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जन्माष्टमी: भाईचारे की डोर से कान्हा की पोशाक तैयार कर रहे 'खुदा के बंदे', ऐसा है अपना हिंदुस्तान

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अपराजिता: व्यापार शुरू करने पर मिली चुनौतियां अपार, साथ न आया परिवार, पढ़ें इन महिलाओं की सफलता की कहानी

महिला अपना कारोबार शुरू करे तो हर कदम पर चुनौती आती है। मायका हो या ससुराल, परिवार का साथ नहीं मिलता। इसकी वजह यह भी है कि महिलाओं के लिए माहौल पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। दूसरी चुनौती आती है पूंजी की। बैंकों की अपनी शर्तें हैं। पुरुष बाजार में हुंडी वगैरह उठा सकते हैं लेकिन महिलाओं के लिए ऐसी कोई सुविधा नहीं है।

बाजार में जगह बनाने का प्रशिक्षण नहीं मिलता
महिला संघर्ष करते हुए व्यापार शुरू तो कर देती हैं, मैंने भी किया लेकिन सबसे बड़ी चुनौती आई प्रतिस्पर्धा से भरे बाजार में टिकने की। भले ही मैंने दुकान खोली थी लेकिन मुझे मालूम नहीं था कि आसपास के दुकानदारों से प्रतिस्पर्धा में कैसे टिकना है। व्यापार के कई फंडे होते हैं, महिला कोई बिजनेस करे तो उसे आने चाहिए। बाजार में जगह बनाने का प्रशिक्षण नहीं मिलता है, इसकी सुविधा होनी चाहिए। - रजनी देवी  

शुरू में शोरूम में बैठने में डर लगता था

महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल नहीं है। व्यापार की भी यही स्थिति है। मेरे शोरूम पर लोग सामान खरीदने के लिए आते थे, तो कई ऐसे भी होते थे जो घूरते थे। अब उनकी शिकायत करें या व्यापार को संभाले। पूंजी जुटाना भी आसान नहीं, बैंक अधिकारी सौ सवाल करते थे। सिर्फ मेरे साथ नहीं, हर कारोबारी महिला के साथ यह परेशानी आती है। - कशिश धनवानी
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अगस्त क्रांति की ज्वाला में जल उठा था बरहन स्टेशन, पढ़िए आजादी के दीवानों के जज्बे की दास्तां

ताजनगरी में आजादी के लिए क्रांति की चिंगारी तो 1857 के गदर में ही भड़क गई थी। 1942 में आते-आते ज्वाला बन गई। अगस्त क्रांति में आगरा के क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों को लोहे के चने चबाने पर मजबूर कर दिया था। कहीं बम फेंके तो कहीं स्टेशन फूंके। इन्हीं में से एक था बरहन रेलवे स्टेशन फूंकना। 

अगस्त क्रांति आंदोलन की शुरुआत 9 अगस्त, 1942 को हुई थी। इसके पांच दिन बाद 14 अगस्त, 1942 को बरहन रेलवे स्टेशन फूंक दिया गया था। एक साथ एक हजार क्रांतिकारियों ने धावा बोला था। ये लोग आठ-दस टुकड़ियों में बंटे, फिर एक साथ हमला किया। किताब समय चक्र में इस घटना का विस्तार से उल्लेख किया गया है। 


बरहन स्टेशन को तहस-नहस कर जनसमूह कस्बे की ओर बढ़ा। सरकारी गोदाम से हजार मन गल्ला लूटकर जरूरतमंद ग्रामीणों में बांट दिया गया था। गल्ला लुट जाने के बाद पुलिस आ गई। सीधे गोली चला दी। क्रांतिकारी हटे नहीं। इस फायरिंग में बैनई गांव के केवल सिंह जाटव शहीद हो गए थे। कई क्रांतिकारी घायल हुए थे। 
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बरहन रेलवे स्टेशन बरहन रेलवे स्टेशन

अगस्त क्रांति के दौरान धधक उठी थी ताजनगरी, क्रांतिकारियों ने फूंक दिए थे अंग्रेजों के दफ्तर

अगस्त क्रांति के दौरान ताजनगरी धधक उठी थी। उस समय यहां कई ऐसी घटनाएं हुई थीं, जिससे अंग्रेज अफसर दहशत में आ गए थे। उनमें सबसे ज्यादा हलचल आयकर दफ्तर फूंके जाने से मची थी। यह काम बहुत मुश्किल था, लेकिन क्रांति की मशाल थाम आजादी के दीवाने कहां रुकने वाले थे। पुलिस का सख्त पहरा होने के बावजूद दफ्तर को आग लगाई गई थी।

अगस्त क्रांति आंदोलन की शुरुआत 9 अगस्त, 1942 को हुई थी। आगरा में उस समय आयकर दफ्तर उड़ेसर हाउस के पास एक कोठी में था। दफ्तर फूंकने में क्रांतिकारी प्रेमदत्त्त पालीवाल, पंडित श्रीराम शर्मा के दल से मनोहर लाल शर्मा, बसंत लाल झा, गोपीनाथ शर्मा, रामशरण सिंह, विजय शरण चौधरी, रामानंदाचार्य, पीतांबर पंत, रवि वर्मा शामिल थे। 


तारा सिंह धाकरे दल से रामबाबू पाठक, इंद्रपाल सिंह, शेख इनाम और पुरुषोत्तम गौतम थे। क्रांतिकारियों ने आयकर दफ्तर फूंकने के लिए तीन बार रात में प्रयास किया गया, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। इसके बाद पुलिस का कड़ा पहरा लगा दिया गया। लेकिन क्रांतिकारियों ने पहरेदारों को काबू कर लिया गया। 

विजयशरण चौधरी ने माचिस खोलकर तारा सिंह धाकरे को दी, उन्होंने अग्नि प्रज्ज्वलित कर दी। अन्य साथियों ने रजिस्टर और अन्य कागज आग में डाल दिए। इसके बाद सभी क्रांतिकारी महाराजा अवागढ़ के बाग से लगी बाउंड्री के पास इकट्ठे होकर जलते आयकर दफ्तर की लपटों को देखते रहे। पूरा दफ्तर जल गया था। 
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Corona In Agra: ताजनगरी में नहीं थम रही संक्रमण की रफ्तार, 34 नए मरीज मिले

आगरा में कोरोना संक्रमण के कारण एक बार फिर स्थिति चिंताजनक हो गई है। शनिवार को 34 नए संक्रमित मरीज मिले। इसके साथ कुल संक्रमितों का आंकड़ा 2065 पर पहुंच गया है। प्रशासन की रिपोर्ट के मुताबिक शनिवार को कोरोना जांच के लिए 1,777 नमूने लिए गए। अब तक कुल 64,469 लोगों की जांच हो चुकी है। 

जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह ने बताया कि 34 नए मरीज मिले हैं। 36 मरीजों को ठीक होने के बाद डिस्चार्ज भी किया गया है। अब तक 1667 लोग ठीक हो गए हैं। 297 मरीजों का उपचार चल रहा है। इनमें 141 मरीज होम आइसोलेशन में भर्ती हैं। राहत की बात यह है कि पिछले 48 घंटे में किसी संक्रमित की मौत नहीं हुई है। 


121 कंटेनमेंट जोन एक्टिव

ताजनगरी में 121 कंटेनमेंट जोन एक्टिव हैं। इन इलाकों में लगातार नए मरीज मिल रहे हैं। अब तक 253 कंटेनमेंट जोन बंद हो चुके हैं। शहर के साथ ग्रामीण क्षेत्र में भी संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। 
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Corona In Agra: माता-पिता के बाद कमिश्नर की बहन भी कोरोना संक्रमित, पत्नी-बच्चे क्वारंटीन

आगरा में कोरोना वायरस का संक्रमण तेजी से फैल रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों के परिवार के लोग भी वायरस की चपेट में आ रहे हैं। कमिश्नर (मंडलायुक्त) अनिल कुमार के माता-पिता के बाद अब उनकी बहन में संक्रमण की पुष्टि हुई है। शनिवार को उनकी जांच रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई। 

कमिश्नर की 69 वर्षीय मां और 74 वर्षीय पिता एमजी रोड स्थित निजी कोविड अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि उनकी बहन को एक होटल में आइसोलेट किया गया है। बहन में कोई लक्षण नहीं हैं। कमिश्नर अनिल कुमार, उनकी पत्नी और दोनों बच्चे भी एक होटल में क्वारंटीन हैं। माता-पिता की हालत में सुधार है।
  

बुधवार को कमिश्नर के कैंप ऑफिस में रेंडम एंटीजन टेस्ट के दौरान माता-पिता समेत छह लोग पॉजिटिव मिले थे। अब संक्रमितों की संख्या आठ हो गई है। एडीएम सिटी डॉ प्रभाकांत अवस्थी ने बताया कि कमिश्नर पूरी तरह स्वास्थ्य हैं। उनकी पत्नी और बच्चों की रिपोर्ट भी निगेटिव है। एहितयात के तौर पर वे होटल में क्वारंटीन हैं। 
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अपराजिता: 'पिता ने मना किया, पति ने पीटा, पर मैं वकील बनकर ही मानी' पढ़ें महिला वकीलों के संघर्ष की कहानी

कोरोना वायरस
लोगों को इंसाफ दिलाने का जिम्मा लेकर वकील बनीं महिलाओं को भी हर कदम पर संघर्ष करना पड़ रहा है। इसकी शुरुआत लॉ में दाखिला लेते ही हो जाती है। दरअसल, समाज में अभी भी कुछ लोग वकालत को महिलाओं के लिए सुरक्षित पेशा नहीं माना जाता। शायद इसीलिए महिला वकीलों की संख्या भी कम है। आगरा दीवानी कचहरी में कुल 6000 वकील हैं, इनमें महिलाएं 10 फीसदी से भी कम हैं। 450 ही महिला वकील हैं। पढ़िए ऐसी ही महिला वकीलों के संघर्ष की कहानी... 

लॉ के फार्म पर पिता ने दस्तखत करने से कर दिया था मना


एडवोकेट दीपिका 2016 से वकालत कर रही हैं। उन्होंने बताया कि पिता आईटीआई में प्रोफेसर थे। मैंने उनसे कहा कि मुझे वकील बनना है तो आग बबूला हो गए। मुझे लगा कि उन्हें मना लूंगी, इसलिए आगरा कॉलेज से लॉ में दाखिले का फॉर्म ले गई। उन्होंने दस्तखत करने से मना कर दिया। उन्हें यह कहकर मनाया कि वकील नहीं बनूंगी, सिविल सर्विस में जाऊंगी। 2008 में लॉ करने के बाद मुझे प्रैक्टिस नहीं करने दी, 2014 में शादी कर दी। पति ने कहा कि यदि प्रैक्टिस करने की बात भी की तो टांगें तोड़ दूंगा। सिर्फ कहा ही नहीं, कर भी दिया, मुझे पीटा। मैंने फिर भी हार नहीं मानी, पति से अलग हो गई, 2016 से वकालत कर रही हूं।

फिकरे कसते थे लोग, कचहरी में तुम्हारा क्या काम है?

दीपिका ने बताया कि जब प्रैक्टिस शुरू की तो कचहरी के अंदर और बाहर बहुत बुरा-भला सुनना पड़ा। कचहरी में लोग फिकरे कसते थे, कहते कचहरी में तुम्हारा क्या काम। ये महिला है, कितने दिन टिक पाएगी, ज्यादा से ज्यादा दो साल में चली जाएगी। परिवार के लोग शक करते। इतना तक कहा, आज तो हड़ताल थी, तू कचहरी में क्या करने गई थी। और क्या कहूं, मैंने साथी वकीलों को बताया कि पति पीटता है, कई का जवाब था, तो क्या हुआ? जैसा भी है, उसी के साथ रहो।

ये चुनौतियां आईं सामने

- महिला हूं, इसलिए कई पुरुष वकील मुझे टिकने नहीं देना चाहते थे।
- महिला वकीलों को हतोत्साहित किया जाता है, मुझे भी किया गया।
- चैंबर के लिए लड़ रही हूं, आज तक नहीं मिला।
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आगरा: 12वीं की छात्रा ने कमरे में बंद होकर आत्मदाह का किया प्रयास, हालत गंभीर

आगरा के थाना हरीपर्वत की विजय नगर स्थित महाराष्ट्र कॉलोनी में शनिवार दोपहर को एक छात्रा ने कमरे में बंद होकर आत्मदाह का प्रयास किया। लोगों ने दरवाजा खोलकर छात्रा को बाहर निकाला। सूचना पर पुलिस पहुंच गई। छात्रा को इमरजेंसी में भर्ती कराया गया है। उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। पुलिस का कहना है कि छात्रा ने यह कदम क्यों उठाया? यह पता नहीं चल सका है।
 
महाराष्ट्र कालोनी निवासी छात्रा के पिता की 20 जुलाई को बीमारी की वजह से मौत हो गई थी। उसकी मां और भाई घर के पास ही सामान खरीदने गए थे। पड़ोस में रहने वाली बुआ घर के बाहर बैठी थी। अचानक बुआ ने भाई के घर से धुआं निकलता देखा। मगर, मुख्य गेट अंदर से बंद था। उन्होंने शोर मचाया। इस पर आसपास के लोगों के साथ ही मां और भाई आ गए। उन्होंने किसी तरह दरवाजा खोला। अंदर छात्रा जल रही थी। 


लोगों ने किसी तरह आग पर काबू पाया। सूचना पर थाना हरीपर्वत पुलिस पहुंच गई। परिजन छात्रा को एसएन मेडिकल कालेज इमरजेंसी ले गए। जहां उसका उपचार चल रहा है। छात्रा की बुआ ने बताया कि भतीजी 12वीं की छात्रा है। मगर, इस समय स्कूल बंद हैं। इस कारण घर में ही रहती है। 
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एयर इंडिया विमान हादसा : मथुरा के को-पायलट अखिलेश शर्मा की मौत, परिवार में मचा कोहराम

Corona In Mainpuri: एक ही परिवार के सात सदस्य सहित 21 नए कोरोना संक्रमित

कोरोना संक्रमण की रफ्तार मैनपुरी जिले में थमती नजर नहीं आ रही। शनिवार को एक परिवार के सात लोगों सहित कुल 21 कोरोना संक्रमित मिले। अब संक्रमितों की संख्या बढ़कर 886 पर पहुंच गई है। 16 संक्रमितों की अब तक मौत हो चुकी है। 692 को ठीक हो चुके हैं। 178 संक्रमितों का विभिन्न अस्पतालों में उपचार चल रहा है। 

शनिवार को शहर के मोहल्ला सौतियाना में एक ही परिवार के सात लोग कोरोना संक्रमित निकले। सभी को एसडीएम रजनीकांत, डॉ. अंकित यादव आदि की टीम ने एंबुलेंस से आइसोलेशन वार्ड भोगांव भिजवाया। 


मोहल्ला वंशीगोहरा में चार, राजा का बाग और डाक बंगला क्षेत्र निवासी एक-एक व्यक्ति कोरोना संक्रमित निकला। करहल में पांच, घिरोर के गांव उसनीदा में दो, बेवर के गांव करुआमई में एक व्यक्ति कोरोना संक्रमित पाया गया। सभी संक्रमितों को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया है। 

मोहल्ला सौतियाना को किया गया सील 

शहर के मोहल्ला सौतियाना में एक ही परिवार के सात लोग कोरोना संक्रमित मिलने के बाद पूरे मोहल्ले को एसडीएम रजनीकांत ने सील करा दिया है। परिवार का एक सदस्य दो दिन पूर्व कोरोना संक्रमित निकला था। इसके बाद परिवार के अन्य सदस्यों की जांच कराई गई। इसमें सात संक्रमित निकले।
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