कोटा शहर में वाहन चोरी की वारदातों में इको गाड़ियों को खासतौर से निशाना बनाने वाले एक गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। इस गिरोह से जुड़े तीन शातिर चोरों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 12 से अधिक चोरी की इको कारें बरामद की हैं, जिनमें से पांच गाड़ियां संदिग्ध मानी जा रही हैं। उनके इंजन नंबर, चेचिस नंबर और नंबर प्लेट बदलने की जांच की जा रही है।
शहर की बढ़ती वाहन चोरी की घटनाओं से पुलिस सतर्क
कोटा शहर और उसके आसपास के इलाकों में लगातार इको गाड़ियों की चोरी की घटनाएं सामने आ रही थीं। इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए शहर पुलिस अधीक्षक तेजस्विनी गौतम ने एक विशेष टीम गठित की। इस टीम ने तकनीकी संसाधनों, पुराने रिकॉर्ड और 100 से अधिक सीसीटीवी फुटेज की मदद से जांच को आगे बढ़ाया और अंततः तीन आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
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गिरफ्त में आए आरोपी कोटा के स्थानीय निवासी
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में सैयद औसाफ अली उर्फ शानू, आदिल और मोहम्मद हुसैन शामिल हैं, जो कोटा शहर के ही निवासी हैं। शानू, जो बोरखेड़ा क्षेत्र का रहने वाला है, पर बड़ा कर्ज हो चुका था और वह लंबे समय से बेरोजगार था। पुलिस के अनुसार, शानू ने सबसे पहले साल 2023 में ईएसआई अस्पताल के पास से एक कार चुराई थी और उसे खुद इस्तेमाल करने लगा। बाद में उसी गाड़ी को उसने मोहम्मद हुसैन को बेच दिया, जो विज्ञान नगर में कार वॉशिंग और रिपेयरिंग का काम करता है।
जल्दी अमीर बनने की चाह में बने चोर
तीनों आरोपियों ने जल्द अमीर बनने की चाह में एक गिरोह बनाकर चोरी की वारदातों को अंजाम देना शुरू किया। जब इन्हें यह जानकारी मिली कि इको कार की बाजार में भारी डिमांड है, तो इन्होंने विशेष रूप से इको गाड़ियों को ही निशाना बनाना शुरू किया। इन गाड़ियों को चुराना इनके लिए आसान था और उन्हें मॉडिफाई कर बेचने में भी ज्यादा दिक्कत नहीं आती थी।
रेलवे कॉलोनी से लेकर सुल्तानपुर तक फैला था गिरोह का नेटवर्क
आरोपियों ने शहर के रेलवे कॉलोनी, दादाबाड़ी, विज्ञान नगर, बोरखेड़ा और कैथूनीपोल जैसे क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्र सुल्तानपुर में भी वारदातों को अंजाम दिया। बरामद की गई गाड़ियों में से पांच वाहन ऐसे हैं, जिनके मूल पहचान चिन्ह बदल दिए गए हैं। पुलिस अब इन वाहनों की असली पहचान और मालिकों का पता लगाने के लिए गहन जांच कर रही है।
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जांच अभी भी जारी, और खुलासों की संभावना
कोटा पुलिस का कहना है कि यह केवल शुरुआत है। गिरोह से जुड़े और भी कई राज खुल सकते हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में लगी है कि चोरी की गई कारों को कौन खरीदता था और इनकी बिक्री किन रास्तों से की जाती थी। साथ ही इस नेटवर्क से कोई अन्य व्यक्ति या गिरोह जुड़ा है या नहीं, इसकी भी तहकीकात की जा रही है।