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Balod News: कलेक्ट्रेट परिसर में आदिवासी समाज ने जलाया चूल्हा, देव स्थल से छेड़छाड़ का विरोध
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में कानून व्यवस्था को चुनौती देती एक अभूतपूर्व घटना सामने आई है। सर्व आदिवासी समाज ने डौंडीलोहारा विकासखंड के तुएगोंदी में अवैध अतिक्रमण और आदिवासी देव स्थल से छेड़छाड़ के मामले पर कलेक्ट्रेट का उग्र घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बैरिकेडिंग तोड़कर कलेक्ट्रेट परिसर में प्रवेश किया और भीतर ही पंडाल लगाकर भाषणबाजी की।
प्रदर्शनकारी सीधे कलेक्टर से मिलने की मांग पर अड़े थे। शाम तक कलेक्टर के न पहुंचने पर आदिवासी समाज की महिलाओं और पुरुषों ने परिसर के भीतर चूल्हा जलाकर खाना बनाना शुरू कर दिया। चूल्हा जलते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया और विवाद बढ़ गया। एक पुलिस निरीक्षक ने जलते चूल्हे में पानी डाल दिया, जिससे स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। आक्रोशित महिलाओं और समाज के लोगों की पुलिसकर्मियों से तीखी झड़प हुई। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की लाठियां तक खींच लीं। स्थिति को काबू करने के लिए बालोद पुलिस ने पहली बार वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। कलेक्ट्रेट परिसर में देर रात तक तनाव बना रहा और भारी पुलिस बल तैनात रहा।
विवाद की जड़
विवाद डौंडीलोहारा ब्लॉक के ग्राम तुएगोंदी से जुड़ा है। ग्रामीणों का आरोप है कि रिजर्व फॉरेस्ट एरिया में अवैध कब्जा, खनन और निर्माण हो रहा है। धार्मिक गतिविधियों की आड़ में आदिवासी आस्था के पवित्र स्थलों को क्षति पहुंचाई जा रही है। समाज का कहना है कि पेसा कानून के विरोध के बावजूद निर्माण जारी हैं, जो संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।
बाबा बालक दास पर आरोप
सर्व आदिवासी समाज का गुस्सा तथाकथित संत बाबा बालक दास के खिलाफ है। समाज के अध्यक्ष तुकाराम कोर्राम ने बताया कि वे वर्ष 2019 से शिकायतें कर रहे हैं। उनका आरोप है कि बाबा बालक दास ने रिजर्व फॉरेस्ट की जमीन पर 1 करोड़ 25 लाख रुपये का अवैध निर्माण कराया है। बाबा के खिलाफ एट्रोसिटी एक्ट के तहत मामला दर्ज होने पर भी गिरफ्तारी नहीं हुई है। समाज ने बाबा की गिरफ्तारी तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी है।
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