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पाकिस्तान का गंदा कसूर नाला भारतीय सीमावर्ती गांवों के लोगों में फैला रहा भयानक बीमारियां
फिरोजपुर। पाकिस्तान से बहकर आने वाला कसूर का गंदा नाला सीमावर्ती भारतीय गांवों के लोगों के लिए गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि कसूर में स्थित चमड़ा फैक्ट्रियों से निकलने वाला रसायनयुक्त और प्रदूषित पानी नाले के रास्ते सतलुज दरिया में पहुंच रहा है। इससे न केवल दरिया का पानी प्रदूषित हो रहा है, बल्कि जलजीव-जंतुओं पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि प्रदूषित पानी के कारण सीमा क्षेत्र में कैंसर, पथरी, रसौली और चमड़ी संबंधी बीमारियों के मामले सामने आ रहे हैं। बता दें कि हरिके हेड से निकलने वाला सतलुज दरिया कई स्थानों से होकर पाकिस्तान में प्रवेश करता है और फिर भारतीय क्षेत्र में लौटता है। हुसैनीवाला बार्डर से सटे गांवों के लोगों का कहना है कि कसूर के प्रदूषित पानी का असर उनके क्षेत्र में लंबे समय से दिखाई दे रहा है।
सीमांत गांव भाने वाला निवासी बलविंदर सिंह ने बताया कि केवल हुसैनीवाला बार्डर से सटे करीब 17 गांव ही प्रभावित नहीं हैं, बल्कि ममदोट, गुरुहरसहाय, जलालाबाद और फाजिल्का के सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोग भी इस समस्या से परेशान हैं। गुरदेव सिंह ने बताया कि उनके परिवार के तीन सदस्य पथरी और रसौली की बीमारी से पीड़ित हैं। उन्होंने बताया कि हुसैनीवाला बार्डर से सटे 17 गांवों में करीब आठ हजार की आबादी रहती है। प्रत्येक घर में दो से तीन लोग विभिन्न बीमारियों से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि प्रदूषित पानी के कारण भूजल भी प्रभावित हो रहा है। सीमा क्षेत्र में लगे कई हैंडपंपों से पीले रंग का पानी निकलता है, जिसे ग्रामीण पीने योग्य नहीं मानते। इसके बावजूद मजबूरी में इसी पानी का इस्तेमाल नहाने और कपड़े धोने के लिए करना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में पीने के स्वच्छ पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। हुसैनीवाला बार्डर से सटे गांवों में लोगों के लिए कोई उचित आरओ सिस्टम भी उपलब्ध नहीं है, जहां से वे पीने का साफ पानी भर सकें।
समाजसेवी संस्थाएं लगाती रही हैं मेडिकल कैंप
ग्रामीणों के इलाज के लिए विभिन्न समाजसेवी संस्थाओं की ओर से समय-समय पर मेडिकल कैंप लगाए जाते रहे हैं। इन कैंपों में कई मरीज ऐसे भी मिले, जिन्हें गंभीर बीमारी के चलते स्थानीय अस्पतालों में भर्ती करवाकर इलाज करवाया गया।
नेशनल अवार्डी एवं डीईओ डॉ. सतिंदर सिंह ने बताया कि जब वह सीमावर्ती गांव गट्टी राजोके स्थित सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल थे, तब उन्होंने वर्ष 2017 से 2024 तक हुसैनीवाला बार्डर से सटे 17 गांवों में 30 से अधिक मेडिकल कैंप लगवाए। इनमें करीब 10 कैंप चमड़ी रोगों से संबंधित थे, जबकि लुधियाना की एक संस्था के सहयोग से आंखों के इलाज के लिए पांच बड़े कैंप लगाए गए। इन कैंपों के दौरान करीब 490 लोगों के आंखों के ऑपरेशन करवाए गए। इसके अलावा कनाडा और अन्य संस्थाओं के सहयोग से विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए भी मेडिकल कैंप आयोजित किए गए।
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