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दिल्ली का मास्टर प्लान 2047: अधिसूचना के बाद भी नहीं अंतिम दस्तावेज, जरूरत पड़ी तो किया जाएगा बड़ा सुधार
Wed, 02 Sep 2026 01:58 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 02 Sep 2026 01:58 AM IST
सार
डीडीए के अध्यक्ष और दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने मास्टर प्लान के प्रावधानों पर पहली बार विस्तार से बातचीत में यह संकेत दिया। उन्होंने कहा कि कोई भी दस्तावेज पूर्ण नहीं होता। महत्वपूर्ण सुझाव मिलने पर उसमें सुधार की गुंजाइश हमेशा रहती है।
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एलजी तरनजीत सिंह संधू
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दिल्ली का मास्टर प्लान 2047 अधिसूचित होने के बाद भी अंतिम दस्तावेज नहीं है। जरूरत और समय के मुताबिक इसमें बदलाव और सुधार किए जा सकते हैं। डीडीए के अध्यक्ष और दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने मास्टर प्लान के प्रावधानों पर पहली बार विस्तार से बातचीत में यह संकेत दिया। उन्होंने कहा कि कोई भी दस्तावेज पूर्ण नहीं होता। महत्वपूर्ण सुझाव मिलने पर उसमें सुधार की गुंजाइश हमेशा रहती है। उनका जोर मास्टर प्लान को कागज पर रखने के बजाय जमीन पर लागू करने पर है।
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केंद्र सरकार ने मास्टर प्लान 2047 को 20 अगस्त को अधिसूचित किया था। इसके बाद एलजी ने डीडीए के उपाध्यक्ष एन. सरवन कुमार और अधिकारियों के साथ इसकी आगे की रणनीति पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि योजना तैयार करने में गृह मंत्रालय, प्रधानमंत्री कार्यालय और डीडीए स्तर पर कई दौर में विचार-विमर्श हुआ है। हालांकि, सुझाव और परामर्श की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। मंगलवार को एमसीडी अधिकारियों, आईआईटी विशेषज्ञों और इंदौर के मेयर के साथ भी योजना को बेहतर बनाने पर चर्चा हुई।
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एलजी के मुताबिक दिल्ली को भविष्य के लिए तैयार और प्रतिस्पर्धी वैश्विक शहर बनाना मास्टर प्लान का मुख्य उद्देश्य है। इसके लिए देश-विदेश के सफल शहरों से सीख ली जा रही है। इंदौर और अफ्रीकी देश रुआंडा में वायु गुणवत्ता सुधार के प्रयासों को भी दिल्ली के लिए उपयोगी उदाहरण माना जा रहा है।
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700 वर्ग किमी नए क्षेत्र के विकास की तैयारी
डीडीए के मुताबिक दिल्ली का क्षेत्र करीब 1400 वर्ग किमी है, जिसमें लगभग 700 वर्ग किमी पहले ही विकसित हो चुका है। अब शेष 700 वर्ग किमी क्षेत्र के नियोजित विकास की तैयारी है। इसके लिए लेआउट और टाउन प्लानिंग पर काम होगा। इससे नए आवासीय क्षेत्रों के साथ रोजगार, परिवहन और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार का रास्ता खुलेगा।
लैंड पूलिंग में बड़ा बदलाव, डीडीए भी जुटाएगा जमीन
नए विकास क्षेत्रों में लैंड पूलिंग को महत्वपूर्ण आधार बनाया गया है। डीडीए उपाध्यक्ष एन. सरवन कुमार के मुताबिक पहले जमीन के इस्तेमाल में बदलाव की प्रक्रिया लंबी थी। नए मास्टर प्लान में इसे आसान किया गया है और न्यूनतम भूखंड का आकार 20 हेक्टेयर रखा गया है। अब जमीन मालिकों की पहल पर ही निर्भरता नहीं रहेगी। डीडीए भी अपनी जरूरत के अनुसार जमीन पूल करने की कोशिश करेगा। इसके लिए टाउन प्लानिंग स्कीम पर काम किया जा रहा है। डीडीए के अनुसार दिल्ली के 105 गांवों की करीब 17 हजार हेक्टेयर जमीन को लैंड पूल किए जाने की तैयारी है।
हर जगह नहीं होंगी हाईराइज इमारतें
एलजी ने स्पष्ट किया कि दिल्ली में हर जगह ऊंची इमारतों की अनुमति नहीं होगी। जहां 500 एफएआर की अनुमति होगी, वहीं हाईराइज विकास की संभावना होगी। कुछ पुराने निर्देश हटाए गए हैं, लेकिन भूकंपरोधी मानकों को योजना में शामिल किया गया है।
मेट्रो नेटवर्क के दोनों तरफ ऊंचे भवनों के विकास की संभावना भी तलाशी जा रही है। एलजी ने जापान का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां मेट्रो नेटवर्क के साथ शहरी विकास को जोड़ा गया। दिल्ली में भी सार्वजनिक परिवहन और विकास को एक साथ आगे बढ़ाने की कोशिश है।
फ्लड प्लेन में निर्माण पर रोक बरकरार
यमुना के फ्लड प्लेन में निर्माण पर रोक बरकरार रहेगी। एलजी के अनुसार ओ-जोन यानी यमुना के फ्लड प्लेन का क्षेत्र करीब 900 वर्ग किमी ही रखा गया है। एक्टिव फ्लड प्लेन का निर्धारण एनजीटी के मानकों के आधार पर होगा। यहां निर्माण की अनुमति पहले भी नहीं थी और आगे भी नहीं होगी। ग्रीन पार्क और जरूरी सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़े सीमित कार्य ही किए जा सकेंगे।
ग्रीन एरिया बढ़ाने की योजना
मास्टर प्लान में दिल्ली का हरित क्षेत्र बढ़ाने पर जोर है। सार्वजनिक परिवहन के साथ हरित विकास को जोड़ने की योजना है। मेट्रो के आसपास नियोजित विकास से शहर के बेतरतीब विस्तार को रोकने की कोशिश होगी। हालांकि, घनी आबादी और हाईराइज विकास के साथ हरित क्षेत्र का संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होगा।
पानी की कमी रहेगी चुनौती, री-यूज पर जोर
शहर के विस्तार के साथ पानी की जरूरत बढ़ेगी। एलजी ने माना कि दिल्ली में पानी की चुनौती बनी रहेगी। इसी कारण ट्रीटेड वाटर के दोबारा इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है। टीओडी क्षेत्रों में इसके उपयोग का प्रावधान है। इससे ताजे पानी पर निर्भरता कम करने के साथ सीवर ट्रीटमेंट और पुन: उपयोग का ढांचा मजबूत करना होगा।
1500 से ज्यादा विरासत स्थल होंगे विकसित
मास्टर प्लान में दिल्ली की विरासत को पर्यटन और अर्थव्यवस्था से जोड़ने की योजना है। एलजी के अनुसार 1500 से ज्यादा हेरिटेज स्ट्रक्चर विकसित किए जाएंगे। साथ ही स्लम फ्री दिल्ली का लक्ष्य भी रखा गया है। इसके लिए आवास और पुनर्वास की योजनाएं अहम होंगी। निम्न और मध्यम आय वर्ग के लिए किफायती आवास उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती रहेगी।
दिल्ली में कई एजेंसियां, समन्वय सबसे बड़ी चुनौती
दिल्ली के विकास में डीडीए, एमसीडी, दिल्ली सरकार, दिल्ली जल बोर्ड, पीडब्ल्यूडी और परिवहन से जुड़ी एजेंसियां शामिल हैं। ऐसे में इनके बीच समन्वय जरूरी है। एलजी ने कहा कि दुनिया की कई राजधानियों में कई एजेंसियां काम करती हैं। वाशिंगटन डीसी इसका उदाहरण है। दिल्ली में भी इसी व्यवस्था के साथ बेहतर तालमेल पर जोर दिया जाएगा।
साइकिल ट्रैक को लेकर अलग रास्ता
मास्टर प्लान में सड़कों के किनारे बड़े पैमाने पर साइकिल ट्रैक का प्रावधान नहीं किया गया है। डीडीए उपाध्यक्ष के मुताबिक दिल्ली के मौसम और मौजूदा परिस्थितियों में सड़क किनारे बने साइकिल ट्रैक अपेक्षित रूप से सफल नहीं रहे। इसलिए मुख्य रूप से यमुना किनारे साइकिल ट्रैक विकसित करने की योजना है।
मास्टर प्लान अब कागज से जमीन पर उतारने की तैयारी
मास्टर प्लान 2047 का अगला चरण इसके प्रावधानों को जमीन पर लागू करना है। लैंड पूलिंग, नए क्षेत्रों का विकास, टीओडी, आवास, परिवहन, पानी, हरित क्षेत्र और विरासत संरक्षण को एक साथ आगे बढ़ाना होगा। योजना में जरूरत के मुताबिक बदलाव की गुंजाइश रखते हुए अब इसकी सफलता इस बात से तय होगी कि 2047 की दिल्ली कितनी नियोजित, प्रतिस्पर्धी और रहने योग्य बन पाती है।
दिल्ली के मास्टर प्लान-2047 पर जनप्रतिनिधियों ने दिए कई सुझाव
दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) द्वारा आयोजित एक बैठक में मंगलवार को दिल्ली के सांसदों और विधायकों ने मास्टर प्लान-2047 पर अपने सुझाव दिए। जनप्रतिनिधियों ने गांवों, कॉलोनियों, बाजारों और सील पड़ी दुकानों से संबंधित कई महत्वपूर्ण मुद्दों को योजना में शामिल करने की मांग की।
मास्टर प्लान-2047 का उद्देश्य दिल्ली को आधुनिक और भविष्य के लिए तैयार शहर बनाना है। इसमें 30 से 40 लाख नए किफायती आवास बनाने का लक्ष्य है। मेट्रो नेटवर्क को 416 से बढ़ाकर 695 किलोमीटर करने का प्रस्ताव है। 52 किलोमीटर साइकिल ट्रैक भी बनाए जाएंगे। नरेला और ओखला के पुराने औद्योगिक क्षेत्रों को आईटी पार्क और स्टार्टअप हब में बदलने की योजना है। जनप्रतिनिधियों ने ओ-जोन के गांवों और 69 एफ्लुएंट कॉलोनियों को 1511 नियमित कॉलोनियों की सूची में शामिल करने की बात कही। उन्होंने 351 सर्वे की गई सड़कों को कमर्शियल घोषित करने का भी सुझाव दिया।
सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी ने गांवों के लाल डोरे से बाहर की आबादी को नियमित करने की मांग की। उन्होंने एक एकड़ वाली जीडीए नीति लागू करने का सुझाव दिया। विभाजन के बाद दिल्ली में बसे लोगों की कॉलोनियों की लीज को फ्रीहोल्ड करने की बात कही। बिधूड़ी ने लाजपत राय मार्केट के दुकानदारों को मालिकाना हक देने की भी मांग रखी। उन्होंने दिल्ली में सील पड़ी 13 हजार दुकानों को डी-सील करने का सुझाव दिया।