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चंबा में टीबी मुक्त अभियान को नई रफ्तार, 19 पंचायतों के प्रधान सम्मानित
Ankesh Dogra
Updated Thu, 08 Oct 2026 04:07 PM IST
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टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत जिला स्तरीय ‘जोश अभियान’ का शुभारंभ वीरवार को किया गया। उपायुक्त मुकेश रेपसवाल ने अभियान का शुभारंभ करते हुए क्षय रोग मुक्त घोषित की गई जिले की 19 ग्राम पंचायतों के प्रधानों को सम्मानित किया।
इस अवसर पर उपायुक्त ने टीबी उन्मूलन के लिए पंचायत स्तर पर जनभागीदारी को और मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि टीबी मुक्त भारत, हिमाचल और चंबा के लक्ष्य को हासिल करने में ग्राम पंचायतों और जनप्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
उपायुक्त ने कहा कि जिन पंचायतों ने टीबी मुक्त होने की दिशा में बेहतर कार्य किया है, उनके प्रयास अन्य पंचायतों के लिए भी प्रेरणादायक हैं। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से अपने क्षेत्रों में टीबी उन्मूलन से जुड़े प्रयासों को लगातार जारी रखने और आगामी चरणों में और बेहतर परिणाम हासिल करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर जागरूकता और लोगों की भागीदारी बढ़ने से टीबी के संभावित मामलों की समय पर पहचान करने में मदद मिलेगी।
उपायुक्त ने कहा कि टीबी अब लाइलाज बीमारी नहीं है। इसका निशुल्क उपचार उपलब्ध है और निर्धारित अवधि तक नियमित रूप से उपचार लेने पर रोगी पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है।
उन्होंने कहा कि टीबी उन्मूलन के लिए सबसे जरूरी है कि बीमारी की समय पर पहचान हो। इसके लिए लोगों को बिना किसी झिझक के अपनी जांच करवानी चाहिए।
उपायुक्त ने पंचायत प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में टीबी के संभावित मामलों की पहचान करें और लोगों को जांच एवं उपचार के लिए प्रेरित करें।
उन्होंने कहा कि समय पर जांच और उपचार के माध्यम से टीबी के कारण होने वाली गंभीर स्थिति और मृत्यु को रोका जा सकता है। इसके लिए पंचायत स्तर पर स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय और जनभागीदारी को मजबूत करना जरूरी है।
उपायुक्त ने कहा कि समाज में टीबी को लेकर किसी भी प्रकार का कलंक और भ्रांति नहीं होनी चाहिए। लोगों को बीमारी के बारे में सही जानकारी देना आवश्यक है, ताकि मरीज बिना किसी भय या संकोच के जांच और उपचार के लिए आगे आ सकें।
उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से अपने क्षेत्रों में जागरूकता गतिविधियों को बढ़ाने और लोगों को टीबी की जांच व उपचार के प्रति प्रेरित करने की अपील की।
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