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क्या नौकरी में आ रही परेशानियां वर्ष 2021 में हो जाएंगी समाप्त ? जानिए अनुभवी एस्ट्रोलॉजर्स से
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Digital Edition

Internet Day 2020: कोविड-19 के दौरान सबसे बड़ा मददगार बना इंटरनेट, लोगों ने खूब लगवाए ब्रॉडबैंड

कॉविड-19 के दौरान घरों में लॉकडाउन लोगों के लिए इंटरनेट सबसे बड़ा मददगार बन कर उभरा। इस दौरान जहां इंटरनेट का उपयोग करने वालों की संख्या में इजाफा हुआ, वहीं ऑनलाइन बिताए जाने वाले समय में भी बढ़ोतरी हुई। अब हर घर में पढ़ाई, मनोरंजन, व्यापार से लेकर नौकरी ढूंढने और वित्तीय लेनदेन तक में इंटरनेट का जमकर इस्तेमाल हो रहा है।

लॉकडाउन से पहले भी बड़ी संख्या में लोग इंटरनेट का इस्तेमाल इन सभी चीजों के लिए करते थे। लेकिन लॉकडाउन के बाद ऐसे लोगों की संख्या काफी अधिक बढ़ गई है। अब लगभग सभी घरों में ऑनलाइन पढ़ाई, खरीदारी, मनोरंजन और अन्य कामों के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल हो रहा है।

यहां तक कि लॉकडाउन के चलते नौकरी गंवाने वाले भी इंटरनेट के जरिये ही रोजगार ढूंढ रहे हैं। अब नौकरी के लिए उन्हें सीवी लेकर दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं पड़ती। ऐसे ही नया स्टार्टअप शुरू करने वालों को अपना सामान या सर्विस बेचने के लिए बाजार में नहीं भटकना पड़ता।

लोगों ने लगवाए ब्रॉडबैंड कनेक्शन
लॉकडाउन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने वर्क फ्रॉम होम किया। इसके अलावा खाली समय में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एंटरटेनमेंट और बच्चों की पढ़ाई के लिए भी तेज इंटरनेट की जरूरत थी। ऐसे में बड़ी संख्या में लोगों ने ब्रॉडबैंड के कनेक्शन भी लिए। बीएसएनएल के साथ ही ज्यादातर बड़ी कंपनियां ब्रॉडबैंड कनेक्शन दे रही हैं।
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उत्तराखंड: सीएम त्रिवेंद्र और नाराज मंत्री हरक सिंह रावत के बीच आज होगी मुलाकात

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और श्रम मंत्री हरक सिंह के बीच आखिरकार मुलाकात तय हो गई है। दोनों के बीच आज बृहस्पतिवार को देहरादून में ही मुलाकात होगी। इस मुलाकात के बाद हरक सिंह पिछले कुछ समय से अख्तियार की गई अपनी खामोशी को भी तोड़ सकते हैं।

मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों के मुताबिक, सीएम और श्रम एवं वन मंत्री के बीच दोपहर बाद मुलाकात होगी। यह तय भी हो गया है और श्रम मंत्री ने भी इसकी सहमति दे दी है। भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के पुनर्गठन को लेकर श्रम मंत्री हरक सिंह खासे नाराज हैं।


उनका कहना है कि बिना उनकी जानकारी में लाए ही बोर्ड का पुनर्गठन कर दिया गया। हरक सिंह की कोशिश थी कि बोर्ड के कार्यकाल को एक साल और बढ़ा दिया जाए। ऐसे में बोर्ड का पुनर्गठन कर दिया गया और हरक सिंह को इसकी जानकारी बाद में मिली। बोर्ड के पुनर्गठन में हरक सिंह बोर्ड अध्यक्ष पद से बाहर हो गए थे।

इसके बाद से ही हरक सिंह ने चुप्पी साध ली थी। दो ऐसे अवसर भी आए जब हरक सिंह और सीएम को एक ही कार्यक्रम में शामिल होना था। इन दोनों ही कार्यक्रमों से हरक सिंह किनारा कर गए। यहां तक की एक कार्यक्रम उनके अपने वन महकमे का था।

ई आफिस के शुभारंभ के इस समारोह के लिए विशिष्ट अतिथि के रूप में हरक सिंह को भी आमंत्रित किया गया था। इस पर हरक सिंह का कहना था कि उन्हें जानकारी तब दी गई जब उनके अन्य कार्यक्रम तय हो गए। एक अन्य समारोह आयुष अस्पताल के उद्घाटन का था, जिसमें सीएम के साथ हरक सिंह को भी न्योता था। हरक इस कार्यक्रम में भी नहीं आए थे।
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Corona in Uttarakhand: 304 संक्रमित मिले, दो की मौत, मरीजों की संख्या 61 हजार पार 

उत्तराखंड में बीते 24 घंटे में 304 संक्रमित मरीज मिले हैं। कुल संक्रमितों का आंकड़ा 61 हजार पार हो गया है। साथ ही 463 मरीजों को डिस्चार्ज किया गया। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को 11743 सैंपल जांच में निगेटिव मिले हैं। केदारनाथ विधायक मनोज रावत भी पॉजिटिव पाए गए हैं। उन्होंने 23 अक्तूबर को अगस्त्यमुनि में टेस्ट कराया था। उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद आज वे दून अस्पताल में भर्ती हुए हैं।

लगभग चार महीने के बाद प्रदेश में एक दिन में सबसे कम दो मरीजों की मौत हुई है। अभी तक एक दिन में सबसे अधिक 20 मरीजों की मौत हुई थी। अब संक्रमण से मृत्यु दर भी कम हो रही है। 


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आज देहरादून जिले में सबसे अधिक 79 कोरोना मरीज मिले हैं। नैनीताल में 47, पौड़ी में 38, हरिद्वार में 29, रुद्रप्रयाग में 23, चमोली में 23, ऊधमसिंह नगर में 18, टिहरी में 14, बागेश्वर में 10, चंपावत में आठ, उत्तरकाशी में छह, पिथौरागढ़ में पांच व अल्मोड़ा में चार कोरोना संक्रमित मामले मिले हैं। 

प्रदेश में दो कोरोना मरीजों की मौत हुई है। इसमें एम्स ऋषिकेश में एक और सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी में एक मरीज ने दमतोड़ा है। मरने वालों की संख्या 1009 हो गई है। 
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उत्तराखंड: हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत

उत्तराखंड सरकार ने नैनीताल हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुज्ञा याचिका (एसएलपी) दाखिल कर दी है। सरकार ने एक समाचार चैनल के सीईओ उमेश शर्मा के खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमों को निरस्त करने और सीबीआई जांच के आदेश के फैसले के खिलाफ एसएलपी दायर की है।

इसी मामले में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। भाजपा के मुख्य प्रवक्ता व विधायक मुन्ना सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री की ओर से सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर करने की पुष्टि की है।

नैनीताल हाईकोर्ट ने मंगलवार को उमेश शर्मा पर दर्ज आपराधिक मुकदमों को निरस्त करने का आदेश दिया था। साथ ही उमेश कुमार की याचिका के पैरा आठ को आधार बनाते हुए सीबीआई जांच के आदेश दिए थे।

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कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत पर लगे आरोपों को देखते हुए सही होगा कि सच सबके सामने आए। कोर्ट का फैसला आने के बाद बुधवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की ओर से सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुज्ञा याचिका दाखिल कर दी गई। भाजपा के मुख्य प्रवक्ता मुन्ना सिंह चौहान ने एसएलपी दाखिल करने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि भाजपा उमेश शर्मा के खिलाफ एफआईआर निरस्त करने के फैसले से संतुष्ट नहीं है। उन्होंने इसे कानूनी दृष्टि से गलत बताया।

उधर, प्रदेश सरकार की ओर से भी सुप्रीम कोर्ट में उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ एसएलपी दाखिल की गई है। सुप्रीम कोर्ट में प्रदेश सरकार की एडवोकेट ऑन रिकार्ड वंशजा शुक्ला ने एसएलपी दाखिल करने की पुष्टि की है। बताया कि सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एसएलपी सरकार ने उमेश शर्मा के खिलाफ नेहरू कॉलोनी थाने में दर्ज मुकदमों को निरस्त करने के फैसले और मामले में सीबीआई जांच के आदेश को चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि उन्हें जल्द एसएलपी स्वीकार होने की उम्मीद है।
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