बारां में किसान नेता नरेश मीणा और अंता के पूर्व विधायक कंवरलाल मीणा की रिहाई की मांग को लेकर सोमवार को हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने बारां कलेक्ट्रेट का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। इसके बाद राज्यपाल के नाम एसडीएम रामावतार मीणा को ज्ञापन सौंपकर दोनों की रिहाई सहित विभिन्न मांगों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की।
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत प्रदर्शनकारी भटवाड़ा-झाड़वा चौकी से रैली के रूप में रवाना हुए। रैली पब्लिक पार्क पहुंची, जहां बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए। इसके बाद प्रदर्शनकारी पैदल मार्च करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां हजारों लोगों ने ‘नरेश मीणा को रिहा करो’ और ‘कंवरलाल मीणा को रिहा करो’ के नारे लगाते हुए प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि किसान नेता नरेश मीणा के खिलाफ झालावाड़ के कोतवाली थाने में दर्ज प्रकरण संख्या 504/2025 की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। उपलब्ध घटनाक्रम और वीडियो फुटेज के आधार पर लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष समीक्षा करने की मांग की गई। वक्ताओं ने कहा कि यदि आरोप साक्ष्यों से प्रमाणित नहीं होते हैं तो प्रकरण की दोबारा समीक्षा कर न्यायोचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
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वक्ताओं ने कहा कि नरेश मीणा लगातार किसानों और आम जनता के मुद्दों को लेकर आवाज उठाते रहे हैं। उनके खिलाफ दर्ज मामलों की निष्पक्ष जांच कर उन्हें न्याय दिया जाना चाहिए और तत्काल जेल से रिहा किया जाना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि मांग पूरी नहीं होने पर जनआक्रोश बढ़ेगा और आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
ज्ञापन में पूर्व विधायक कंवरलाल मीणा की लंबे समय से लंबित दया याचिका पर भी जल्द निर्णय लेने की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने उनके स्वास्थ्य का हवाला देते हुए राज्यपाल से उनकी शेष सजा माफ कर तत्काल जेल से रिहा करने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण आंदोलनों में भाग लेने वाले नागरिकों के साथ निष्पक्ष एवं न्यायसंगत व्यवहार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि न्याय, लोकतांत्रिक अधिकारों और संवैधानिक मूल्यों की लड़ाई है।
सर्व समाज के लोगों ने राज्यपाल से ज्ञापन में उठाई गई मांगों पर शीघ्र संज्ञान लेकर नरेश मीणा और कंवरलाल मीणा की रिहाई के संबंध में उचित एवं न्यायपूर्ण कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को बारां से आगे राजस्थान के विभिन्न जिलों तक फैलाकर प्रदेशव्यापी आंदोलन का रूप दिया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी राजस्थान सरकार की होगी।