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VIDEO: टीटीजेड में खुले नए उद्योगों के रास्ते, 410 एमएसएमई को राहत
विश्वदाय स्मारक ताजमहल को प्रदूषण से बचाने के लिए बने ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) के दायरे में नए उद्योगों की स्थापना, विस्तार और पुनरुद्धार के रास्ते बृहस्पतिवार को खुले गए। सुप्रीम कोर्ट ने 14 अक्तूबर, 2024 के पूर्ण प्रतिबंध के अपने आदेश में बड़ा बदलाव किया है। प्रतिबंध के कारण लंबित 410 एमएसएमई के आवेदनों पर कार्रवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने टीटीजेड प्राधिकरण को इजाजत दे दी है। पिछले दो साल से सुप्रीम कोर्ट की रोक के कारण पर्यावरण दृष्टि से संवेदनशील 10,400 वर्ग किमी. क्षेत्र में नए उद्योग लगाने और पुराने उद्योगों का विस्तार पूरी तरह बंद था। इस वजह से आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, एटा, हाथरस और भरतपुर तक गैर प्रदूषणकारी उद्योग भी स्थापित नहीं हो पा रहे थे। बृहस्पतिवार को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहना सहित तीन सदस्यीय पीठ ने सुनवाई की। शीर्ष अदालत ने कहा कि भले ही टीटीजेड में विजन डॉक्यूमेंट और प्रभाव आकलन अध्ययन को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है, लेकिन इस प्रक्रिया के लंबित रहने की कीमत छोटे उद्योगों को अनिश्चितकाल तक रोककर नहीं चुकाई जा सकती। दरअसल, 14 अक्तूबर, 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि टीटीजेड प्राधिकरण न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना क्षेत्र में किसी भी नए उद्योग की स्थापना या विस्तार की अनुमति नहीं देगा। इस आदेश ने पूरे क्षेत्र में औद्योगिक विकास पर ब्रेक लगा दिया था। सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) ऐश्वर्या भाटी ने टीटीजेड प्राधिकरण का पक्ष रखते हुए अदालत को जमीनी हकीकत बताई। कहा कि पिछले आदेश के कारण समूचे 10,400 वर्ग किमी. क्षेत्र में छोटे उद्योगों का कामकाज बुरी तरह प्रभावित है। अदालत के संज्ञान में लाया गया कि टीटीजेड प्राधिकरण के पास एमएसएमई के 410 आवेदन लंबित हैं। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि प्रतिबंध के कारण आटा चक्की और कागज उत्पाद जैसे छोटे पैमाने वाले और कुटीर उद्योग ठप हो गए हैं। यह भी कहा कि लंबित आवेदनों में से कोई भी उद्योग कोयले या कोक पर आधारित नहीं है। सभी उद्योग गैर प्रदूषणकारी हैं। दलील देते हुए कहा कि पूर्ण प्रतिबंध से क्षेत्र के लाखों लोगों की आजीविका प्रभावित हो रही है। अदालत ने सरकार की दलीलों को गंभीरता से लेते हुए स्वीकार किया कि वर्तमान में विजन डॉक्यूमेंट का निर्माण, अदालत के आदेशानुसार पर्यावरण पर प्रभाव की आकलन रिपोर्ट और गैर-प्रदूषणकारी उद्योगों की परिभाषा पर अंतिम रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है। हालांकि, पीठ ने अपने आदेश में कहा कि इन तीन प्रमुख पहलों का लंबित होना टीटीजेड में छोटे उद्योग लगाने के लिए बाधा नहीं बनना चाहिए। अदालत ने टीटीजेड की संयुक्त कमेटी को शर्त के साथ 410 आवेदनों की जांच करने के आदेश दिए हैं। प्रक्रिया में विषय विशेषज्ञों की देखरेख में सावधानी के सिद्धांतों का कड़ाई से पालन करने को कहा है। यह आदेश फिरोजाबाद के कांच उद्योगों के अलावा अन्य एमएसएमई उद्योगों के आवेदनों पर भी समान रूप से लागू होगा।
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