बदहाल और जर्जर सड़कों को लेकर लंबे समय से सवालों के घेरे में रहे ग्वालियर में बुधवार को पहली बार हाईकोर्ट के निर्देश पर सड़कों की लाइव सैंपलिंग कराई गई। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर युगलपीठ के निर्देश पर कोर्ट द्वारा नियुक्त एडवोकेट कमीशन और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने शहर की अलग-अलग सड़कों से निर्माण सामग्री के सैंपल लिए। मौके पर ही सभी सैंपलों को सील किया गया। अब इनकी जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि सड़क निर्माण में निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन हुआ था या नहीं।
कोर्ट के निर्देश पर जांच टीम सबसे पहले बेटी बचाओ चौराहा और गुढ़ी-गुड़ा के नाका इलाके में पहुंची। टीम ने सड़क की परत काटकर निर्माण में इस्तेमाल सामग्री के नमूने लिए। इस दौरान एडवोकेट गौरव समाधिया, पवन रघुवंशी, याचिकाकर्ता के वकील अवधेश तोमर, नगर निगम के वकील और तकनीकी दल के अधिकारी मौजूद रहे। जांच टीम की सुरक्षा के लिए ग्वालियर एसपी धर्मवीर सिंह भी पुलिस बल के साथ मौके पर मौजूद रहे।
30 मिनट पहले दी सूचना
इस पूरी कार्रवाई की खास बात यह रही कि जांच टीम को मौके पर पहुंचने की सूचना महज 30 मिनट पहले दी गई थी। टीम बस में बैठकर सीधे निर्धारित स्थल पर पहुंची। हाईकोर्ट ने नगर निगम और अन्य लोगों के संभावित दखल को देखते हुए पहले से तय सड़कों की जांच सूची को भी निरस्त कर दिया था। इसका उद्देश्य सैंपलिंग प्रक्रिया में किसी तरह के बाहरी प्रभाव या हस्तक्षेप की संभावना को खत्म करना था।
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सैंपल रखे जाएंगे सुरक्षित
सड़क से लिए गए सैंपलों को अलग-अलग सुरक्षित रखा जाएगा। सैंपलों का एक हिस्सा जिला कोर्ट के मालखाने में जमा होगा, जबकि दूसरा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की जांच प्रयोगशाला और तीसरा PWD की जांच प्रयोगशाला में भेजा जाएगा। चौथा सैंपल सीलबंद हालत में नगर निगम की सुरक्षित अभिरक्षा में रहेगा। यदि दोनों प्रयोगशालाओं की रिपोर्ट में अंतर या किसी तरह का विवाद सामने आता है तो कोर्ट मालखाने में सुरक्षित रखे सैंपल को देश की किसी प्रतिष्ठित प्रयोगशाला से जांच कराने के लिए भेज सकता है।
जनहित याचिका के बाद उठा मामला
दरअसल, ग्वालियर की खराब सड़कों को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सड़क निर्माण की वास्तविक गुणवत्ता जांचने के लिए सैंपलिंग को महत्वपूर्ण माना है। अब लैब रिपोर्ट के आधार पर यह तय हो सकेगा कि सड़क निर्माण में इस्तेमाल सामग्री निर्धारित मानकों पर खरी उतरी थी या नहीं। यदि गुणवत्ता में गड़बड़ी सामने आती है तो जिम्मेदारों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
निगम ने पेश किया अनुपालन प्रतिवेदन
उधर नगर निगम ने हाईकोर्ट में शहर की सड़कों को लेकर अनुपालन प्रतिवेदन पेश किया है। निगम के मुताबिक शहर की 129 सड़कों की वास्तविक स्थिति का आकलन किया गया है। कुल 140.58 किलोमीटर निगम की सड़कों में 62 सड़कें पूरी तरह चालू, 34 आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त, 24 पूरी तरह बदहाल और 9 सड़कों पर काम प्रगतिरत या प्रस्तावित बताया गया है। नगर निगम की रिपोर्ट में 28.06 किलोमीटर सड़कें पूरी तरह खराब बताई गई हैं। इसके अलावा अन्य विभागों की 64 मुख्य सड़कों का ब्यौरा भी हाईकोर्ट में पेश किया गया है। वहीं अन्य एजेंसियों की 15 सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त बताई गई हैं।
लोगों में जगी उम्मीद
सैंपलिंग की कार्रवाई के दौरान मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों ने हाईकोर्ट के इस कदम का स्वागत किया। लोगों का कहना है कि लंबे समय से खराब सड़कों की समस्या झेल रहे शहर में अब न्यायालय की निगरानी से उम्मीद जगी है कि सड़क निर्माण की गुणवत्ता सुधरेगी और जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी। अब सभी की नजर 25 अगस्त को होने वाली हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर है। सैंपलों की जांच रिपोर्ट इस मामले में अहम भूमिका निभा सकती है। इस बार सवाल सिर्फ ग्वालियर की सड़कों की बदहाली का नहीं, बल्कि सड़क निर्माण की गुणवत्ता और जिम्मेदारी तय करने का भी है।