं था कि दवा नुकसान करेगी या उसको खाकर किसी की मौत भी हो सकती है।
पुलिस की पूछताछ में विक्रम उर्फ सन्नी ने बताया कि उसके प्रयागराज के अलावा यूपी के कई दूसरे शहरों की डिस्पेंसरी व अस्पताल के लोगों से संपर्क हैं। वह उन लोगों से भी दवाएं लेकर मनोज व राजू को बेचते थे। छानबीन के दौरान पुलिस को पता चला है कि आरोपी वतन के खिलाफ मध्य प्रदेश के रीवा में मादक पदार्थ की तस्करी का मामला दर्ज है।
मनोज और राजू ने बताया कि कई बहुत महत्वपूर्ण दवाओं में वह खाली पाउडर की मिलाकर दवा बना देते थे। चंद रुपयों में बना दवाओं को कई-कई हजार रुपये में बेचा जाता है। पुलिस इस बात का पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इन लोगों की सप्लाई किन-किन मार्केट में थी। दिल्ली के भागीरथ पैलेस में भी टीम जांच के लिए जाने की तैयारी कर रही है।
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