Hindi News
›
Video
›
Uttar Pradesh
›
Agra News
›
148 year old tradition at Agra Ramlila is set to change first time Shaligram will arrive from Dasharath home
{"_id":"6ac20dfd7e5e90a7a506f216","slug":"video-148-year-old-tradition-at-agra-ramlila-is-set-to-change-first-time-shaligram-will-arrive-from-dasharath-home-2026-10-04","type":"video","status":"publish","title_hn":"VIDEO: आगरा की रामलीला में बदलेगी 148 साल पुरानी परंपरा, पहली बार दशरथ के घर से आएंगे सालिगराम; तभी होगा राम विवाह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
VIDEO: आगरा की रामलीला में बदलेगी 148 साल पुरानी परंपरा, पहली बार दशरथ के घर से आएंगे सालिगराम; तभी होगा राम विवाह
आगरा की ऐतिहासिक रामलीला में इस बार 148 साल पुरानी परंपरा का स्वरूप बदलने जा रहा है। पहली बार भगवान सालिगराम को रामलीला कमेटी की ओर से नहीं, बल्कि राजा दशरथ के घर से लाया जाएगा। इसके बाद राम-जानकी विवाह की रस्म पूरी होगी। अब तक कमेटी की ओर से पूजा-पाठ कर सालिगराम को लाने की परंपरा रही है। माता कौशल्या का स्वरूप निभा रहीं नीता सिंगल ने बताया कि परंपरा में बदलाव का सुझाव उन्होंने ही रखा था, जिसे रामलीला कमेटी ने स्वीकार कर लिया। उन्होंने बताया कि सालिगराम और कंटेश्वर की प्रतिमाएं उन्हें कई वर्ष पहले अमरकंटक से नर्मदा मंदिर के मुख्य महंत वंदे जी महाराज ने दी थीं। तभी से वह अपने मंदिर में उनकी पूजा-पाठ करती आ रही हैं। इस बार इन्हीं सालिगराम को राम विवाह के लिए दशरथ के घर से लाया जाएगा। उन्होंने बताया कि आयोजन की तैयारियां भी पारिवारिक विवाह की तर्ज पर की जा रही हैं। तुलसी जी के लिए जयपुर से साड़ी और श्रृंगार का सामान मंगाया गया है, जबकि सालिगराम जी के लिए वृंदावन से श्रृंगार सामग्री, सहारा, बांसुरी समेत अन्य सामान आया है। विवाह के दिन सालिगराम जी के लिए अलग पोशाक भी तैयार कराई गई है। तुलसी-सालिगराम विवाह की रस्में परिवार में बेटे-बेटी के विवाह की तरह ही निभाई जाएंगी। इस बार राम विवाह के आयोजन में एक और नई परंपरा जुड़ने जा रही है। राम-जानकी विवाह के बाद विदाई की रस्म पूरी होने पर पहली बार भगवान श्रीराम दशरथ के घर विश्राम करेंगे। यहीं सभी स्वरूपों का आदर-सत्कार किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार इससे पहले विवाह के बाद श्रीराम के दशरथ के घर रुकने और सभी स्वरूपों के स्वागत-सत्कार की व्यवस्था नहीं हुई है। इस बार इसे आयोजन का हिस्सा बनाया गया है। इस बदलाव के साथ रामलीला में विवाह प्रसंग को केवल मंचीय आयोजन तक सीमित रखने की बजाय पारिवारिक परंपराओं के रूप में प्रस्तुत करने की तैयारी है। दशरथ के घर से सालिगराम का आगमन, विवाह की रस्म और विदाई के बाद श्रीराम का वहीं विश्राम इस बार के आयोजन को अलग रूप देगा।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम वीडियो सिर्फ सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध है
प्रीमियम वीडियो
सभी विशेष आलेख
फ्री इ-पेपर
सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।