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Video: पंडोह में 80 करोड़ के बिजली प्रोजेक्ट को हरी झंडी, जमीन लौटाने की शर्त
पंडोह डैम के पास प्रस्तावित बिजली परियोजना को लेकर अब गेंद बीबीएमबी के पाले में है। प्रदेश सरकार ने परियोजना के लिए एनओसी जारी कर दी है, लेकिन इसके साथ सरप्लस जमीन वापस करने की शर्त जोड़ दी है। इससे परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले जमीन को लेकर स्थिति स्पष्ट करनी होगी। सरकार की शर्त पर बीबीएमबी प्रबंधन का कहना है कि उसके पास लौटाने के लिए अब अतिरिक्त जमीन नहीं बची है। प्रबंधन के मुताबिक उपलब्ध सरप्लस भूमि पहले ही प्रदेश सरकार को वापस की जा चुकी है। ऐसे में अब दोनों पक्षों के बीच बातचीत के जरिए मामले का समाधान तलाशा जा रहा है। बीबीएमबी पंडोह के अतिरिक्त अधीक्षण अभियंता चंद्रमणी शर्मा ने एनओसी मिलने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि सरकार ने सरप्लस लैंड वापस करने की शर्त रखी है और इस संबंध में उच्चाधिकारी प्रदेश सरकार से वार्ता कर रहे हैं। परियोजना के तहत पंडोह डैम की पुरानी डायवर्सन टनल के पास दो बिजली इकाइयां स्थापित करने की योजना है। दोनों की क्षमता 5-5 मेगावॉट रखी गई है। करीब 80 करोड़ रुपये की प्रारंभिक लागत का अनुमान लगाया गया है। फिलहाल फाइनल डीपीआर तैयार की जा रही है, जिसके बाद परियोजना की वास्तविक लागत और तकनीकी स्वरूप तय होगा। पंडोह डैम निर्माण के समय ब्यास नदी के पानी को मोड़ने के लिए बनाई गई करीब 30 मीटर व्यास की पुरानी डायवर्सन टनल अब बिजली उत्पादन के काम आ सकती है। बीबीएमबी ने डैम से छोड़े जाने वाले पानी के एक हिस्से का इस्तेमाल बिजली बनाने के लिए करने की संभावना तलाश की है। प्रबंधन के अनुसार डैम से करीब 15 प्रतिशत पानी सीधे ब्यास नदी में चला जाता है। इसी पानी का उपयोग टनल के जरिए बिजली उत्पादन में करने की योजना है। इससे बिना किसी बड़े नए जलस्रोत के अतिरिक्त विद्युत उत्पादन की संभावना बनेगी।
परियोजना शुरू होने के बाद प्रदेश को भी हिस्सेदारी के तहत मुफ्त बिजली मिलने की उम्मीद है। हालांकि, परियोजना के निर्माण की अगली प्रक्रिया अब सरकार की जमीन संबंधी शर्त के समाधान पर निर्भर करेगी। चंद्रमणी शर्मा, अतिरिक्त अधीक्षण अभियंता, बीबीएमबी पंडोह
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