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दिल्लीः ऑनलाइन क्लास न कर पाने वाले बच्चों के लिए कांस्टेबल बने सहारा, मंदिर में ले रहे क्लास

दिल्ली पुलिस का एक कांस्टेबल कोरोना काल में जरूरतमंद बच्चों के लिए मदद का बड़ा हाथ बनकर सामने आया है। कांस्टेबल ने कोरोनाकाल के दौरान गरीब और जरूरतमंद...

20 अक्टूबर 2020

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Digital Edition

दिल्ली-एनसीआर में गंभीर स्तर पर पहुंचा वायु प्रदूषण, आज और कल नहीं राहत की उम्मीद

दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के आंकड़ों के अनुसार राजधानी के कई इलाकों में वायु की गुणवत्ता गंभीर स्थिति में पहुंच गई है। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार आज अलीपुर, मुंडका और वजीरपुर में एक्यूआई बेहद गिर गया है। इन हालात में स्वस्थ व्यक्ति की सेहत पर तो असर होता ही है, जिन्हे पहले से कोई बीमारी है उन लोगों पर गहरा असर पड़ता है। 

शुक्रवार को दिल्ली-एनसीआर में शुक्रवार सुबह से ही स्मॉग की घनी चादर छाई रही। वायु गुणवत्ता सूचकांक में बृहस्पतिवार के मुकाबले एकाएक उछाल आने से दिल्ली, गुरुग्राम के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 400 को पार कर गया, जो कि गंभीर श्रेणी में आता है। उधर, देश के पांच सबसे प्रदूषित शहरों में ग्रेटर नोएडा तीसरे व नोएडा पांचवें स्थान पर रहा। ग्रेटर नोएडा में एक्यूआई 381 व नोएडा का 369 दर्ज किया गया। भिवाड़ी 390 एक्यूआई के साथ पहले और धारुहेड़ा (385) दूसरे स्थान पर रहा।

गुरुग्राम में औसत एक्यूआई 344 और सुबह सात बजे सेक्टर-151 में 401 दर्ज किया गया। दिल्ली में बीते दिन के मुकाबले 60 अंकों के उछाल के साथ शाम चार बजे तक औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 366 पर रहा, लेकिन अलीपुर में 447, शादीपुर में 441, मुंडका में 419, वजीरपुर 432, आनंद विहार 405, बवाना 413, विवेक विहार 422, रोहिणी 401, जहांगीरपुरी 418 व पटपड़गंज 415 दर्ज किया गया। इसी तरह गाजियाबाद के लोनी में एक्यूआई 386, संजय नगर में 331, इंदिरापुरम में 305 तथा वसुंधरा में 377 दर्ज किया गया।

सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फॉर कास्टिंग एंड रिसर्च (सफर) का पूर्वानुमान है कि शनिवार और रविवार को वायु गुणवत्ता गंभीर स्तर में जा सकती है। इसे देखते हुए पर्यावरण प्रदूषण (रोकथाम एवं नियंत्रण) प्राधिकरण (ईपीसीए) भी जरूरत के हिसाब से कदम उठाने को तैयार है। सफर का पूर्वानुमान है कि अगले दो दिनों तक हवा की चाल में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा।

ईपीसीए की अपील, मास्क जरूर पहनें
दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण के मद्देनजर ईपीसीए ने कहा कि शनिवार को कुछ देर के लिए दिल्ली-एनसीआर की हवा गंभीर स्तर पर प्रदूषित हो सकती है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि 25 अक्तूबर को हवा की दिशा बदलने पर प्रदूषण पर क्या असर पड़ेगा। इस वक्त प्रदूषण रोकने के सभी विकल्पों पर सख्ती से काम करना है  और लोगों को प्रदूषण से बचने के लिए मास्क जरूर पहनना चाहिए।

कहां कितना रहा औसत एक्यूआई
 शहर             23 अक्तूबर  22 अक्तूबर
फरीदाबाद        360             315
ग्रेटर नोएडा     381             328            
दिल्ली             366             306        
नोएडा             369             308
गुरुग्राम             334            215                
गाजियाबाद        344            318
(आंकड़े सीपीसीबी के मुताबिक शाम 4 बजे तक)
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हालात चिंताजनक... हालात चिंताजनक...

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा, अब नहीं बढ़ेगी कैदियों की अंतरिम जमानत और पैरोल अवधि

हाईकोर्ट ने कहा कि कोरोना महामारी के मद्देनजर कैदियों को दी गई अंतरिम जमानत व पैरोल की अवधि अब नहीं बढ़ाई जाएगी। यह निर्देश देते हुए पीठ ने 25 मार्च 2020 के अपने उस आदेश को वापस ले लिया, जिसके तहत कैदियों की अंतरिम जमानत व पैरोल अवधि समय-समय पर बढ़ाई गई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि पूर्व आदेश से प्रभावित हुए बिना फैसला लें।

मुख्य न्यायाधीश डी.एन. पटेल, सिद्धार्थ मृदुल और तलवंत सिंह की विशेष पीठ ने अंतरिम जमानत पर चल रहे 2318 विचाराधीन कैदियों को 2 नवंबर से 13 नवंबर के बीच संबंधित जिला अदालतों में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। पीठ ने पेरोल पर जेल से रिहा होने वाले सभी कैदियों को राहत देने हुए उनकी अंतरिम जमानत व पैरोल की अवधि 31 अक्तूबर तक बढ़ा दी थी। 

हालांकि, हाईकोर्ट ने इन कैदियों को संबंधित अदालत में अपनी अंतरिम जमानत की अवधि बढ़ाने के लिए अर्जी दाखिल करने की छूट दी है। अदालत को तथ्यों के आधार पर विचार करने के लिए कहा। वहीं पीठ ने इसके अलावा हाई पावर कमेटी से अनुरोध किया है कि वह समिति की सिफारिशों के आधार पर अंतरिम जमानत पर रिहा हुए 2,907 कैदियों के संबंध में 10 दिनों के भीतर निर्णय लें।

हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा था कि महामारी के मद्देनजर कैदियों को दी गई अंतरिम जमानत और पैरोल की अवधि बढ़ाने वाले आदेश को अब खत्म करना चाहिए, क्योंकि राजधानी की जेलों में संक्रमितों की संख्या महज 3 रह गई है। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी उस अर्जी पर सुनवाई के दौरान की थी, जिसमें 13 जुलाई और 24 जुलाई के आदेशों को वापस लेने व संशोधित करने की मांग की गई है। 

पीठ ने कहा था कि अब कोरोना का अध्याय समाप्त होना चाहिए, इन लोगों को आत्मसमर्पण करने दें या वापस जेल जाएं। पीठ ने कहा कि हमने महामारी को देखते हुए आदेश पारित किया था, हमारे आदेश का जेल की भीड़ को कम करने से ज्यादा कोई और मकसद नहीं है। 
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एनएचएआई का दावाः दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे का काम तय समय पर होगा पूरा 

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे पर नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने काम की रफ्तार बढ़ा दी है। एनएचएआई ने स्पष्ट किया है कि दूसरे और चौथे चरण का काम केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री की तरफ से निर्धारित समय-सीमा में ही पूरा होगा। अलीगढ़ रेलवे लाइन पर आरओबी को छोड़कर बाकी सभी काम दिसंबर के तीसरे सप्ताह तक पूरे हो जाएंगे। जबकि आरओबी का काम मार्च 2021 के अंतिम सप्ताह तक ही पूरा हो सकेगा। तकनीकी दिक्कतों का हवाला देते हुए एनएचएआई ने कहा कि आरओबी के डिजाइन को लेकर रेलवे की तमाम सारी आपत्तियां हैं, जिन्हें दूर कर पुल तैयार करने में अभी करीब पांच से छह महीने का वक्त लगेगा। बाकी अन्य जगहों निर्माण की स्थिति लक्ष्य के अनुसार चल रही है। 

 यूपी गेट से डासना के बीच 19.20 किमी में 16 लेन एक्सप्रेस-वे तैयार होना है। एनएचएआई ने दावा किया है कि इस चरण का 88 प्रतिशत काम पूरा कर लिया गया है। यूपी गेट से हिंडन तक की सड़क भी पूरी तरह से वाहनों के लिए खोल दी गई है। हिंडन से विजय नगर के बीच का हिस्सा भी अगले 15 दिनों में खुल जाएगा। उसके बाद एबीईएस इंजीनियरिंग कॉलेज (प्रताप विहार) तक की सड़क भी वाहनों के लिए 25 से 30 दिन में खोल दी जाएगी। 

अब सिर्फ साइड रोड तैयार करने का काम तेजी से चल रहा है, जिसके तैयार होते ही अंडरपास खोलकर एक्सप्रेस-वे को वाहनों के लिए शुरू कर दिया जाएगा। इसी चरण में लालकुआं लूप का काम भी 30 नवंबर तक पूरा करने का दावा किया है। चौथे चरण में डासना से मेरठ के बीच 32 किमी का ग्रीन फील्ड छह लेन एक्सप्रेस-वे बनाया जा रहा है। इस पर 78 फीसदी काम पूरा करने का दावा किया जा रहा है। बाकी 22 फीसदी काम आने वाले 66 दिनों में पूरा करना है। एनएचएआई अधिकारियों का कहना है कि चौथे चरण में असल काम डासना (आईएमएस) से ईस्टर्न पेरिफेरल लूप तक का बचा है, जिस पर दिन-रात काम चल रहा है। बाकी हिस्से से मशीनें व श्रमिक फ्री होने के बाद अब इसी पांच से सात किमी के हिस्से में काम कर रहे हैं।  
 
रेलवे की मांग, पीएसयू की निगरानी में बने आरओबी 
अलीगढ़ रेल लाइन पर चिपियाना में एक्सप्रेस-वे के लिए तीन नए आरओबी बनाए जा रहे हैं। इन्हें लेकर अभी तक मामला पूरी तरह से सुलझ नहीं पाया है। रेलवे का कहना है कि यह वह हिस्सा है जहां से एक्सप्रेस-वे घूम रहा है। इसलिए यहां पर आरओबी का निर्माण किसी ऐसी पीएसयू (पब्लिक सेक्टर यूनिट) की निगरानी में हो, जिसे इस तरह के डिजाइन पर काम करने का अनुभव हो, जिससे की भविष्य में रेल लाइन के विस्तार की स्थिति में रेलवे को कोई परेशानी न हो। अब एनएचएआई ने कई निजी कंपनियों का प्रस्ताव भी दिया लेकिन रेलवे उस पर सहमत नहीं है। 
 
प्रशासन ने लगाई एक्सप्रेस-वे पर पीएसी 

अब प्रशासन पर भी दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे का काम समय पर पूरा कराने का दबाव है। इसी को देखते हुए एनएचएआई को पीएसी मुहैया कराई गई है। साथ ही प्रशासन के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि अगर कहीं पर कोई दिक्कत है तो उसे वार्ता कर प्राथमिकता के आधार पर सुलझाएं, जिससे की निर्माण कार्य में किसी तरह की बाधा न आए। 

हम आरओबी को छोड़कर बाकी सभी काम तय समय पर पूरा कर लेंगे। दिसंबर के अंतिम सप्ताह से पहले ही दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे वाहनों के लिए पूरी तरह से तैयार होगा। आरओबी को लेकर कुछ तकनीकी दिक्कतें हैं, जिन्हें दूर करने की कोशिश जारी है। बाकी किसी भी हिस्से में कोई दिक्कत नहीं है। 
- मुदित गर्ग, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे
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ई-वाहनों की खरीद पर 72 घंटे में मिलेगी सब्सिडी, 36 वाहन निर्माताओं के साथ करार

दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद पर खाते में महज 72 घंटे के अंदर सब्सिडी भेज दी जाएगी। फिलहाल 100 से अधिक वाहनों के मॉडल की खरीद पर यह लाभ मिलेगा। दुपहिया, चौपहिया और ई-रिक्शा के लिए 98 डीलर तय किए गए हैं।

शुक्रवार को गहलोत ने प्रेसवार्ता कर कहा कि दिल्ली में प्रदूषण को नियंत्रित करने की दिशा में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की यह बेहतर पहल है। इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए दिल्ली सरकार ने सात अगस्त को ई-वाहन नीति को अधिसूचित किया। 10 अक्तूबर के बाद खरीदे गए वाहनों पर रोड टैक्स, जबकि 15 अक्तूबर के बाद खरीदे गए ई-वाहनों पर रजिस्ट्रेशन पर कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। 15 लाख तक के ई-वाहनों पर सब्सिडी का प्रावधान होगा, जबकि इससे अधिक कीमत होने पर सब्सिडी नहीं मिलेगी।

उन्होंने बताया कि कारों के लिए 12, ई-रिक्शा के लिए 45, टू व्हीलर के लिए 14 डीलर तय किए गए हैं। ई-वाहनों के लिए 36 वाहन निर्माताओं के साथ दिल्ली सरकार ने करार किया है। चार्जिंग स्टेशन समेत सभी बुनियादी इंतजाम भी किए जा चुके हैं। इस मौके पर परिवहन मंत्री ने पोर्टल का भी लोकार्पण किया, जिसके जरिए वाहनों की खरीद से संबंधित जानकारी मिल सकेगी।

70 चार्जिंग स्टेशन चालू
परिवहन मंत्री ने बताया कि इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए फिलहाल 70 चार्जिंग स्टेशन चालू हैं। सरकार की कोशिश है कि तीन किलोमीटर की दूरी पर एक चार्जिंग स्टेशन हो। चार्जिंग के लिए प्रति यूनिट बिजली पर आने वाला खर्च 4.30 रुपये होगा। सभी टैक्स को शामिल करने पर यह राशि करीब छह रुपये होगी।

स्कैप पर भी मिलेगी छूट
इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए पुराने वाहनों को लौटाने पर भी डीलर की ओर से स्क्रैप पर छूट दिए जाने का प्रावधान है। यह राशि सब्सिडी के अलावा होगी। ई-वाहनों की खरीद के लिए कम से कम औपचारिकता रखी गई है, ताकि अधिक से अधिक लोग इसे अपनाएं। इससे दिल्ली के प्रदूषण स्तर को भी कम करने में सभी को सहभागिता का मौका मिल सकेगा। ई-रिक्शा और ऑटो पर 30-30 हजार और कार पर डेढ़ लाख की सब्सिडी दी जाएगी। दुपहिया वाहनों पर भी मॉडल के हिसाब से सब्सिडी तय की गई है।
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केजरीवाल ने LNJP अस्पताल के नए मल्टी स्पेशलिटी ब्लॉक का किया शिलान्यास, कोरोना योद्धाओं को सराहा

इलेक्ट्रिक वाहन
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने राजधानी के लोगों को अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराने के उद्देश्य से शुक्रवार को एलएनजेपी अस्पताल में 1500 बेड के मल्टी स्पेशियलिटी ब्लाॅक की आधारशिला रखी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दो-ढाई साल के अंदर यह विश्व स्तरीय चिकित्सा केंद्र शुरू हो जाएगा। इसके अलावा एक अन्य ब्लॉक में 300 अतिरिक्त बेड की व्यवस्था की जा रही है। इन बेड के जुड़ने के बाद एलएनजेपी अस्पताल 3800 बेड का हो जाएगा, जो अत्याधुनिक डिजाइन और आधुनिक चिकित्सा बुनियादी ढांचे के साथ देश का सबसे बड़ा अस्पताल होगा। 

लोगों को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने कहा, सभी सुविधाओं से युक्त इस चिकित्सा केंद्र को बनाने में करीब 450 करोड़ रुपए खर्च आने की उम्मीद है। पूरी तरह से वातानुकूलित इस ब्लाॅक में एक ही छत के नीचे सभी आधुनिक मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध होंगी और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स चार्जिंग प्वाइंट की सुविधा भी दी जाएगी। मुझे खुशी है कि दिल्ली के रहने वाले लोग देश की राजधानी में रहते हैं, तो उन्हें विश्वस्तरीय मेडिकल सुविधाएं भी मिलनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकार अपने सभी निर्माण कार्य  समय से पूरा करने के साथ ही पैसे भी बचा रही हैं, जबकि अन्य राज्य सरकारों के कार्य पूरे होने में 10-10 साल लग जाते हैं । केजरीवाल ने कहा की  इस अस्पताल में करीब 30 लाख रुपए प्रति बेड का खर्च है। 1500 बेड बनाने में करीब 450 करोड़ रुपए का खर्च आ रहा है। देश के अंदर इस वक्त चाहे केंद्र सरकार या कोई राज्य सरकार हों, कहीं पर भी जो अस्पताल बन रहे हैं, उसमें खर्चा सवा करोड़ रुपए से डेढ़ करोड़ रुपए प्रति बेड आता है।
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दिल्ली: वेतन न मिलने के विरोध में हिंदूराव अस्पताल के डॉक्टर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे

उतरी निगम के हिंदूराव अस्पताल और एनडीएमसी मेडिकल कॉलेज के रजिडेंट डॉक्टर  वेतन न मिलने के विरोध में शुक्रवार से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर चले गए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि जब तक उन्हें पूरा वेतन नहीं मिल जाता, हड़ताल जारी रहेगी।
डॉक्टर  13 दिनों सेअस्पताल परिसर में ही धरना दे रहे हैं। इससे चिकित्सा सेवाएं ठप हैं। गुरुवार को उतरी निगम के तीन अस्पतालों के डॉक्टरों ने जंतर मंतर पर भी प्रदर्शन किया था।

हिंदूराव अस्पताल की रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉक्टर अभिमन्यु ने कहा कि भूख हड़ताल पर जाने के अलावा डॉक्टर के पास आप कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। दो हफ्तों से  बकाया वेतन की मांग कर रहे हैं,लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ है। डॉक्टर सिर्फ  अपना वेतन चाहते हैं, जो मूल अधिकार है। डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें जुलाई महीने से वेतन नहीं मिला है। ऐसे में उन्हें परिवार चलाने में मुश्किल हो रही है।



हिंदूराव और कस्तूरबा गांधी में जारी था विरोध
उत्तरी निगम के दो बड़े अस्पताल बाड़ा हिंदूराव और कस्तूरबा गांधी में रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल जारी थी। हिंदूराव अस्पताल की आरडीए के अध्यक्ष डॉ. अभिमन्यु ने बताया था कि अस्पताल में पहले की तरह ही काम का बहिष्कार किया गया। इस दौरान किसी भी रेजिडेंट डॉक्टर ने अस्पताल में सेवा नहीं दी। उन्होंने कहा कि जब तक वेतन संबंधी मांग पूरी नहीं होती तब तक हड़ताल जारी रहेगी। डॉक्टर अस्पताल परिसर में धरने पर बैठे रहेंगे। गौरतलब है कि एक सप्ताह से अधिक समय से डॉक्टर बकाया वेतन की मांग को लेकर हड़ताल पर हैं।
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दिल्ली सरकार दो नवंबर से 272 वार्ड में शुरू करेगी 'रेड लाइट ऑन, गाड़ी ऑफ' अभियानः गोपाल राय

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने बताया कि दो नवंबर से दिल्ली सरकार एमसीडी के सभी 272 वार्ड में रेड लाइट ऑन, गाड़ी ऑफ अभियान शुरू करेंगे। यह बात उन्होंने शुक्रवार को बाराखंबा रोड पर कही जब वह इसी अभियान के तहत वहां पहुंचे थे।

गौरतलब है कि दिल्ली सरकार ने अगले हफ्ते से सभी 70 विधानसभा क्षेत्रों में प्रदूषण निरोधक पहल ‘रेड लाइट ऑन, गाड़ी ऑफ’ को लागू करने का निर्णय किया है। यह जानकारी गुरुवार को पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने दी।

अभियान के दूसरे दिन राय ने तिलक मार्ग-भगवान दास चौराहा यातायात सिग्नल का दौरा किया। उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि कई विधायक इस अभियान में हिस्सा ले रहे हैं और जागरूक फैला रहे हैं। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को निगम पार्षद भी इस पहल में हिस्सा लेंगे और 26 अक्टूबर के बाद अभियान को सभी 70 विधानसभा क्षेत्रों में चलाया जाएगा।

आम आदमी पार्टी सरकार 15 नवम्बर तक चलने वाले इस अभियान के माध्यम से राजधानी में 100 यातायात सिग्नल पर जागरूकता फैलाना चाहती है। इन सिग्नल पर सिविल डिफेंस के 2500 कार्यकर्ता हाथों में तख्तियां लेकर लोगों से अपील करेंगे कि वे अपने वाहनों के इंजन बंद कर दें।

अभियान की बुधवार को शुरुआत करते हुए राय ने कहा था कि अगर यातायात सिग्नल पर वाहन के इंजन बंद कर दिए जाएं तो दिल्ली में वाहन से होने वाले प्रदूषण में 15 से 20 फीसदी तक की कटौती की जा सकती है।
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धुंध की चादर में लिपटा दिल्ली-एनसीआर, कुछ इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 400 के पार

सर्दियां जैसे-जैसे करीब आ रही हैं दिल्ली-एनसीआर की आबोहवा दिनोंदिन बिगड़ती ही जा रही है। शुक्रवार को भी दिल्ली-एनसीआर जहरीले धुंध की चादर में लिपटा हुआ है। आज तो कई इलाकों में धुंध इतनी ज्यादा थी कि पास की चीजें भी नजर नहीं आ रही थीं। वहीं वायु गुणवत्ता सूचकांक की बात करें तो दिल्ली के कई इलाकोें में यह शुक्रवार सुबह 400 के पार और अधिकतर इलाकों में 300 के पार दर्ज किया गया। 

दिल्ली के अलीपुर में आज सुबह छह बजे वायु गुणवत्ता सूचकांक 436 दर्ज किया गया जो गंभीर श्रेणी में आता है। वहीं आनंद विहार आदि इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक 300 के पार ही रहा।

इंडिया और आसपास सैर करने वालों ने तो ये भी कहा कि आज तो उन्हें इंडिया गेट दिखाई ही नहीं दे रहा जबकि रोज इसी जगह से इंडिया गेट आसानी से दिखता था।
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