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Workshop for agriculture officials in Hisar; 21 recommendations regarding Rabi crops approved.
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हिसार में कृषि अधिकारियों की कार्यशाला, रबी फसलों को लेकर 21 सिफारिशें स्वीकृत
हिसार। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय कृषि अधिकारी कार्यशाला रबी-2026 के समापर पर अलग-अलग फसलों के लिए 21 सिफारिशों को स्वीकृति प्रदान की गई।
विश्वविद्यालय के रबी की समग्र सिफारिशों से मक्का के संकर किस्म एचएचएम 2, एचएम 5, एचएम 10 और एचएम 11 को हरियाणा राज्य के लिए तथा राया की वरूणा एवं आरबी 50 किस्म को भी हटाया जाएगा। सिंचित अवस्था में राया की बुवाई कतारों में 45 सेंटीमीटर के फासले पर करने की सिफारिश की गई है।
एचएयू के बेसिक साइंस कॉलेज के सभागार में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के समापन पर वीरवार को एचएयू कुलपति प्रो. बलदेव राज काम्बोज ने ऑनलाइन तरीके से कृषि अधिकारियों व वैज्ञानिकों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि कृषि अधिकारी- कृषि वैज्ञानिक वे स्वीकृत सिफारिशों को किसानों तक पहुंचाना सुनिश्चित करें ताकि किसान अपने उत्पादन के साथ-साथ आय में भी बढ़ोतरी कर सकें। कृषि विभाग के अधिकारियों से जिन समस्याओं की जानकारी प्राप्त होती है तथा उनके समाधान को लेकर बनाई जाने वाली योजनाओं से कार्यशाला का महत्व और भी बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि कृषि अधिकारी सीधे तौर पर किसानों से फीडबैक लें। भविष्य में इस फीडबैक तंत्र को डिजीटल माध्यम से और अधिक प्रभावशाली बनाया जाएगा।
विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. नरेश कौशिक ने बताया कि कार्यशाला में दो दिन छह सत्र आयोजित किए गए। जिनमें रबी फसलें गेहूं एवं जौ, गन्ना-मक्का, दलहनी एवं चारा फसलें, तिलहन तथा एग्रोफोरेस्ट्री व शुष्क खेती पर यह सत्र आयोजित किए गए। समापन सत्र में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ रामप्रताप सिहाग ने बताया कि इस कार्यशाला में आने वाली नई सिफारिशों को किसानों तक जल्दी से जल्दी पहुंचाया जाएगा ।
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इन सिफारिशों को मिली मंजूरी
हकृवि की सरसों की पहली हाइब्रिड किस्म आरएचएच 2101 को जम्मू, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली एवं उत्तरी राजस्थान में सिंचित एरिया के लिए अनुमोदित किया है। यह किस्म 135-142 दिनों में पककर तैयार होती है तथा प्रति एकड़ 11.5 से 12.0 क्विंटल तक उपज देती है।
सीओएच 179 गन्ने की मध्यम-पछेती पकने वाली किस्म को अनुमोदित किया है। इसमें खांड अंश 18.50 प्रतिशत है। यह बसंतकालीन बुवाई के लिए उपयुक्त है, इसकी मोढ़ी अच्छी होती है तथा यह न गिरने वाली किस्म है। इसकी औसत पैदावार 450 क्विंटल प्रति एकड़ है। यह लाल सडऩ एवं अन्य प्रमुख रोगों के प्रति मध्यम प्रतिरोधी तथा प्रमुख कीटों के प्रति कम संवेदनशील है।
‘हरियाणा के भूजल गुणवत्ता मानचित्र’ के संशोधन एवं अद्यतनीकरण की सिफारिश की गई है, जिसमें हरियाणा में भूमिगत खारे जल के सही उपयोग एवं प्रबंधन को शामिल किया गया है।
गेहूं की फसल में 6-7 डेसी सीमन प्रति मीटर विद्युत चालकता वाले लवणीय सिंचाई जल की स्थिति में एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन लाभदायक है। इसके लिए सबसे पहले बीज को 100 मिलीलीटर एचएयू बायोमिक्स प्रति 10 किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करें तथा प्रति एकड़ 4 टन गोबर की खाद और 75 प्रतिशत अनुशंसित उर्वरक मात्रा डालें। इससे अनुशंसित उर्वरक मात्रा के बराबर पैदावार प्राप्त होती है और मिट्टी की उर्वरता भी बेहतर होती है।
सरसों में फॉस्फोरस की पूर्ति के लिए डीएपी का प्रयोग करने की स्थिति में 2 कट्टे (100 किलोग्राम) जिप्सम प्रति एकड़ की वर्तमान सिफारिश के विकल्प के रूप में 12 किलोग्राम बेंटोनाइट सल्फर प्रति एकड़ बुवाई से पूर्व प्रयोग करने की सिफारिश की गई है।
चारा फसल जई की अधिक पैदावार हेतु बीज को बुवाई से पहले प्रति एकड़ 150 मिली लीटर एचएयू एनपीके बायोफर्टिलाइजर से उपचारित करने की सिफारिश की गई है।
गेहूँ के बीजों के टीकाकरण हेतु 10 किलोग्राम बीज के लिए 100 मिलीलीटर तरल बायोफर्टिलाइजर कंसोर्टियम एचएयू एजोटिका प्लस-ई का प्रयोग करने की सिफारिश की गई है। इसमें एंडोफाइट-प्स्यूडोमोनास एडब्ल्यू-5, एज़ोटोबैक्टर तथा पीएसबी शामिल हैं।
बसंतकालीन गन्ने की फसल में 90 सेंटीमीटर कतार दूरी अपनाने की सिफारिश की गई है। इससे अधिक गन्ना उपज मिलेगी। इस परिस्थिति में बीज दर 30-35 क्विंटल प्रति एकड़ रहेगी।
गन्ने की पौध फसल के लिए 75-25-25 किलोग्राम एनपीके प्रति एकड़ उर्वरक की मात्रा डालने की सिफारिश की गई है।
सिंचित अवस्था में राया की बुवाई कतारों में 45 सेंटीमीटर के फासले पर करने की सिफारिश की गई है। राया एवं सरसों की फसल के लिए प्रति एकड़ एक किलोग्राम बीज की सिफारिश की गई।
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