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'पेपर लीक से बर्बाद होता है युवाओं का साल': राज्यपाल ने दी शिक्षकों को सीख, जुगाड़ से पदोन्नति पर चेताया
Wed, 28 Oct 2026 09:00 PM IST
Arun Parashar
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: Arun Parashar
Updated Wed, 28 Oct 2026 09:00 PM IST
सार
राज्यपाल ने मातृभाषा में शिक्षा देने की बात कहते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में इसे महत्व दिया गया है लेकिन व्यवहार में बच्चों को अंग्रेजी बोलने के लिए अधिक प्रेरित किया जाता है। दूसरी भाषाओं का ज्ञान जरूरी है मगर बच्चों को पहले अपनी भाषा में समझने, बोलने और सोचने का अवसर मिलना चाहिए। इससे उनकी बौद्धिक क्षमता का बेहतर विकास होगा। उन्होंने दो साल के बच्चों को स्कूल भेजने की प्रवृत्ति पर भी चिंता जताई और कहा कि बच्चों के बचपन और स्वाभाविक विकास को महत्व दिया जाना चाहिए।
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राज्यपाल आनंदीबेन पटेल।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
पेपर लीक होने से सिर्फ परीक्षा प्रभावित नहीं होती बल्कि उन युवाओं का भविष्य भी दांव पर लग जाता है जो सीमित आयु में प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने की तैयारी करते हैं। एक परीक्षा प्रभावित होने से अभ्यर्थी का एक साल बर्बाद होता है और उम्र की सीमा पार होने पर वह अगली परीक्षा के लिए पात्र भी नहीं रह पाता। ये बातें प्रदेश की राज्यपाल व कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने बुधवार को डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के दो दिवसीय नेशनल कॉन्क्लेव-2026 के समापन अवसर पर कहीं।
उन्होंने शिक्षा जगत में शुद्ध आचरण बनाए रखने पर जोर दिया। कहा कि कुछ शिक्षकों की गलतियों के कारण परीक्षाएं प्रभावित होती हैं और पेपर लीक जैसी घटनाएं सामने आती हैं। शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए शिक्षकों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। राज्यपाल ने शिक्षकों की पदोन्नति में मेरिट को प्राथमिकता देने की पैरवी करते हुए कहा कि शिक्षक ने कितने शोध किए, कितनी किताबें प्रकाशित कीं और शिक्षा के क्षेत्र में उसका क्या योगदान रहा, इन उपलब्धियों के आधार पर पदोन्नति होनी चाहिए। यदि मेरिट को दरकिनार कर नियमों के विपरीत पदोन्नति की गई तो ऐसे लोगों को बचाने वाला कोई नहीं होगा। उन्होंने शिक्षकों को कार्यप्रणाली सुधारने की सीख दी।
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खंदारी परिसर के जयप्रकाश नारायण सभागार में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन का मुख्य विषय राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत शिक्षकों के व्यावसायिक विकास के लिए पुष्टि (राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षक मानक) और मित्रा (राष्ट्रीय मेंटरिंग मिशन) का प्रभावी क्रियान्वयन रहा। एनसीटीई, भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय और विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सम्मेलन में नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षाविदों ने भाग लिया। राज्यपाल ने मातृभाषा में शिक्षा देने की बात कहते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में इसे महत्व दिया गया है लेकिन व्यवहार में बच्चों को अंग्रेजी बोलने के लिए अधिक प्रेरित किया जाता है। दूसरी भाषाओं का ज्ञान जरूरी है मगर बच्चों को पहले अपनी भाषा में समझने, बोलने और सोचने का अवसर मिलना चाहिए। इससे उनकी बौद्धिक क्षमता का बेहतर विकास होगा। उन्होंने दो साल के बच्चों को स्कूल भेजने की प्रवृत्ति पर भी चिंता जताई और कहा कि बच्चों के बचपन और स्वाभाविक विकास को महत्व दिया जाना चाहिए।
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उन्होंने शिक्षा जगत में शुद्ध आचरण बनाए रखने पर जोर दिया। कहा कि कुछ शिक्षकों की गलतियों के कारण परीक्षाएं प्रभावित होती हैं और पेपर लीक जैसी घटनाएं सामने आती हैं। शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए शिक्षकों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। राज्यपाल ने शिक्षकों की पदोन्नति में मेरिट को प्राथमिकता देने की पैरवी करते हुए कहा कि शिक्षक ने कितने शोध किए, कितनी किताबें प्रकाशित कीं और शिक्षा के क्षेत्र में उसका क्या योगदान रहा, इन उपलब्धियों के आधार पर पदोन्नति होनी चाहिए। यदि मेरिट को दरकिनार कर नियमों के विपरीत पदोन्नति की गई तो ऐसे लोगों को बचाने वाला कोई नहीं होगा। उन्होंने शिक्षकों को कार्यप्रणाली सुधारने की सीख दी।
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खंदारी परिसर के जयप्रकाश नारायण सभागार में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन का मुख्य विषय राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत शिक्षकों के व्यावसायिक विकास के लिए पुष्टि (राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षक मानक) और मित्रा (राष्ट्रीय मेंटरिंग मिशन) का प्रभावी क्रियान्वयन रहा। एनसीटीई, भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय और विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सम्मेलन में नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के शिक्षाविदों ने भाग लिया। राज्यपाल ने मातृभाषा में शिक्षा देने की बात कहते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में इसे महत्व दिया गया है लेकिन व्यवहार में बच्चों को अंग्रेजी बोलने के लिए अधिक प्रेरित किया जाता है। दूसरी भाषाओं का ज्ञान जरूरी है मगर बच्चों को पहले अपनी भाषा में समझने, बोलने और सोचने का अवसर मिलना चाहिए। इससे उनकी बौद्धिक क्षमता का बेहतर विकास होगा। उन्होंने दो साल के बच्चों को स्कूल भेजने की प्रवृत्ति पर भी चिंता जताई और कहा कि बच्चों के बचपन और स्वाभाविक विकास को महत्व दिया जाना चाहिए।
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सम्मेलन में एनसीटीई के अध्यक्ष प्रो. पंकज अरोड़ा ने कहा कि देश में लगभग 14.67 लाख स्कूल, 1.03 करोड़ शिक्षक और 25 करोड़ विद्यार्थी हैं। शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए शिक्षकों के व्यावसायिक मानकों को मजबूत करना और प्रभावी मेंटरिंग तंत्र विकसित करना जरूरी है। उन्होंने मित्रा के तहत राष्ट्रीय मेंटरिंग मिशन की भूमिका समझाई। सम्मेलन के तकनीकी सत्रों में मित्रा की हैंडबुक, डिजिटल पोर्टल और मेंटरिंग प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया गया। दूसरे दिन पुष्टि के वैचारिक ढांचे, राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षक मानकों और क्रियान्वयन प्रक्रिया पर चर्चा हुई। इसके डिजिटल पोर्टल और मोबाइल एप का प्रदर्शन भी किया गया। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों की सहभागिता लघु भारत का स्वरूप है। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशु रानी ने कहा कि सम्मेलन में भाग लेना या पंजीकरण कराना ही पर्याप्त नहीं है। यहां सीखी गई बातों को व्यवहार में उतारकर विद्यार्थियों तक पहुंचाना जरूरी है।
इन्होंने किया प्रतिभाग
कार्यक्रम में संस्कृत प्रमोशन फाउंडेशन के निदेशक प्रो. चांद किरण सलूजा ने भी विचार रखे। मंच संचालन डॉ. प्रमोद कुमार और शोधार्थी मनीषा यादव ने किया। इस अवसर पर प्रो. मनु प्रताप सिंह, डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार, एनटीए के सलाहकार मुकुंद कुमार झा, प्रो. आशीष श्रीवास्तव, विभिन्न राज्यों से आए शिक्षाविद और अधिकारी मौजूद रहे। दो दिवसीय कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय में रुकीं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने विभिन्न परिसरों का निरीक्षण कर व्यवस्थाएं परखीं। बुधवार को उन्होंने गोपालकुंज परिसर का दौरा किया। शिक्षकों और अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक भी की। साथ ही खंदारी स्थित मॉडल स्कूल के बच्चों से भी मुलाकात की।
शैक्षिक भ्रमण रोकने पर जताई नाराजगी
राज्यपाल ने शिक्षकों से पूछा कि वे कितने बच्चों को शैक्षिक भ्रमण पर ले जाते हैं। उत्तर संतोषजनक न मिलने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि किसी एक घटना के बाद परिपत्र जारी कर भ्रमण बंद कर देना उचित नहीं है। बच्चे विभिन्न स्थानों को देखकर और प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त कर भी सीखते हैं। सुरक्षा का ध्यान रखते हुए शैक्षिक भ्रमण जारी रखना चाहिए। बेसिक और माध्यमिक में अलग-अलग समय पर छुट्टियां घोषित करने पर भी उन्होंने सवाल उठाए।
आचरण ठीक रखने की दी नसीहत
छात्राओं के साथ अनुचित व्यवहार करने वाले शिक्षकों और प्रधानाचार्यों को चेतावनी देते हुए राज्यपाल ने हाल ही में एक मेडिकल कॉलेज में परीक्षा में पास करने के नाम पर छात्रा से गलत व्यवहार का उल्लेख किया। पीड़ित छात्रा उनके पास पहुंची और उनके हस्तक्षेप के बाद संबंधित शिक्षक के खिलाफ निष्कासन की कार्रवाई हुई। शिक्षक और प्रधानाचार्य अपना आचरण ठीक रखें।
ड्रॉपआउट बच्चों को सर्वे गांव में करें
राज्यपाल ने स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की पहचान के लिए किए जा रहे सर्वे की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि सर्वे केवल स्कूल में अनुपस्थित बच्चों की गिनती तक सीमित नहीं रहना चाहिए। गांवों में जाकर पता लगाना चाहिए। जो बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं, उन्हें चिह्नित कर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास होने चाहिए। उन्होंने उत्तर प्रदेश में 30 सितंबर तक प्रवेश प्रक्रिया चलने पर भी सवाल उठाए।
इन्होंने किया प्रतिभाग
कार्यक्रम में संस्कृत प्रमोशन फाउंडेशन के निदेशक प्रो. चांद किरण सलूजा ने भी विचार रखे। मंच संचालन डॉ. प्रमोद कुमार और शोधार्थी मनीषा यादव ने किया। इस अवसर पर प्रो. मनु प्रताप सिंह, डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार, एनटीए के सलाहकार मुकुंद कुमार झा, प्रो. आशीष श्रीवास्तव, विभिन्न राज्यों से आए शिक्षाविद और अधिकारी मौजूद रहे। दो दिवसीय कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय में रुकीं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने विभिन्न परिसरों का निरीक्षण कर व्यवस्थाएं परखीं। बुधवार को उन्होंने गोपालकुंज परिसर का दौरा किया। शिक्षकों और अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक भी की। साथ ही खंदारी स्थित मॉडल स्कूल के बच्चों से भी मुलाकात की।
शैक्षिक भ्रमण रोकने पर जताई नाराजगी
राज्यपाल ने शिक्षकों से पूछा कि वे कितने बच्चों को शैक्षिक भ्रमण पर ले जाते हैं। उत्तर संतोषजनक न मिलने पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि किसी एक घटना के बाद परिपत्र जारी कर भ्रमण बंद कर देना उचित नहीं है। बच्चे विभिन्न स्थानों को देखकर और प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त कर भी सीखते हैं। सुरक्षा का ध्यान रखते हुए शैक्षिक भ्रमण जारी रखना चाहिए। बेसिक और माध्यमिक में अलग-अलग समय पर छुट्टियां घोषित करने पर भी उन्होंने सवाल उठाए।
आचरण ठीक रखने की दी नसीहत
छात्राओं के साथ अनुचित व्यवहार करने वाले शिक्षकों और प्रधानाचार्यों को चेतावनी देते हुए राज्यपाल ने हाल ही में एक मेडिकल कॉलेज में परीक्षा में पास करने के नाम पर छात्रा से गलत व्यवहार का उल्लेख किया। पीड़ित छात्रा उनके पास पहुंची और उनके हस्तक्षेप के बाद संबंधित शिक्षक के खिलाफ निष्कासन की कार्रवाई हुई। शिक्षक और प्रधानाचार्य अपना आचरण ठीक रखें।
ड्रॉपआउट बच्चों को सर्वे गांव में करें
राज्यपाल ने स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की पहचान के लिए किए जा रहे सर्वे की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि सर्वे केवल स्कूल में अनुपस्थित बच्चों की गिनती तक सीमित नहीं रहना चाहिए। गांवों में जाकर पता लगाना चाहिए। जो बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं, उन्हें चिह्नित कर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास होने चाहिए। उन्होंने उत्तर प्रदेश में 30 सितंबर तक प्रवेश प्रक्रिया चलने पर भी सवाल उठाए।