पूरे देश की तरह मध्य प्रदेश में भी शारदीय नवरात्रि का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। इसी कड़ी में उज्जैन की केंद्रीय भैरवगढ़ जेल में कैदी भी माता की भक्ति में लीन हैं। खास बात यह है कि कई कैदी 9 दिन का उपवास रखकर नियमों का पालन करते हुए पूजा-अर्चना कर रहे हैं।
केंद्रीय जेल के जेलर सुरेश गोयल ने बताया कि जेल में इस समय 2000 से अधिक कैदी बंद हैं, जिनमें से 682 कैदी नवरात्रि में उपवास और पूजा कर रहे हैं। इनमें 622 पुरुष और 60 महिला कैदी शामिल हैं। साधारण अपराधी ही नहीं, बल्कि कई कुख्यात कैदी भी माता की भक्ति में जुटे हैं। कुछ ने तो अपने गुनाहों की माफी और समाज की मुख्यधारा में लौटने की मंशा से व्रत रखा है। जेल प्रशासन ने उपवास रखने वाले कैदियों के लिए विशेष व्यवस्था की है ताकि उनकी आस्था और स्वास्थ्य दोनों का ध्यान रखा जा सके।
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जेलर ने बताया कि जेल परिसर में मां पद्मावती का अतिप्राचीन मंदिर भी स्थित है, जिसका उल्लेख स्कंद पुराण में मिलता है। मां पद्मावती को भगवान वेंकटेश्वर की पत्नी और देवी लक्ष्मी का रूप माना जाता है। यह मंदिर स्वयंभू है और जेल में धार्मिक वातावरण बनाए रखता है। यहां सुबह 6 बजे से ही पूजा-पाठ शुरू हो जाता है। इसके अलावा जेल के खंड 'अ' और 'ब' में भी माता की प्रतिमा स्थापित की गई है, जहां कैदी भक्ति कर रहे हैं।22 सितंबर से नवरात्रि शुरू होते ही जेल में उपवास रखने वाले कैदियों की संख्या बढ़ गई है। आलम यह है कि अब दाल-रोटी से ज्यादा फलाहार की मांग हो रही है। जेल अधीक्षक मनोज साहू ने बताया कि कैदियों को मूंगफली, गुड़, साबूदाने की खिचड़ी और फल दिए जा रहे हैं। जेल मैनुअल के अनुसार, उपवास रखने वालों को विशेष सुविधा मिलती है। इस समय कैदियों को चाय, फलाहार के साथ 200 ग्राम दूध और 2 केले भी स्वल्पाहार के रूप में उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
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