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Action taken against illegal hoardings in Hisar; social organizations demand accountability
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हिसार में अवैध होर्डिंग पर कार्रवाई, सामाजिक संगठनों ने मांगी जिम्मेदारी
हिसार में अवैध होर्डिंग और बैनरों के बढ़ते चलन पर अंकुश लगाने के लिए नगर निगम ने जनता से सहयोग मांगा है। वहीं, सामाजिक संगठनों ने कहा है कि यदि निगम उन्हें अनुमति दे तो वे स्वयं इन अवैध होर्डिंग्स को हटाने के लिए तैयार हैं। उनका मानना है कि शहर को साफ-सुथरा रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
अर्बन एस्टेट-टू स्थित अमर उजाला कार्यालय में आयोजित एक संवाद कार्यक्रम में विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। उन्होंने निगम से बिना किसी भेदभाव के सख्त कार्रवाई करने की मांग उठाई।
शहर की सुंदरता और पर्यावरण पर प्रभाव
'मेरा प्यार हिसार' संस्था के वरिष्ठ सदस्य सुशील खरींटा ने कहा कि अवैध होर्डिंग और बैनर न केवल शहर की सुंदरता को बिगाड़ रहे हैं, बल्कि पर्यावरण प्रदूषण को भी बढ़ा रहे हैं। उन्होंने बताया कि फ्लैक्स जमीन में दबाने पर आसानी से नहीं गलते और जलाने पर जहरीली गैसें निकलती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सत्ताधारी दलों के लोग अधिक होर्डिंग लगवाते हैं, इसलिए निगम को बिना भेदभाव सभी के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।
संस्था के वरिष्ठ सदस्य त्रिलोक बंसल ने बताया कि नौ साल पहले शहर में अवैध होर्डिंग और पोस्टर रोकने तथा दीवारों को साफ रखने के उद्देश्य से संस्था का गठन किया गया था। उन्होंने सुझाव दिया कि निगम अवैध होर्डिंग लगाने वालों को तत्काल व्हाट्सऐप पर चालान का नोटिस भेजे और इसके लिए अधिकारियों में मजबूत इच्छाशक्ति होनी चाहिए।
कानूनी प्रावधान और निगम की भूमिका
सामाजिक कार्यकर्ता विकास हिसारी ने अवैध होर्डिंग और बैनर रोकने के लिए नियमित निगरानी की आवश्यकता पर जोर दिया। हिसार व्यापार संघ के प्रधान अजय सैनी ने कहा कि नेताओं के सबसे ज्यादा होर्डिंग और बैनर लगते हैं और कुछ लोग इसे कारोबार बना रहे हैं, जिससे शहर की सुंदरता प्रभावित हो रही है। उन्होंने निगम अधिकारियों से नेताओं की सिफारिशों के बजाय सभी पर समान कार्रवाई करने का आग्रह किया।
बार एसोसिएशन के सहसचिव एडवोकेट साहिल मदेरना ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 270 का उल्लेख करते हुए कहा कि अवैध होर्डिंग या बैनर से सार्वजनिक सुरक्षा को खतरा होने, राहगीरों को परेशानी होने अथवा वाहन चालकों की दृश्यता बाधित होने पर इसे पब्लिक न्यूसेंस माना जा सकता है। उन्होंने बताया कि पहले इसके लिए आईपीसी की धारा 268/290 थी और धारा 285 के तहत यातायात बाधित करने वाले होर्डिंग-बैनर पर पांच हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। बार एसोसिएशन की कोषाध्यक्ष एडवोकेट आशा बाल्यान ने कानून और नियमों के पालन को सर्वोपरि बताया और कहा कि निगरानी करने वाली एजेंसियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि कहीं भी अवैध होर्डिंग न लगे। बार एसोसिएशन के कार्यकारिणी सदस्य एडवोकेट प्रदीप मान ने कहा कि अवैध होर्डिंग हटवाने की पहली जिम्मेदारी नगर निगम की है और उन्हें इन्हें लगाने वालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करवानी चाहिए।
सार्वजनिक संपत्तियों पर अवैध होर्डिंग और जागरूकता की कमी
'मेरा प्यार हिसार' संस्था के सदस्य राजेंद्र गहलोत ने कहा कि ज्यादातर अवैध होर्डिंग सार्वजनिक संपत्तियों पर लगाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि संस्था ने शहर की दीवारों से पोस्टर हटाए, लेकिन लोग दोबारा लगा देते हैं। इसके लिए लोगों में सार्वजनिक संपत्तियों के प्रति जिम्मेदारी और जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।
पर्यावरणीय चिंताएं और निगम की कार्रवाई
वानप्रस्थ संस्था के सदस्य डॉ. सतीश कालड़ा ने वेस्ट मैनेजमेंट की जिम्मेदारी नगर निगम की बताई और कहा कि फ्लैक्स और होर्डिंग की री-साइक्लिंग न होने के कारण पर्यावरण के लिहाज से इन पर रोक जरूरी है। नगर निगम के जेई नीतीश शेखावत ने बताया कि अक्तूबर 2025 से अब तक 100 से ज्यादा लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं और अवैध होर्डिंग, फ्लैक्स और बैनर हटवाने की कार्रवाई लगातार की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि पॉलिसी के अनुसार दुकानों के केवल दो प्रतिशत हिस्से में फ्लैक्स लगाया जा सकता है और इसकी ऊंचाई तीन फीट से अधिक नहीं होनी चाहिए।
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