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मंडी: आईआईटी मंडी के पालमपुर कैंपस पर गरमाई सियासत, 539 एकड़ जमीन के बावजूद विस्तार पर उठे सवाल
आईआईटी मंडी के प्रस्तावित पालमपुर सैटेलाइट कैंपस को लेकर अब विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं। द्रंग विधानसभा क्षेत्र के निवासी और अधिवक्ता उदयनंद शर्मा ने संस्थान के पालमपुर विस्तार के लिए करीब 500 कनाल जमीन लीज पर लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब आईआईटी मंडी के पास पहले से सैकड़ों एकड़ जमीन उपलब्ध है, तो संस्थान के विस्तार को मंडी से बाहर ले जाने की जरूरत क्यों पड़ रही है, इसका स्पष्ट जवाब दिया जाना चाहिए।
अधिवक्ता शर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि आईआईटी मंडी के कमांद परिसर में करीब 503 एकड़, भ्यूली में 28 एकड़ और घोड़ा फार्म के पास करीब 8 एकड़ जमीन उपलब्ध है। उनके अनुसार इन सभी को मिलाकर संस्थान के पास लगभग 539 एकड़ भूमि है। ऐसे में पालमपुर में अतिरिक्त जमीन लेने की प्रक्रिया को लेकर उन्होंने प्रशासन और संस्थान से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि यदि आईआईटी मंडी को भविष्य में विस्तार की आवश्यकता है तो द्रंग के घोगरधार और मासाधार जैसे आसपास के क्षेत्रों में संभावनाओं पर भी विचार किया जा सकता है। उनका सवाल है कि मुख्य परिसर की उपलब्ध जमीन का पूरी तरह उपयोग किए बिना पालमपुर में नया कैंपस विकसित करने का निर्णय किन परिस्थितियों में लिया गया।
अधिवक्ता शर्मा ने इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एक्ट, 1961 का हवाला देते हुए प्रस्तावित सैटेलाइट या सब-कैंपस की कानूनी वैधता पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इस संबंध में उपलब्ध कानूनी प्रावधानों की स्पष्टता जरूरी है और पूरे मामले की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि आईआईटी मंडी केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं है, बल्कि मंडी क्षेत्र के लिए रोजगार, शिक्षा और स्थानीय विकास की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में संस्थान की गतिविधियों का विस्तार दूसरे क्षेत्र में होने से स्थानीय लोगों के हित प्रभावित होने की आशंका है।
आरटीआई से मांगी जानकारी, जरूरत पड़ी तो अदालत जाएंगे
मामले की वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए आरटीआई के माध्यम से संबंधित दस्तावेज और जानकारी मांगी गई है। अधिवक्ता शर्मा ने कहा कि दस्तावेज मिलने के बाद पूरे मामले के कानूनी पहलुओं की जांच की जाएगी। यदि प्रक्रिया में कोई अनियमितता सामने आती है तो जरूरत पड़ने पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय लोगों से बातचीत के बाद इस मुद्दे पर जन-आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि पालमपुर कैंपस के लिए जमीन लेने के निर्णय के पीछे के कारणों और आईआईटी मंडी की मौजूदा जमीन के उपयोग की स्थिति को सार्वजनिक किया जाए।
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