Exclusive News एक्सक्लूसिव खबरें
Free E-Paper फ्री में ई-पेपर पढ़ें
ऐप डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   PM Modi Dimagi Naxal Remark Triggers Congress Reaction

'दिमागी नक्सलियों को हराना होगा': पीएम मोदी का प्रहार, जयराम रमेश बोले- दिवाली पर भी नहीं छोड़ी राजनीति

Sun, 08 Nov 2026 06:10 PM IST
राकेश कुमार एएनआई, नई दिल्ली।
एएनआई, नई दिल्ली। Published by: राकेश कुमार Updated Sun, 08 Nov 2026 06:10 PM IST
सार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बस्तर में जवानों के साथ दिवाली मनाते हुए कहा कि हथियारबंद नक्सलियों के सफाए के बाद भी देश में नक्सलवाद का खतरा खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि 'दिमागी नक्सली' राजनीतिक दलों और संगठनों में घुसकर संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ लोगों को भड़का रहे हैं। कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने इस बयान पर आपत्ति जताते हुए प्रधानमंत्री पर दिवाली के मौके पर राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने प्रधानमंत्री के जाति जनगणना और किसान आंदोलन से जुड़े पुराने बयानों का भी जिक्र किया।
 

विज्ञापन
PM Modi Dimagi Naxal Remark Triggers Congress Reaction
पीएम मोदी - फोटो : ANI

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को छत्तीसगढ़ के बस्तर में सुरक्षा बलों के जवानों के साथ दिवाली मनाई। इस दौरान उन्होंने कहा कि देश से नक्सलवाद का खतरा अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। जंगलों में हथियार उठाने वाले नक्सलियों को खत्म किया गया है, लेकिन अब कुछ लोग संगठनों और राजनीतिक दलों में घुसकर संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ लोगों को भड़का रहे हैं। प्रधानमंत्री ने ऐसे लोगों को 'दिमागी नक्सली' बताया। उन्होंने कहा कि इनकी पहचान कर इन्हें हराना और देश की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है।
विज्ञापन


'दिमागी नक्सलियों' को लेकर प्रधानमंत्री ने क्या चेतावनी दी?
सुरक्षा बलों के जवानों को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि नक्सलियों का सफाया होने के बाद भी खतरा पूरी तरह टला नहीं है। प्रधानमंत्री ने कहा, 'हमें एक बात याद रखनी होगी। नक्सलियों का सफाया हो चुका है, लेकिन खतरा अभी खत्म नहीं हुआ है। जंगलों से हथियारबंद नक्सलियों को खत्म कर दिया गया है, लेकिन दिमागी नक्सलियों ने कई संगठनों पर कब्जा कर लिया है। हमें उनकी पहचान करनी होगी, उन्हें हराना होगा और देश की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।'
विज्ञापन


पिछली सरकारों और सुरक्षा बलों को लेकर क्या बोले मोदी?
प्रधानमंत्री ने पिछली सरकारों पर नक्सल विरोधी अभियान में लगे सुरक्षा बलों को खुलकर कार्रवाई करने की छूट नहीं देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पहले जवानों के हाथ बांधकर रखे जाते थे। नक्सली हमले होते थे, लेकिन सुरक्षा बलों को खुलकर जवाब देने की आजादी नहीं थी। पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने जवानों को जरूरी फैसले लेने की छूट दी। इसके साथ ही वामपंथी उग्रवाद को व्यवस्था के भीतर से मिलने वाली मदद रोकने के लिए भी काम किया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने संवेदनशीलता के साथ माओवादी आतंकवाद की कमर तोड़ी और नक्सल प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों की जिंदगी बदलने का प्रयास किया। प्रधानमंत्री के मुताबिक, नक्सलवाद से परेशान रहे लोगों ने भी सरकार और सुरक्षा बलों का साथ दिया। उन्होंने इस लड़ाई में योगदान देने वाले लोगों का आभार जताया।
विज्ञापन
विज्ञापन


बस्तर में जवानों के साथ कैसे मनाई दिवाली?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर साल दिवाली के मौके पर सुरक्षा बलों के जवानों के बीच पहुंचते हैं। इस बार उन्होंने बस्तर में नक्सल विरोधी अभियान में तैनात जवानों के साथ त्योहार मनाया। वह करनपुर स्थित कोबरा ऑपरेशन बेस पहुंचे। यह कैंप अबूझमाड़ और बस्तर के अंदरूनी इलाकों में अभियान चलाने का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां प्रधानमंत्री ने सीआरपीएफ के शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान जवानों ने पारंपरिक आदिवासी गीतों पर नृत्य किया। भारत माता की जय के नारों के बीच प्रधानमंत्री ने उनके साथ दिवाली की खुशियां साझा कीं।

यह भी पढ़ें: पुणे में दोस्त से मामूली बात पर हुआ झगड़ा: चेहरे पर फेंका तेजाब; छह साल की बच्ची समेत चार लोग झुलसे


जयराम रमेश ने मोदी के बयान पर क्या आपत्ति जताई?
प्रधानमंत्री के 'दिमागी नक्सली' वाले बयान पर कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने दिवाली जैसे मौके पर भी राजनीतिक विरोधियों पर निशाना साधा। रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि प्रधानमंत्री ने सुरक्षा बलों की वर्दी पहनकर एक गैर-राजनीतिक और गंभीर मौके का इस्तेमाल अपने राजनीतिक विरोधियों पर हमला करने के लिए किया। उन्होंने इसे संस्थागत मर्यादाओं पर हमला बताया। कांग्रेस सांसद ने प्रधानमंत्री के पुराने बयानों का भी जिक्र किया।

जयराम रमेश ने कहा कि 28 अप्रैल 2024 को जाति जनगणना की मांग करने वालों को प्रधानमंत्री ने 'शहरी नक्सली' बताया था, लेकिन 30 अप्रैल 2025 को सरकार ने जनगणना 2027 में जाति जनगणना कराने की घोषणा कर दी। उन्होंने तीन कृषि कानूनों के खिलाफ हुए किसान आंदोलन का भी जिक्र किया। आरोप लगाया कि सितंबर 2020 में प्रधानमंत्री ने कानूनों का विरोध करने वालों को नक्सली विचारधारा का समर्थक बताया था, जबकि 19 नवंबर 2021 को सरकार ने तीनों कृषि कानून वापस लेने का एलान कर दिया था। जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका यह रवैया राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने का एक तरीका बन गया है।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed