{"_id":"6a8c3785a80bfba9d9030ce0","slug":"video-una-demand-for-legislation-to-safeguard-scst-development-fund-issue-raised-at-meeting-2026-08-24","type":"video","status":"publish","title_hn":"ऊना: एससी-एसटी विकास निधि की सुरक्षा के लिए कानून बनाने की मांग, बैठक में उठा मुद्दा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ऊना: एससी-एसटी विकास निधि की सुरक्षा के लिए कानून बनाने की मांग, बैठक में उठा मुद्दा
ऊना। हिमाचल प्रदेश डॉ. बीआर आंबेडकर मिशन अनुसूचित जाति कल्याण समिति की बैठक सोमवार को एमसी पार्क ऊना में प्रदेशाध्यक्ष ई. एमआर दड़ोच की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में अनुसूचित जाति समाज के कल्याण, विकास और अधिकारों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान प्रदेश में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए निर्धारित बजट की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा तेलंगाना की तर्ज पर एससी-एसटी विकास निधि कानून लागू करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। प्रदेशाध्यक्ष ई. एमआर दड़ोच ने कहा कि एससी और एसटी वर्ग के सामाजिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक उत्थान के लिए सरकार की ओर से बजट में प्रावधान किया जाता है, लेकिन कई बार इस राशि को अन्य मदों में डायवर्ट किए जाने की शिकायतें सामने आती हैं। उन्होंने कहा कि यदि इस वर्ग के विकास के लिए निर्धारित धनराशि वास्तव में इसी समाज के कल्याण पर खर्च की जाए तो शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आवास और बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में बेहतर परिणाम सामने आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 1980 में अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के विकास के लिए स्पेशल कंपोनेंट प्लान की व्यवस्था शुरू की गई थी। इसके तहत आबादी के अनुपात के आधार पर बजट का प्रावधान किया जाता है, लेकिन बजट की सुरक्षा के लिए प्रभावी कानूनी व्यवस्था का होना जरूरी है। उन्होंने सरकार से मांग की कि हिमाचल में भी तेलंगाना की तर्ज पर एससी-एसटी विकास निधि कानून बनाया जाए, जिससे इस वर्ग के लिए निर्धारित बजट को दूसरे कार्यों में स्थानांतरित न किया जा सके।
ऊना: एससी-एसटी विकास निधि की सुरक्षा के लिए कानून बनाने की मांग, बैठक में उठा मुद्दा
ऊना। हिमाचल प्रदेश डॉ. बीआर आंबेडकर मिशन अनुसूचित जाति कल्याण समिति की बैठक सोमवार को एमसी पार्क ऊना में प्रदेशाध्यक्ष ई. एमआर दड़ोच की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में अनुसूचित जाति समाज के कल्याण, विकास और अधिकारों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान प्रदेश में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए निर्धारित बजट की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा तेलंगाना की तर्ज पर एससी-एसटी विकास निधि कानून लागू करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। प्रदेशाध्यक्ष ई. एमआर दड़ोच ने कहा कि एससी और एसटी वर्ग के सामाजिक, शैक्षणिक एवं आर्थिक उत्थान के लिए सरकार की ओर से बजट में प्रावधान किया जाता है, लेकिन कई बार इस राशि को अन्य मदों में डायवर्ट किए जाने की शिकायतें सामने आती हैं। उन्होंने कहा कि यदि इस वर्ग के विकास के लिए निर्धारित धनराशि वास्तव में इसी समाज के कल्याण पर खर्च की जाए तो शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आवास और बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में बेहतर परिणाम सामने आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 1980 में अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के विकास के लिए स्पेशल कंपोनेंट प्लान की व्यवस्था शुरू की गई थी। इसके तहत आबादी के अनुपात के आधार पर बजट का प्रावधान किया जाता है, लेकिन बजट की सुरक्षा के लिए प्रभावी कानूनी व्यवस्था का होना जरूरी है। उन्होंने सरकार से मांग की कि हिमाचल में भी तेलंगाना की तर्ज पर एससी-एसटी विकास निधि कानून बनाया जाए, जिससे इस वर्ग के लिए निर्धारित बजट को दूसरे कार्यों में स्थानांतरित न किया जा सके।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम वीडियो सिर्फ सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध है
प्रीमियम वीडियो
सभी विशेष आलेख
फ्री इ-पेपर
सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।