राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने मंगलवार को सागर जिले के बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब से प्रभावित गांवों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने त्रासदी के पीड़ितों और उनके परिजनों से मुलाकात की और उनका दर्द साझा किया। उन्होंने प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।
प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेने के बाद मीडिया से चर्चा में प्रियंक कानूनगो ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में शामिल कोई भी दोषी बचना नहीं चाहिए। पुलिस और प्रशासन को निष्पक्ष और सख्त विवेचना सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि वास्तविक अपराधियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सके।
आबकारी विभाग की भूमिका को लेकर उन्होंने कहा कि विभाग अपनी जांच रिपोर्ट तैयार करेगा, लेकिन पुलिस को तत्काल यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मृतकों के परिजनों के बयान दर्ज किए जाएं। उन्होंने कहा कि पुलिस अब तक मृतकों के परिजनों के बयान दर्ज नहीं कर सकी है। साथ ही, गांव-गांव अवैध रूप से शराब बेचने वाले लोगों के नाम भी मुख्य आरोपियों की सूची में शामिल किए जाने चाहिए।
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पीड़ित परिवारों को राहत और न्याय दिलाने की मांग करते हुए कानूनगो ने कहा कि यदि सरकार द्वारा अधिकृत या वैध शराब दुकान से जहरीली शराब की बिक्री हुई है, तो पीड़ितों को नियमानुसार कोर्ट के माध्यम से हर्जाना मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन लोगों की मौत की आधिकारिक रूप से जहरीली शराब से होने की पुष्टि अब तक नहीं हुई है, उन्हें भी मानवीय दृष्टिकोण से 2-2 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस त्रासदी में जिन बच्चों ने अपने माता-पिता को खो दिया है, उनके बेहतर भविष्य और पालन-पोषण के लिए सरकार को विशेष प्रयास करने होंगे। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि ऐसे बच्चों को सरकार की सभी योजनाओं का समुचित लाभ मिले। घटना पर गहरी चिंता जताते हुए प्रियंक कानूनगो ने अपील की कि इस मामले का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीति होने से प्रभावितों और पीड़ितों का पक्ष कमजोर पड़ता है। सभी पक्षों को मिलकर केवल पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए प्रयास करना चाहिए।