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Shravasti News: राप्ती नदी निगल रही खेत, मंदिर पर मंडराया संकट
Mon, 31 Aug 2026 11:59 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Mon, 31 Aug 2026 11:59 PM IST
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कटान करती राप्ती नदी
तुलसीपुर। जमुनहा तहसील क्षेत्र में राप्ती नदी का जलस्तर घटने से कटान तेज हो गई है। नदी की लहरें फसल लगे खेतों को निगल रही हैं, जिससे ग्रामीणों में दहशत है। राप्ती प्राचीन बंदरहा बाबा मंदिर की ओर भी बढ़ रही है, जिससे श्रद्धालुओं में चिंता है।
नदी अब तक 10 किसानों के लगभग 15 बीघा फसल लगे खेत बहा चुकी है। नेपाल के पहाड़ों पर बारिश से राप्ती के जलस्तर में उतार-चढ़ाव जारी है। बीते दिनों यह लाल निशान 127.70 मीटर के करीब 127.55 मीटर तक पहुंचा था। सोमवार को राप्ती 127 मीटर पर स्थिर होने के बाद कटान और तेज हो गई।
राप्ती ने घाटेपुरवा, सलारूपुरवा, वीरपुर और शिकारी चौड़ा गांवों के खेतों को निशाना बनाया है। सोमवार को नरेश वर्मा, सुंदरलाल वर्मा, मिश्रीलाल और मस्तराम जैसे किसानों के खेत नदी में समा गए। नकछेद, भुसैली, जिलाजीत, सुरेश, दौलतराम वर्मा, भड़काऊ और दुक्खीराम भी प्रभावित हुए हैं। कटान की गति देखते हुए प्राचीन बंदरहा बाबा मंदिर के अस्तित्व पर गहरा संकट है। स्थानीय ग्रामीण और श्रद्धालु मंदिर को लेकर चिंतित हैं।
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बचाव उपाय नाकाफी
ग्रामीण बाबदीन के अनुसार, राप्ती हर साल जमुनहा तहसील क्षेत्र में तबाही मचाती है। जिला प्रशासन केवल बांस के क्रेट और रेत की बोरियां डालकर खानापूर्ति करता है। इन अस्थायी उपायों से हर साल कटान होती रहती है। उन्होंने जिम्मेदारों से कटान रोकने के लिए ठोस उपाय करने की अपील की।
...........
मंदिर के अस्तित्व को बचाएं
महंत बाबा चेतन दास ने बताया कि प्राचीन बंदरहा बाबा मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यहां प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए आते हैं। उन्होंने कहा कि लोगों की आस्था देखते हुए मंदिर का संरक्षण जरूरी है। नदी हर साल कटान करते हुए मंदिर के करीब आ गई है, जिससे अस्तित्व पर खतरा है।
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नदी अब तक 10 किसानों के लगभग 15 बीघा फसल लगे खेत बहा चुकी है। नेपाल के पहाड़ों पर बारिश से राप्ती के जलस्तर में उतार-चढ़ाव जारी है। बीते दिनों यह लाल निशान 127.70 मीटर के करीब 127.55 मीटर तक पहुंचा था। सोमवार को राप्ती 127 मीटर पर स्थिर होने के बाद कटान और तेज हो गई।
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राप्ती ने घाटेपुरवा, सलारूपुरवा, वीरपुर और शिकारी चौड़ा गांवों के खेतों को निशाना बनाया है। सोमवार को नरेश वर्मा, सुंदरलाल वर्मा, मिश्रीलाल और मस्तराम जैसे किसानों के खेत नदी में समा गए। नकछेद, भुसैली, जिलाजीत, सुरेश, दौलतराम वर्मा, भड़काऊ और दुक्खीराम भी प्रभावित हुए हैं। कटान की गति देखते हुए प्राचीन बंदरहा बाबा मंदिर के अस्तित्व पर गहरा संकट है। स्थानीय ग्रामीण और श्रद्धालु मंदिर को लेकर चिंतित हैं।
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बचाव उपाय नाकाफी
ग्रामीण बाबदीन के अनुसार, राप्ती हर साल जमुनहा तहसील क्षेत्र में तबाही मचाती है। जिला प्रशासन केवल बांस के क्रेट और रेत की बोरियां डालकर खानापूर्ति करता है। इन अस्थायी उपायों से हर साल कटान होती रहती है। उन्होंने जिम्मेदारों से कटान रोकने के लिए ठोस उपाय करने की अपील की।
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मंदिर के अस्तित्व को बचाएं
महंत बाबा चेतन दास ने बताया कि प्राचीन बंदरहा बाबा मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यहां प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए आते हैं। उन्होंने कहा कि लोगों की आस्था देखते हुए मंदिर का संरक्षण जरूरी है। नदी हर साल कटान करते हुए मंदिर के करीब आ गई है, जिससे अस्तित्व पर खतरा है।

कटान करती राप्ती नदी

कटान करती राप्ती नदी