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On the third day of the Radha Rani Braj Yatra, sites including the location of Lalita’s marriage and various ancient *kunds* (sacred ponds) were visited.
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VIDEO: राधारानी ब्रज यात्रा के तीसरे दिन श्रद्धालुओं ने ललिता विवाह स्थल सहित प्राचीन कुंडों के किए दर्शन
ब्रज की रज में राधारानी का प्रेम, ब्रजवासियों में ठाकुरजी का स्वरूप और यहां की लीलास्थलियों में राधा माधव की दिव्य लीलाओं की अनुभूति होती है। ब्रजधाम केवल दर्शन का स्थल नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और अनन्य भक्ति की जीवंत परंपरा है। इसी भाव को उजागर करते हुए राधा रानी ब्रज यात्रा के तीसरे दिन भगवताचार्य भक्त शरण महाराज ने कहा कि धाम और धामी में कोई भेद नहीं है, ब्रजभूमि और ब्रजवासियों की सेवा ही राधा माधव की सच्ची आराधना है। उन्होंने पद्मश्री रमेश बाबा के जीवन का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने 16 वर्ष की आयु में गृह त्याग के बाद अपने जीवन के 73 वर्ष अखंड ब्रजवास और धाम सेवा में समर्पित कर दिए। भक्त शरण महाराज ने कहा कि ब्रज मंडल की निधि रमेश बाबा ने ब्रजभूमि और ब्रजवासियों को ही अपना आराध्य माना। उनका जीवन ब्रज के प्रति अनन्य प्रेम, त्याग और समर्पण का उदाहरण है। उन्होंने धाम की सेवा के साथ अनेक जीवों को भी धाम सेवा का लाभ दिलाया। ब्रज यात्रा के तीसरे दिन श्रद्धालु अपने पड़ाव स्थल से चलकर ललिता विवाह स्थल पहुंचे। यहां उस शिला के दर्शन किए, जिस पर मेहंदी लगे करकमलों की छाप अंकित होने की मान्यता है। पर्वत पर स्थित दूध कटोरा सहित अन्य दर्शनीय स्थलों के दर्शन कर यात्रियों ने ब्रज की प्राचीन लीलाओं का स्मरण किया। इसके बाद यात्रियों ने देह कुंड, ललिता अटा, नारायण भट्ट जी की समाधि, सूर्य कुंड, प्रिया कुंड, कीर्ति कुंड और वृषभानु कुंड के दर्शन किए। सभी दर्शनीय स्थलों की यात्रा के बाद श्रद्धालु पुनः अपने पड़ाव स्थल पर पहुंचे। मार्ग में जगह-जगह यात्रा का भव्य स्वागत किया गया।यात्रा के दौरान देवी वत्सला, ललिता, श्यामा, गौरी, अनीता और अर्चना ने भगवन्नाम संकीर्तन कर श्रद्धालुओं को भक्तिरस में सराबोर किया। भजन-कीर्तन के बीच यात्रियों ने ब्रज की भक्ति परंपरा का अनुभव किया। यात्रा का संचालन ब्रज शरण जी और नृसिंह दास बाबा कर रहे थे। राधाकांत शास्त्री, राजकुमार जी, प्रभु दास, संजय सिंह, ब्रजकिशोर, गिरधर शास्त्री, ब्रजदास सहित अनेक प्रमुख जन यात्रा में सम्मिलित रहे।
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