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Panipat: Mandeep Jalmana triumphs in an 11,000-rupee wrestling bout at Baba Kashigiri Temple.
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पानीपत: बाबा काशीगिरी मंदिर में मनदीप जलमाना ने 11 हजार की कुश्ती जीतकर फहराया परचम
पानीपत। श्री सिद्ध बाबा काशीगिरी महाराज के 74वें वार्षिक उत्सव के चौथे दिन मंदिर परिसर में दंगल व कुश्ती प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। अखाड़े में पहलवानों के शक्ति-प्रदर्शन के बीच बाबा काशीगिरी महाराज की जय के जयघोष गूंजते रहे। दंगल की सबसे बड़ी आकर्षण और प्रतिष्ठित 11 हजार रुपये की कुश्ती जलमाना गांव के होनहार पहलवान मनदीप ने अपने नाम कर दंगल का पहला पुरस्कार हासिल किया। मनदीप की इस शानदार जीत ने उपस्थित कुश्ती प्रेमियों व श्रद्धालुओं का दिल जीत लिया। आयोजकों ने इस दंगल में एक अनोखी और सराहनीय पहल करते हुए न केवल जीतने वाले पहलवानों को, बल्कि हारने वाले पहलवानों को भी सम्मान स्वरूप नकद राशि प्रदान कर उनका हौसला बढ़ाया। अखाड़े में करीब 70 से 80 कुश्तियां लड़ी। इनमें हरियाणा व आसपास के क्षेत्रों से आए पहलवानों ने अपने दांव-पेच और शारीरिक क्षमता का प्रदर्शन किया। बाबा जी की परंपरा में पहलवानी और दंगल को अत्यंत पवित्र व विशेष स्थान प्राप्त रहा है। लोकमान्यता है कि बाबा जी के दौर में गांव के युवाओं को कुश्ती के लिए प्रेरित कर पहलवान बनाया जाता था, और आज का यह भव्य दंगल उसी पुरानी परंपरा की जीवंत झलक बनकर सामने आया। मुरथल वाले स्वामी दयानंद सरस्वती ने पहलवानों को आशीर्वाद रूप में नाम दिया।
इस अवसर पर मंदिर समिति के प्रधान हरीश खुराना, लालचंद आर्य, योगराज आर्य, फतेहचंद गुलाटी, सरला ग्रोवर, सतीश ढींगरा, वीरेंद्र सोनी, टेकचंद और सुभाष कंवल मौजूद रहे। बाबा के दरबार में मांगी गई हर मनोकामना होती पूर्ण मंदिर प्रमुख हरीश खुराना ने बताया कि बाबा काशीगिरी महाराज की जीवनी से जुड़ी लोकमान्यताओं के अनुसार लगभग 200 वर्ष पूर्व पाकिस्तान के कोट अद्दू क्षेत्र में उनका गहरा आध्यात्मिक प्रभाव था। श्रद्धालुओं में यह विश्वास आज भी पूरी निष्ठा से जीवित है कि बाबा ने अपनी कठिन तपस्या और योग शक्ति से ऐसे चमत्कार किए। इनको देखकर लोग हतप्रभ रह जाते थे। कहा जाता है कि उन्होंने एक समय स्वयं को धरती के अंदर समाधि में लीन कर लिया था और बाद में श्रद्धालुओं के कल्याण के लिए लौटने का संकल्प लिया था। उनके धाम से जुड़ी एक अन्य प्रसिद्ध लोककथा के अनुसार, वहां आने वाले गैर-सनातनी लोगों को बाबा जी के चमत्कारी प्रभाव के कारण कुछ समय के लिए दिखाई देना बंद हो जाता था और क्षेत्र से बाहर निकलते ही उनकी दृष्टि पुन: लौट आती थी।
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