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रुड़की: 30 रुपये की थाली का इंतजार, अटल अन्नपूर्णा कैंटीन पर लटका ताला
रुड़की। तहसील परिसर में अधिवक्ताओं और फरियादियों को सस्ते दर पर भोजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाई गई अटल अन्नपूर्णा कैंटीन पर पिछले करीब छह माह से ताला लटका हुआ है। इससे तहसील में आने वाले अधिवक्ताओं, फरियादियों और अन्य लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, रुड़की में चल रही अग्निवीर भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने पहुंच रहे अभ्यर्थियों को भी कम कीमत पर भोजन नहीं मिल पा रहा है। तहसील परिसर में करीब 23 लाख रुपये की लागत से अटल अन्नपूर्णा कैंटीन का निर्माण कराया गया था। चार फरवरी 2019 को तत्कालीन कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक और स्थानीय विधायक एवं मंत्री प्रदीप बत्रा ने इसका उद्घाटन किया था। कैंटीन बनाने के लिए अधिवक्ताओं के करीब सात-आठ चैंबरों को तोड़ा गया था। यहां भोजन की थाली का मूल्य 30 रुपये निर्धारित किया गया था, ताकि जरूरतमंदों को कम खर्च में भोजन मिल सके। अधिवक्ताओं का कहना है कि कैंटीन बंद होने से लोगों को भोजन की तलाश में इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। एक अधिवक्ता ने इस संबंध में शिकायत भी की थी, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका। लोगों ने कैंटीन दोबारा शुरू कराने की मांग उठाई है।
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रोजाना 500 से अधिक लोग प्रभावित
तहसील परिसर में संचालित अटल अन्नपूर्णा कैंटीन अधिवक्ताओं और फरियादियों के लिए सस्ते भोजन का प्रमुख केंद्र थी। यहां सप्ताह भर अलग-अलग तरह का खाना उपलब्ध कराया जाता था। हर दिन बदलते मेन्यू के तहत दाल-चावल, मिक्स सब्जी, राजमा-चावल, कढ़ी-चावल समेत अन्य व्यंजन थाली में परोसे जाते थे। इसके अलावा कैंटीन में पेयजल की भी व्यवस्था थी। तहसील में प्रतिदिन बड़ी संख्या में फरियादी, अधिवक्ता और अन्य लोग अपने कामकाज के सिलसिले में पहुंचते हैं। ऐसे में कैंटीन उनके लिए कम कीमत पर भोजन करने का सहारा बनी हुई थी। अधिवक्ताओं के अनुसार, कैंटीन बंद होने से लोगों को भोजन के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। इसका सबसे अधिक असर आर्थिक रूप से कमजोर फरियादियों पर पड़ रहा है। अनुमान है कि कैंटीन बंद होने से प्रतिदिन 500 से अधिक लोग प्रभावित हो रहे हैं। लोगों ने कैंटीन को दोबारा शुरू कर सस्ते भोजन की सुविधा बहाल करने की मांग की है।
पिछले वर्ष जिस व्यक्ति को कैंटीन आवंटित की गई थी, उसने नुकसान और निजी कारणों के चलते संचालन बंद कर दिया था। इसके बाद दोबारा नीलामी कराई गई, लेकिन किसी ने रुचि नहीं दिखाई। उन्होंने बताया कि कैंटीन को दोबारा शुरू कराने की प्रक्रिया की जाएगी।
दीपक रामचंद्र शेट, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट
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