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संतान सुख प्राप्ति हेतु प्रभावी है शरद पूर्णिमा पूजा, जरूर जानें यह पौराणिक कथा
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बल्लभगढ़ः अंकित बनकर तौसीफ ने की थी निकिता से दोस्ती, एक सहेली ने किए कई खुलासे

बल्लभगढ़  में की छात्रा की हत्या:निकिता को न्याय के लिए प्रदर्शन करते एनएसयूआई के कार्यकर्ता बल्लभगढ़ में की छात्रा की हत्या:निकिता को न्याय के लिए प्रदर्शन करते एनएसयूआई के कार्यकर्ता

एक ही कार्ड से कर सकेंगे नोएडा और दिल्ली मेट्रो में सफर, यात्रियों को नहीं होगी परेशानी

दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (डीएमआरसी) व नोएडा मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनएमआरसी) की मेट्रो सेवा लेने वाले यात्रियों को अब जल्द ही एक कार्ड की सुविधा मिलने वाली है। दोनों मेट्रो के कॉरिडोर पर एक ही कार्ड से यात्री सफर कर सकेंगे।

इसके लिए बुधवार को डीएमआरसी और एनएमआरसी के अधिकारियों के बीच ऑनलाइन बैठक हुई। इसमें एक कार्ड ऑपरेट करने को लेकर आ रही अड़चनों पर बातचीत हुई। जल्द ही एक और बैठक होगी। इसमें तकनीकी समस्याओं को सुलझाने के बाद एक कार्ड के अमलीजामा पहनाने का काम शुरू होगा।

दरअसल, वर्तमान समय में डीएमआरसी और एनएमआरसी के मेट्रो कॉरिडोर पर अलग-अलग कार्ड लेकर यात्रियों को सफर करना पड़ता है। दोनों ही कॉरिडोर पर एक दूसरे के कार्ड का उपयोग नहीं हो सकता। इसके पीछे कुछ तकनीकी वजह बताई जा रही है। 

इसे लेकर बुधवार को अधिकारियों के बीच ऑनलाइन बैठक में एनएमआरसी के कार्यकारी निदेशक प्रवीण कुमार मिश्र के अलावा डीएमआरसी के डायरेक्टर ऑफ रोलिंग स्टॉक एसएस जोशी सहित कई अन्य अधिकारी शामिल हुए। बैठक में दोनों कॉरिडोर के लिए एक कार्ड तैयार करने पर चर्चा हुई। 

एनएमआरसी के अधिकारियों का कहना है कि एक कार्ड करने के मामले में दिल्ली मेट्रो को काम करना है, क्योंकि उनके कॉरिडोर में दिल्ली मेट्रो की अपेक्षा बेहतर तकनीक अपडेट है। लिहाजा, दिल्ली मेट्रो पर है कि वह कितनी जल्दी कार्ड का अपडेट करते हैं, ताकि पूरे दिल्ली-एनसीआर में यात्री एक ही कार्ड लेकर सफर कर सकें।

कार्ड एक काम अनेक
एनएमआरसी के मेट्रो कार्ड से न केवल मेट्रो में सफर किया जा सकता है, बल्कि बस और ट्रेनों के टिकट खरीदे जा सकते हैं। इसके अलावा एनएमआरसी के कार्ड होल्डर मॉल में खरीदारी भी कर सकते हैं।
 
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आम आदमी पार्टी के पांच विधायकों के खिलाफ एफआईआर, कोविड नियमों के उल्लंघन का आरोप

कमला मार्केट थाना पुलिस ने आम आदमी पार्टी के पांच विधायकों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। विधायकों पर आरोप है कि उन्होंने आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) के आदेशों की अवहेलना करते हुए निगम मुख्यालय सिविक सेंटर सफाई कर्मियों के साथ प्रदर्शन किया और जमकर उत्पात मचाया। पुलिस की ओर से प्रदर्शन को इजाजत नहीं दी गई थी। 

शिकायत के मुताबिक मॉडल टाउन के विधायक अखिलेश त्रिपाठी, कोंडली के विधायक कुलदीप कुमार, शालीमार बाग की विधायक वंदना कुमारी, त्रिलोकपुरी के विधायक रोहित महरोलिया और मंगोलपुरी की विधायक राखी बिडलान ने बुधवार को करीब दो हजार से अधिक सफाई कर्मियों को निगम मुख्यालय पर जमा किया। 

उसके बाद विधायकों ने सफाई कर्मियों के जरिये रोड जाम करवा दिया। रोकने पर प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों के साथ हाथापाई की। इसमें नौ पुलिसकर्मी घायल हो गए। प्रदर्शनकारियों के उपद्रव में कमला मार्केट के एसीपी अनिल कुमार को चोटें लगीं औैर उनकी एक अंगुली टूट गई है। 

प्रदर्शन को उग्र होता देख सभी विधायक वहां से चले गए। पुलिस ने पांचों विधायक समेत उपद्रवियों के खिलाफ महामारी अधिनियम, सरकारी आदेश का उल्लंघन, सरकारी काम में बाधा पहुंचाने के तहत मामला दर्ज कर लिया। मामले पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने उपद्रव करने वाले 13 लोगों को हिरासत में ले लिया। 
 

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आज बेहद खराब श्रेणी में पहुंच सकती है दिल्ली की हवा, प्रदूषण से अभी नहीं मिलेगी राहत

राजधानी में बुधवार को हवा की रफ्तार बढ़ने से प्रदूषण स्तर में थोड़ा सुधार आया, लेकिन बृहस्पतिवार से प्रदूषण का स्तर फिर बढ़ सकता है। सुबह 10 बजे तक वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 281 दर्ज किया गया, जो खराब श्रेणी में रहा। वहीं, शाम छह बजे तक यह 313 पर पहुंच गया।

पिछले 24 घंटे की बात करें तो मंगलवार को एक्यूआई 312 रहा, जबकि सोमवार को 353, रविवार को 349, शनिवार को 345 और शुक्रवार को 366 दर्ज किया गया। मौसम विभाग के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक के अनुसार, मंगलवार शाम मौसम की अनुकूल स्थितियों के कारण बुधवार सुबह प्रदूषण स्तर में कमी आई। हालांकि, एक बार फिर से हवा की रफ्तार में कमी होने की वजह से राजधानी में प्रदूषण का स्तर फिर बढ़ेगा। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि बृहस्पतिवार को प्रदूषण का स्तर बहुत खराब श्रेणी में पहुंच सकता है।

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की वायु मानक संस्था सफर के अनुसार, पराली जलने की वजह से रविवार को इस सीजन में सबसे अधिक पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 की 23 फीसदी भागीदारी रही। इससे पहले सोमवार को यह 16 फीसदी, रविवार को 19 और शनिवार को नौ फीसदी दर्ज किया गया था।

सफर के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को इस सीजन में सबसे अधिक 1,943 पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की गई। मौसम विभाग के अनुसार, हवा का रुख उत्तर-पश्चिमी रहा और रफ्तार चार किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई। न्यूनतम तापमान भी 13.8 डिग्री सेल्सियस रहा। केंद्रीय एजेंसी के अनुसार, राजधानी में 31 अक्तूबर तक हवा का स्तर बेहद खराब श्रेणी में बने रहने की संभावना बनी हुई है।
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खास खबरः मोटे लोगों के लिए जानलेवा बन रहा है कोरोना, 30 फीसदी मरीजों को पड़ी वेंटिलेटर की जरूरत

दिल्ली का हाल...
मोटापे से ग्रस्त लोगों के लिए कोरोना संक्रमण जानलेवा साबित हो रहा है। दिल्ली के कोविड अस्पतालों में अब तक हुई मौतों में ऐसे मरीजों की एक बड़ी संख्या है, जो पहले से मोटापे से ग्रस्त थे। डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना के जितने मरीज संक्रमित हुए, उनमें से जिन लोगों को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ी, उनमें करीब 30 फीसदी लोग मोटापे से पीड़ित थे।

दिल्ली के सबसे बड़े कोविड अस्पताल एलएनजेपी में भर्ती हुए कोरोना के कुल मरीजों में से 30 फीसदी ऐसे थे, जो मोटापे के शिकार थे। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुरेश कुमार ने कहा कि लोगों में मोटापा बड़ी समस्या है। अगर ऐसे व्यक्ति को कोरोना हो जाता है, तो यह जानलेवा साबित होता है। ऐसे मरीजों के इलाज में परेशानी भी आती हैं, क्योंकि यह लोग पहले से कई तरह की बीमारियों की चपेट में हैं। 

व्यक्ति में मोटापा जितना बढ़ता जाएगा, उसमें बीमारियां होने का खतरा भी बढ़ता जाएगा। हालांकि, अस्पताल के डॉक्टर इनके इलाज पर खास ध्यान दे रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद मोटापा ग्रस्त लोगों में ज्यादा खतरा बना ही रहता है। यहां अब तक जिन लोगों की संक्रमण से मौत हुई है, उनमें करीब 30 फीसदी लोग मोटापे से ग्रस्त थे।

राजीव गांधी सुपर स्पेशयलिटी अस्पताल के कोविड नोडल अधिकारी डॉक्टर अजीत जैन ने बताया कि मोटापे से पीड़ित लोगों के इलाज पर विशेष ध्यान दिया जाता है। शरीर में अधिक फैट जमा होने के कारण इन मरीजों को डायबिटीज, दिल की बीमारी भी हो जाती है। इससे इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने लगती है। यही कारण है कि अस्पताल में अब तक हुई कुल मौतों में से करीब 20 फीसदी लोग मोटापा और इससे होने वाली बीमारियों से पीड़ित थे।

इसलिए कोरोना हो रहा घातक साबित
अपोलो अस्पताल के डॉक्टर पीके सिंघल बताते हैं कि मोटे लोगों को कोई भी बीमारी होने की आशंका ज्यादा होती है। मोटापे से पीड़ित लोगों मेें फैट अधिक मात्रा में रहता है। यह लीवर को प्रभावित करता है। इस वजह से ब्लड में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने लगती है। यही कारण है कि मोटे लोगों को कोरोना से काफी अधिक खतरा रहता है। अगर इन मरीजों में डायबिटीज की भी समस्या है तो यह रोग इनके लिए काफी घातक साबित होता है।

एम्स के अध्ययन में भी खुलासा
एम्स में हाल में हुए एक अध्ययन के मुताबिक, जिन लोगों का बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 23 से अधिक होता है, उन्हें कोरोना संक्रमित होने का खतरा बढ़ जाता है। मोटे लोगों में बीएमआई 23 से अधिक ही रहता है। ऐसे लोगों को कोरोना से संक्रमित होने का खतरा दो गुना हो जाता है। 400 लोगों पर किए गए अध्ययन में 300 लोगों की रिपोर्ट निगेटिव व 100 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव थी। इन लोगों के वजन और लंबाई के हिसाब से बॉडी मास इंडेक्स भी पता किया गया। पॉजिटिव मरीजों में 90 फीसदी का बीएमआई 23 से ज्यादा था।

मोटापा नियंत्रित करने के लिए उपाय
-फाइबर वाली चीजों को अपने खाने में शामिल करें।
-भोजन में सब्जियां और फल को सेवन अधिक करें।
-वजन कम करने के लिए नियमित रूप से व्यायाम करें।
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इस दिवाली पर जलाए जा सकेंगे केवल ग्रीन पटाखे, मंत्रीजी का अभियान 3 नवंबर से

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने कहा कि इस बार दीवाली पर केवल ग्रीन पटाखों के उत्पादन, बिक्री और उपयोग करने की इजाजत होगी। इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। दीपावली पर पटाखे जलाने से राजधानी की हवा काफी जहरीली हो जाती है और इसका लोगों की जिंदगी पर गंभीर असर पड़ता है। दिल्ली सरकार 3 नवंबर से पटाखा विरोधी अभियान शुरू करेगी। इसके मद्देनजर दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी (डीपीसीसी) की 11 टीमें गठित की जा रही हैं, जबकि पुलिस का भी सहयोग लिया जाएगा।

पर्यावरण मंत्री ने दिल्लीवासियों से अपील की है कि कोविड-19 महामारी के कारण स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ‘नो पटाखा’ अभियान शुरू करें। पटाखे और पराली जलने से होने वाला धुआं दिल्ली के प्रदूषण को और बढ़ाएगा।

दिल्ली सचिवालय में प्रेसवार्ता कर पर्यावरण मंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार की ओर से ‘युद्ध, प्रदूषण के विरुद्ध’ अभियान चलाया जा रहा है। पिछले करीब एक महीने से धूल प्रदूषण के खिलाफ एंटी डस्ट कैंपेन और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए ‘रेड लाइट ऑन, गाड़ी ऑफ’ अभियान के साथ पराली की समस्या से निपटने के लिए बायो डी कंपोजर का छिड़काव, इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी, ट्री ट्रांसप्लांटेशन पॉलिसी पर अमल के साथ साथ दिल्ली के 13 हॉटस्पॉट की काफी नजदीक से निगरानी की जा रही है। 

सीएम आज लांच करेंगे ग्रीन दिल्ली एप
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल बृहस्पतिवार को ‘ग्रीन दिल्ली एप’ लांच करेंगे। इसके बाद दिल्ली में इन अभियानों में अगर कहीं लापरवाही बरती जा रही है तो उन पर सख्ती से कार्रवाई की जाएगी, ताकि प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके। इसके लिए ग्रीन दिल्ली एप को लांच किया जा रहा है।

उत्पादकों की सूची आज होगी अपलोड
पर्यावरण मंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के 23 अक्तूबर 2018 के आदेशानुसार दिल्ली में केवल ग्रीन पटाखों का उत्पादन, बिक्री और उपयोग की इजाजत दी है। ग्रीन पटाखे में पायरोटेक्निक फायर वर्क्स के साथ ईंधन और ऑक्सीडाइजर मिलाया जाता है, जबकि सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड जैसे प्रदूषक तत्व काफी कम मात्रा में होते हैं। दिल्ली और देशभर में 93 उत्पादक एजेंसियां  ग्रीन पटाखों का उत्पादन करती हैं। डीपीसीसी की वेबसाइट पर ग्रीन पटाखों के पंजीकृत उत्पादकों की सूची बृहस्पतिवार को अपलोड कर दी जाएगी। वहीं, एंटी क्रैकर स्पेशल स्कवॉड में 5 पर्यावरण मार्शल भी होंगे।
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Delhi News Today 29 Oct: दिल्ली समाचार | सुनिए शहर की ताजातरीन खबरें

त्योहार शुरू होते ही बढ़ गया कोरोना का खतरा, लापरवाही के कारण बढ़ रहा संक्रमण

त्योहार शुरू होते ही राजधानी में एक बार फिर कोरोना संक्रमण बढ़ने का खतरा पनप गया है। पिछले कुछ दिन से लगातार सामने आ रहे चार हजार से अधिक मामलों के चलते लोगों को बेपरवाह बताया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि लोग खुद को संक्रमण से सुरक्षित मान रहे हैं। इसलिए वह कोरोना से जुड़े सतर्कता नियमों का सही पालन नहीं कर रहे हैं। इससे पहले विशेषज्ञों की एक समिति ने कहा था कि सर्दी और त्योहारी सीजन की वजह से दिल्ली में रोजाना 14 हजार मामले सामने आ सकते हैं। 

वहीं, नीति आयोग के सदस्य  वीके पॉल की अध्यक्षता वाली नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (एनसीडीसी) की समिति ने भी रोजाना दिल्ली में 15 हजार मामले सामने आने की आशंका व्यक्त की है। डॉक्टरों के मुताबिक, ये उछाल त्योहारी सीजन और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न करने के अलावा मास्क पहनने में लापरवाही बरतने का नतीजा है।

नई दिल्ली स्थित अपोलो अस्पताल के आंतरिक चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. एस चटर्जी का कहना है कि त्योहारी सीजन के साथ ही लोग बेपरवाह हो गए हैं। उन्हें लगता है कि कोरोना वायरस से वह सुरक्षित हैं, लेकिन पिछले हफ्ते त्योहार के चलते लोग खुलकर एक-दूसरे से मिले हैं, जिसकी वजह से उछाल सामने आ रहा है। 

उनका कहना है कि अब दिल्ली के अस्पताल और डॉक्टर आगामी पीक से निपटने के लिए तैयार हैं। क्योंकि, पिछले दो पीक को लेकर चिकित्सीय वर्ग काफी कुछ जानकारी हासिल कर चुका है। लोकनायक अस्पताल की डॉ. रीतू सक्सेना का कहना है कि जो मरीज भर्ती हो रहे हैं, उनकी जल्दी छुट्टी हो रही है। तेजी से रिकवरी होने के चलते अब पहले की तरह बिस्तरों की कमी नहीं है। 

दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, 23 से 25 अक्तूबर के बीच दिल्ली में क्रमश: 4048, 4116, 4136 मामले सामने आए। पिछली बार ये आंकड़ा 19 सितंबर को 4,000 के पार हुआ था, जिसके बाद से इसमें गिरावट आ रही थी। 26 अक्तूबर को 2832 और 27 अक्तूबर को 4853 और 28 अक्तूबर को  5673  संक्रमित मिले हैं। पहली बार दिल्ली में रोजाना संक्रमित मिलने वाले मरीजों का आंकड़ा पांच हजार के पार  पहुंचा है।
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