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VIDEO: श्रीराम यंत्र की स्थापना से जुड़ेगा त्रेतायुगीन रिश्ता, कांची की देवी कामाक्षी को माना जाता है इक्ष्वाकु वंश की कुलदेवी
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VIDEO: श्रीराम यंत्र की स्थापना से जुड़ेगा त्रेतायुगीन रिश्ता, कांची की देवी कामाक्षी को माना जाता है इक्ष्वाकु वंश की कुलदेवी
राम मंदिर के दूसरे तल पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 19 मार्च को जिस श्रीराम यंत्र की स्थापना करने जा रही हैं, वह अपने आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्व के कारण अत्यंत विशेष माना जा रहा है। करीब 150 किलो वजनी स्वर्णमंडित यह श्रीराम यंत्र दो वर्ष से मंदिर में पूजित हो रहा है और अब वैदिक अनुष्ठानों के बीच इसे मंदिर के दूसरे तल पर स्थापित किया जाएगा।
यह श्रीराम यंत्र नवंबर 2024 को अयोध्या पहुंचा था। तब से मंदिर के प्रथम तल पर विराजमान राम परिवार के गर्भगृह के समीप इसकी नित्य पूजा-अर्चना हो रही है। स्थापना से पहले मंदिर परिसर में वैदिक विधि-विधान के साथ विशेष अनुष्ठान भी आयोजित किए जा रहे हैं।
श्रीराम यंत्र की स्थापना को अयोध्या और कांची के बीच प्राचीन आध्यात्मिक संबंधों के पुनस्मरण के रूप में भी देखा जा रहा है। मान्यता है कि ऋषि दुर्वासा ने दक्षिण भारत में श्रीराम यंत्र की स्थापना की थी। अयोध्या में स्थापित किया जा रहा यह यंत्र श्री कांचीपुरम मठ के मुख्यालय में स्थापित प्राचीन यंत्र के आधार पर तैयार किया गया है। नवंबर 2024 में इसे तिरुपति से अयोध्या तक nकरीब दो हजार किलोमीटर की भव्य रथयात्रा के माध्यम से लाया गया था। कांची कामकोटि पीठ के 17 वें शंकराचार्य शंकर विजयेंद्र सरस्वती ने इस श्रीराम यंत्र रथयात्रा को रवाना किया था।
अयोध्या और कांची के त्रेतायुगीन संबंधों का उल्लेख प्राचीन ग्रंथों में भी मिलता है। मान्यता है कि राजा दशरथ संतान प्राप्ति की कामना लेकर त्रेतायुग में अयोध्या से दो हजार किलोमीटर की यात्रा कर कांची पहुंचे थे और वहां देवी कामाक्षी अम्मा का आशीर्वाद प्राप्त किया था। इसके बाद किए गए पुत्रकामेष्टि यज्ञ के फलस्वरूप भगवान श्रीराम का जन्म हुआ। मार्कंडेय पुराण में देवी कामाक्षी अम्मा को इक्ष्वाकु वंश की कुलदेवी के रूप में वर्णित किया गया है। कांची और अयोध्या के बीच इस आध्यात्मिक संबंध का उल्लेख ब्रह्मांड पुराण में भी मिलता है। दोनों तीर्थों को भगवान शिव के पंचभूत स्थलों में से एक पृथ्वीक्षेत्र से भी जोड़ा गया है।
11 करोड़ मंत्रों के जप से अभिमंत्रित है श्रीराम यंत्र
- राम मंदिर में स्थापित होने जा रहा श्रीराम यंत्र अत्यंत विशिष्ट माना जा रहा है। इसे 11 करोड़ मंत्रों से अभिमंत्रित किया गया है। राम मंदिर को समर्पित करने से पहले कारसेवकपुरम में 45 दिनों तक विशेष अनुष्ठान किया गया था। इस अनुष्ठान के दौरान लक्ष्मी गणपति मंत्र जाप, नवग्रह मंत्र जाप, राम मूल मंत्र जाप, महामृत्युंजय मंत्र जाप, धन्वंतरि मंत्र जाप, महा सरस्वती मंत्र जाप और चंडी मूल मंत्र जाप सहित अनेक वैदिक मंत्रों का जाप किया गया। इसके अलावा मनुसूक्त, पुरुष सूक्त, चंडी सप्तशती, दिव्य रुद्रम, वाल्मीकि रामायण, भागवत, श्री देवी भागवत और अन्य धार्मिक ग्रंथों का पारायण भी संपन्न कराया गया। इस यंत्र की स्थापना से राम मंदिर की आध्यात्मिक ऊर्जा और भी अधिक सुदृढ़ होगी।
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