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Cheetahs strike in the Kuno region; they entered a shed near a house and preyed on two calves.
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कूनो क्षेत्र में चीतों का हमला: टपरी में घुसे चीते, दो बछड़ों को किया शिकार; सो रहे दंपती ने भागकर बचाई जान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्योपुर
Published by: श्योपुर ब्यूरो
Updated Sun, 25 Oct 2026 03:52 PM IST
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कूनो नेशनल पार्क से बाहर निकलकर चीतों के ग्रामीण इलाकों में पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी है। श्योपुर के कूनो क्षेत्र में रविवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब दो चीते कराहल क्षेत्र के बमोरी गांव में एक पशुपालक के घर की टपरी में घुस गए और वहां बंधे दो बछड़ों का शिकार कर लिया। घटना के दौरान पशुपालक और उसकी पत्नी कुछ ही दूरी पर खटिया पर सो रहे थे।
जानकारी के मुताबिक, सुबह के समय मवेशियों की भगदड़ और आवाज सुनकर पशुपालक सोमला वीर और उनकी पत्नी की नींद खुली। जैसे ही दोनों ने टपरी की ओर देखा, वहां चीतों को देखकर उनके होश उड़ गए। चीतों को सामने देखकर दंपती घबरा गए और अपनी जान बचाने के लिए मौके से भाग खड़े हुए।
बताया जा रहा है कि चीतों ने टपरी में बंधे दो बछड़ों को अपना शिकार बना लिया। इसके बाद आसपास के ग्रामीणों में भी दहशत फैल गई। घटना की जानकारी मिलते ही ग्रामीण मौके पर एकत्रित हो गए और वन विभाग को सूचना दी गई। ग्रामीणों का कहना है कि कूनो नेशनल पार्क से निकलकर चीते लगातार आसपास के गांवों और ग्रामीण क्षेत्रों में घूम रहे हैं। इससे पशुपालकों के साथ-साथ ग्रामीणों में भी डर का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों को अपने मवेशियों की सुरक्षा की चिंता सता रही है।
ग्रामीणों ने वन विभाग से क्षेत्र में गश्त बढ़ाने और चीतों की लगातार निगरानी करने की मांग की है। साथ ही, जिन पशुपालकों के मवेशियों का शिकार हुआ है, उन्हें नियमानुसार मुआवजा देने की मांग भी की गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में चीतों की निगरानी और ट्रैकिंग के लिए बनाई गई टीम फिलहाल नजर नहीं आ रही है। ऐसे में चीतों की लोकेशन को लेकर ग्रामीणों में चिंता बढ़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते निगरानी और गश्त व्यवस्था मजबूत नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में चीतों और इंसानों के बीच टकराव का खतरा और बढ़ सकता है।
फिलहाल घटना के बाद वन विभाग की टीम द्वारा चीतों की मौजूदगी और उनकी गतिविधियों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन और वन विभाग से तत्काल प्रभाव से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। कूनो क्षेत्र में चीता पुनर्वास परियोजना के बाद ग्रामीण इलाकों में चीतों की आवाजाही लगातार एक चुनौती बनी हुई है। ऐसे में बमोरी गांव की यह घटना एक बार फिर मानव और वन्यजीव संघर्ष की आशंका को सामने लाती है।
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