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नागौर निकाय चुनाव: 1,049 प्रत्याशियों की अग्निपरीक्षा, 377 ने छोड़ा मैदान; 241 के साथ नागौर सबसे आगे
नागौर निर्वाचन अधिकारी के अनुसार जिले के 9 नगरीय निकायों के लिए कुल 1,637 नामांकन पत्र दाखिल हुए थे। जांच प्रक्रिया के बाद 1,426 उम्मीदवार वैध पाए गए। इसके बाद नाम वापसी की अंतिम तारीख तक 377 उम्मीदवारों ने चुनाव मैदान से हटने का फैसला किया। अब अंतिम रूप से 1,049 प्रत्याशी चुनाव लड़ेंगे।
नागौर में सबसे बड़ा सियासी मुकाबला, 241 प्रत्याशी मैदान में
निकायवार आंकड़ों में नागौर नगर परिषद सबसे ज्यादा प्रत्याशियों वाला निकाय बना है। यहां स्क्रूटनी के बाद 381 उम्मीदवार मैदान में थे, जिनमें से 140 ने नाम वापस लिया। अब नागौर नगर परिषद के विभिन्न वार्डों में 241 प्रत्याशी चुनावी मुकाबले में हैं। वहीं मेड़ता सिटी में 156, बासनी में 145, मेड़ता रोड में 108, डेगाना में 89, रियां बड़ी में 88, जायल में 83, कुचेरा में 78 और मुंडवा में 61 प्रत्याशी मैदान में बचे हैं।
निकायवार आंकड़ों के अनुसार, कुचेरा में 106 वैध उम्मीदवारों में से 28 ने नाम वापस लिया, जिसके बाद 78 उम्मीदवार मैदान में हैं। नागौर में 381 वैध उम्मीदवारों में से 140 ने नाम वापस लिया और अब 241 प्रत्याशी चुनाव लड़ेंगे। मेड़ता सिटी में 205 वैध उम्मीदवारों में से 49 नाम वापस लेने के बाद 156 प्रत्याशी मैदान में हैं। मुंडवा में 113 में से 52 नाम वापस हुए और 61 उम्मीदवार बचे हैं। डेगाना में 105 में से 16 नाम वापस लेने के बाद 89, जबकि जायल में 98 में से 15 नाम वापसी के बाद 83 उम्मीदवार मैदान में हैं।
मेड़ता रोड में 139 में से 31 नाम वापस हुए और 108 प्रत्याशी बचे हैं। बासनी में 172 में से 27 नाम वापस लेने के बाद 145, जबकि रियां बड़ी में 117 में से 29 नाम वापस होने के बाद 88 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। जिले के सभी 9 निकायों में कुल 1,426 वैध उम्मीदवारों में से 377 ने नाम वापस लिया, जिसके बाद 1,049 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं।
नाम वापसी खत्म, अब बागियों और निर्दलीयों की असली परीक्षा
नाम वापसी खत्म होने के साथ ही अब राजनीतिक दलों के अधिकृत प्रत्याशियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बागी और निर्दलीय प्रत्याशी बन गए हैं। टिकट वितरण के बाद कई वार्डों में पार्टी के भीतर नाराजगी देखने को मिली थी। ऐसे में जिन उम्मीदवारों ने नाम वापस नहीं लिया है, वे अब सीधे मुकाबले में पार्टी प्रत्याशियों के लिए चुनौती बन सकते हैं।
खासकर नागौर नगर परिषद के 241 प्रत्याशियों वाले मुकाबले पर पूरे जिले की राजनीतिक निगाहें रहेंगी। यहां वार्डवार जातीय समीकरण, व्यक्तिगत जनाधार, राजनीतिक परिवारों की प्रतिष्ठा, पार्टी संगठन और स्थानीय मुद्दे चुनाव परिणाम में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
EVM का फर्स्ट रैंडमाइजेशन पूरा
चुनाव को लेकर प्रशासनिक तैयारियां भी अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक EVM का फर्स्ट रैंडमाइजेशन पूरा किया जा चुका है। अब 4 सितंबर की शाम 5 बजे सेकंड रैंडमाइजेशन प्रस्तावित है। इस प्रक्रिया की जानकारी राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों को भी दी जाएगी।
इसके बाद 6 सितंबर को इंजीनियर्स की मौजूदगी में जिला स्तर पर EVM की कमीशनिंग की जाएगी। कमीशनिंग के बाद मशीनों को संबंधित नगर निकायों के लिए बनाए गए स्ट्रॉन्ग रूम में निर्धारित सुरक्षा व्यवस्था और प्रोटोकॉल के तहत पहुंचाया जाएगा।
8 और 10 सितंबर को रवाना होंगी पोलिंग पार्टियां
प्रशासन ने मतदान को लेकर भी पूरी तैयारी कर ली है। पहले चरण के लिए पोलिंग पार्टियां 8 सितंबर को रवाना होंगी, जबकि दूसरे चरण के लिए 10 सितंबर को पोलिंग पार्टियों की रवानगी होगी। अब नामांकन और नाम वापसी की औपचारिक प्रक्रिया पीछे छूट चुकी है। 1,049 प्रत्याशियों के मैदान में रहने के साथ नागौर की चुनावी सियासत निर्णायक दौर में प्रवेश कर चुकी है। अब प्रत्याशी घर-घर संपर्क, जनसभाओं, बैठकों और वार्डवार रणनीति के जरिए मतदाताओं को साधने में जुटेंगे।
सबसे बड़ा सवाल- किसके साथ जाएगा वोट बैंक?
इन चुनावों में केवल भाजपा और कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों के बीच मुकाबला नहीं माना जा सकता। निर्दलीय, बागी और स्थानीय प्रभाव रखने वाले प्रत्याशी कई वार्डों में पूरे चुनावी समीकरण को बदलने की क्षमता रखते हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में राजनीतिक दलों की रणनीति का केंद्र बागियों को साधना, नाराज कार्यकर्ताओं को मनाना और मजबूत निर्दलीयों के प्रभाव को सीमित करना रहेगा।
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