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मंडी: चार साल की पढ़ाई में शोध की उड़ान, आठवें सेमेस्टर में करना होगा रिसर्च; तीन साल में डिग्री, चौथे साल ऑनर्स का विकल्प
Ankesh Dogra
Updated Mon, 21 Sep 2026 04:19 PM IST
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अब कॉलेज में पढ़ाई का मतलब केवल परीक्षा पास करके डिग्री हासिल करना नहीं होगा। स्नातक स्तर पर ही विद्यार्थियों को शोध, विश्लेषण और अकादमिक लेखन से जोड़ने की तैयारी की गई है। नई शिक्षा नीति के तहत लागू चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम में विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ शोध का व्यावहारिक अनुभव भी मिलेगा।
सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी के शैक्षणिक सत्र 2026-27 के नए स्नातक ढांचे में विद्यार्थियों को तीन और चार वर्षीय कार्यक्रम का विकल्प दिया गया है। खास बात यह है कि चार वर्षीय ऑनर्स विद रिसर्च कार्यक्रम चुनने वाले विद्यार्थियों को अपने विषय से जुड़े किसी क्षेत्र में शोध परियोजना या डिजर्टेशन तैयार करना होगा और इसे आठवें सेमेस्टर में पूरा करना होगा।
तीन साल में डिग्री, चौथे वर्ष में दो विकल्प
नए ढांचे के तहत विद्यार्थी तीन वर्ष की पढ़ाई पूरी करने के बाद स्नातक डिग्री हासिल कर सकेंगे। इसके बाद चौथे वर्ष में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के सामने बैचलर डिग्री ऑनर्स और ऑनर्स विद रिसर्च का विकल्प होगा।
इस व्यवस्था को मल्टीपल एंट्री और एग्जिट प्रणाली से भी जोड़ा गया है। एक वर्ष यानी दो सेमेस्टर की पढ़ाई पूरी करने वाले विद्यार्थियों को यूजी प्रमाणपत्र और दो वर्ष यानी चार सेमेस्टर पूरे करने पर संबंधित क्षेत्र में यूजी डिप्लोमा देने का प्रावधान है।
इससे विद्यार्थियों को अपनी परिस्थितियों के अनुसार पढ़ाई जारी रखने या किसी चरण पर बाहर निकलने के बाद दोबारा आगे बढ़ने का विकल्प मिल सकेगा।
चार वर्षीय ऑनर्स विद रिसर्च कार्यक्रम में शोध को पढ़ाई का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। विद्यार्थियों को अपने विषय के किसी चुने हुए क्षेत्र पर शोध परियोजना या डिजर्टेशन तैयार करना होगा।
चार वर्षीय कार्यक्रम के लिए कुल 168 क्रेडिट निर्धारित किए गए हैं। इनमें शोध परियोजना या डिजर्टेशन के लिए 12 क्रेडिट रखे गए हैं।
इसका मतलब यह होगा कि चौथे वर्ष तक पहुंचने वाला विद्यार्थी केवल किताबों और कक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि किसी विषय या समस्या को चुनकर उसके बारे में व्यवस्थित तरीके से अध्ययन और शोध भी करेगा।
शोध कार्य को मजबूत आधार देने के लिए चौथे वर्ष में विद्यार्थियों को पढ़ाने और शोध में मार्गदर्शन देने के लिए पीएचडी उपाधिधारक शिक्षक उपलब्ध होंगे।
शिक्षकों के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों को शोध पद्धति, आंकड़ों और तथ्यों के विश्लेषण, अकादमिक लेखन और स्वतंत्र अध्ययन की बुनियादी समझ विकसित करने का अवसर मिलेगा।
अच्छे शोध कार्य को आगे शोध पत्रिका में प्रकाशित करने, सम्मेलन या सेमिनार में प्रस्तुत करने और आवश्यकता पड़ने पर पेटेंट के लिए आगे बढ़ाने की संभावना भी रहेगी।
यानी कॉलेज में किसी छात्र के मन में उठने वाला सवाल केवल कक्षा की चर्चा तक सीमित नहीं रहेगा। सही दिशा और शोध के जरिए वही सवाल किसी प्रोजेक्ट, शोध पत्र, सम्मेलन या नवाचार का आधार बन सकता है।
चार वर्षीय ऑनर्स विद रिसर्च कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू आगे की उच्च शिक्षा और शोध से जुड़ा है। इस डिग्री के बाद पात्रता मानदंड पूरा करने वाले विद्यार्थियों के लिए सीधे पीएचडी में प्रवेश का रास्ता खुल सकता है।
इससे विद्यार्थियों को स्नातक स्तर पर ही शोध की प्रक्रिया समझने और स्वतंत्र अध्ययन का अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
जो विद्यार्थी आगे चलकर अकादमिक क्षेत्र, शोध संस्थानों या नवाचार से जुड़े क्षेत्रों में जाना चाहते हैं, उनके लिए स्नातक स्तर पर शोध का अनुभव आगे की पढ़ाई में उपयोगी हो सकता है।
इस बदलाव का एक महत्वपूर्ण पहलू ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए शोध के अवसर बढ़ना भी है। स्थानीय कॉलेजों में ही शोध की बुनियादी समझ और विशेषज्ञ शिक्षकों का मार्गदर्शन मिलने से विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के साथ शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने का मौका मिलेगा।
खासकर उन विद्यार्थियों के लिए यह महत्वपूर्ण हो सकता है, जिन्हें शोध का अनुभव हासिल करने के लिए शुरुआत में बड़े शहरों या विश्वविद्यालयों का रुख करना पड़ता था।
नए ढांचे में सातवें और आठवें सेमेस्टर में उन्नत स्तर के पाठ्यक्रम रखे गए हैं। इससे विद्यार्थियों को अपने चुने हुए विषय का अधिक गहराई से अध्ययन करने का अवसर मिलेगा और शोध परियोजना के लिए विषयगत आधार भी तैयार होगा।
करसोग कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. गुलशन महाजन के अनुसार, यह पहल स्नातक शिक्षा को रोजगारपरक बनाने के साथ विद्यार्थियों को शोध, नवाचार और समस्या-समाधान आधारित शिक्षा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उनके अनुसार, इससे कक्षा में उठने वाला कोई सवाल केवल सवाल बनकर नहीं रह जाएगा। विद्यार्थी उसे शोध के जरिए आगे बढ़ाकर जर्नल, सम्मेलन और पेटेंट तक ले जा सकते हैं।
इस नए ढांचे में स्नातक शिक्षा का एक नया रूप सामने आता है—जहां तीन साल में डिग्री हासिल करने का विकल्प मौजूद है, वहीं चौथे साल में विद्यार्थी अपने विषय को और गहराई से समझते हुए ऑनर्स या ऑनर्स विद रिसर्च की राह चुन सकते हैं।
ऐसे में कॉलेज की पढ़ाई केवल डिग्री की मंजिल नहीं, बल्कि आगे की पढ़ाई, शोध और नए समाधान तलाशने की शुरुआत भी बन सकती है।
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