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श्रावस्ती: 15 बीघा फसल लगी भूमि राप्ती में समाई, बंदरहा बाबा मंदिर पर भी खतरा
श्रावस्ती: तुलसीपुर जलस्तर घटने के साथ ही जमुनहा तहसील क्षेत्र में राप्ती नदी ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। राप्ती की क्रूर लहरें फसल लगे खेतों को निगल रही हैं, इससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। राप्ती कटान करते हुए तेजी से प्राचीन बंदरहा बाबा मंदिर की ओर बढ़ रही है। जिसके चलते श्रद्धालुओं में भी दहशत का माहौल है। नदी अब तक 10 किसानों का 15 बीघा फसल लगे खेत निगल चुकी है।
तराई में व नेपाल के पहाड़ों पर रुक-रुक कर जारी झमाझम बारिश का असर राप्ती के जलस्तर पर भी पड़ रहा है। राप्ती के जलस्तर में बीते कई दिनों से उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, इससे कटान बढ़ तेज हो गई है। बीते दिनों लाल निशान 127.70 मीटर के करीब 127.55 मीटर पहुंचने के बाद सोमवार को राप्ती 127 मीटर पर पहुंचने के बाद स्थिर हो गई। जिसके बाद कटान तेज हो गई है। राप्ती ने घाटेपुरवा, सलारूपुरवा, वीरपुर और शिकारी चौड़ा गांवों में फसल लगे खेतों को निशाना बना शुरू कर दिया है। सोमवार को राप्ती ने शिकारीपुरवा निवासी नरेश वर्मा, सुंदरलाल वर्मा, मिश्रीलाल, मस्तराम, नकछेद, भुसैली, जिलाजीत, सुरेश, दौलतराम वर्मा, भड़काऊ और दुक्खीराम के लगभग 15 बीघा खेत को काट कर नदी की धारा में समा लिया। जिसके बाद से ग्रामीणों में दहशत है। वहीं राप्ती नदी की तेज लहरें अब प्राचीन बंदरहा बाबा मंदिर की ओर बढ़ रही हैं। कटान की गति को देखते हुए मंदिर के अस्तित्व पर संकट गहरा गया है। स्थानीय ग्रामीणों में मंदिर को लेकर गहरी चिंता है।
राप्ती हर वर्ष जमुनहा तहसील क्षेत्र में कहर बरपाती है। जिला प्रशासन की ओर से बैंबो क्रेट, रेत की बोरियां आदि डाल कर इतिश्री कर ली जाती है। जिसके चलते हर साल कटान होती है। ऐसे में जिम्मेदारों को कटान से बचाने के लिए ठोस उपाय करने चाहिए।
बाबादीन, ग्रामीण
प्राचीन बंदरहा बाबा मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यहां प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए आते हैं। ऐसे में लोगों की आस्था को देखते हुए मंदिर का संरक्षण जरूरी है। नदी हर साल कटान करते हुए मंदिर के करीब आ गई है। अगर समय रहते उपाय नहीं किया गया तो मंदिर का अस्तित्व मिट जाएगा।
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