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सिरमौर: नाहन के रामा जंगल में अवैध कटान का आरोप, सूखे पेड़ों की आड़ में 35 हरे चीड़ के पेड़ काटे जाने की आशंका
Ankesh Dogra
Updated Fri, 06 Nov 2026 02:31 PM IST
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जंगल में सूखे, मृत और जमीन पर गिरे पेड़ों के कटान की अनुमति मिली थी, लेकिन आरोप है कि इसी आड़ में हरे पेड़ों पर भी आरी चला दी गई। वन मंडल नाहन के वन खंड शंभूवाला के रामा जंगल में करीब 35 बिना चिह्नित चीड़ के पेड़ों के अवैध कटान का मामला सामने आया है। इनमें बीज उत्पादन के लिहाज से महत्वपूर्ण मदर ट्री भी शामिल होने की आशंका जताई जा रही है।
मामला सामने आने के बाद वन विभाग में हलचल मच गई है। शिमला से पहुंची विभाग की उड़नदस्ता टीम ने मौके का निरीक्षण कर कथित रूप से अवैध तरीके से काटे गए पेड़ों को चिह्नित किया है। फिलहाल टीम रिपोर्ट तैयार कर रही है। इसके बाद ही जिम्मेदारी तय होने और नियमानुसार कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होगी।
रामा जंगल में सूखे, मृत और जमीन पर गिरे पेड़ों के कटान का कार्य वन निगम के माध्यम से करवाया जा रहा था। इसके लिए वन विभाग ने नियमानुसार पेड़ों की पहचान कर उनकी मार्किंग की थी। अनुमति केवल चिह्नित पेड़ों को काटने की थी।
आरोप है कि कटान के दौरान मार्किंग से बाहर खड़े हरे चीड़ के पेड़ों को भी काट दिया गया। प्रारंभिक जानकारी में ऐसे पेड़ों की संख्या करीब 35 बताई जा रही है। यदि जांच में मदर ट्री के कटान की पुष्टि होती है तो यह वन संपदा को हुए नुकसान का गंभीर मामला होगा।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, पेड़ों के कथित अवैध कटान का खुलासा करीब तीन से चार महीने बाद हुआ। बताया जा रहा है कि संबंधित क्षेत्र में तैनात वन रक्षक के तबादले के बाद नए वन रक्षक ने कार्यभार संभालने से पहले जंगल का निरीक्षण किया। इसी दौरान चिह्नित पेड़ों के अलावा अन्य पेड़ों के कटे होने का पता चला।
हालांकि, इस घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामला सामने आने के बाद यह सवाल भी उठ रहे हैं कि इतने बड़े पैमाने पर कटान के बावजूद संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं मिली। यदि जानकारी थी तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएफओ हिमांशु की अगुवाई में शिमला से वन विभाग की उड़नदस्ता टीम रामा जंगल पहुंची। टीम ने कटान वाले क्षेत्र का बारीकी से निरीक्षण किया और अवैध रूप से काटे जाने की आशंका वाले पेड़ों पर निशान लगाए।
फिलहाल टीम अपनी रिपोर्ट तैयार कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, उड़नदस्ता दल ने रामा के अलावा कुछ अन्य क्षेत्रों का भी दौरा किया, जहां पेड़ों के कटान की शिकायतें मिली थीं।
मामले की सूचना मिलने के बाद मीडिया टीम ने भी संबंधित जंगल का दौरा किया। मौके पर कई ऐसे पेड़ कटे हुए मिले, जिनके चिह्नित होने के संकेत दिखाई नहीं दिए।
सामान्य तौर पर विभाग की ओर से मार्किंग किए गए पेड़ों को जड़ से कुछ ऊंचाई पर काटा जाता है, ताकि उनके ठूंठ पर हैमर निशान और पहचान संख्या दर्ज करने की जगह बची रहे। इसके विपरीत मौके पर मिले कुछ पेड़ों को बिल्कुल जड़ से काटा गया है। उनकी मोटाई भी काफी अधिक बताई गई है।
ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि कटान की चपेट में कुछ महत्वपूर्ण मदर ट्री भी आए हो सकते हैं। हालांकि, इसकी पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही होगी।
डीएफओ पांवटा साहिब एवं कार्यवाहक डीएफओ वन मंडल नाहन वेद प्रकाश ने बताया कि रामा में चीड़ के पेड़ों के अवैध कटान का मामला सामने आया है। शिमला से पहुंची वन विभाग की उड़नदस्ता टीम ने मौके का निरीक्षण किया है और रिपोर्ट तैयार की जा रही है। रिपोर्ट मिलने के बाद नियमानुसार आगामी कार्रवाई की जाएगी।
लापरवाही मिली तो कर्मचारी पर होगी कार्रवाई : वन निगम
वन निगम नाहन के मंडलीय प्रबंधक अतुल चौधरी ने बताया कि रामा में वन विभाग के जंगल में चिह्नित पेड़ों के कटान का कार्य निगम को आवंटित किया गया था। यदि उड़नदस्ता टीम की रिपोर्ट में निगम के किसी कर्मचारी की लापरवाही या कमी सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वन निगम केवल आवंटित लॉट को अपने कब्जे में लेकर कटान का कार्य करता है। एक वन रक्षक के पास अलग-अलग क्षेत्रों में छह से सात लॉट भी हो सकते हैं।
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