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Muzaffarnagar: सोरम चौपाल में सर्वखाप की ऐतिहासिक जुटान, 1857 की यादें फिर ताजा
मुज़फ्फरनगर के सोरम गाँव की ऐतिहासिक चौपाल आज भी अपनी अद्भुत विरासत के लिए जानी जाती है। मुगल काल से लेकर आज़ादी की लड़ाई तक, सर्वखाप के तमाम महत्वपूर्ण फैसले इसी चौपाल से लिए गए, जिनका प्रभाव दूर-दूर तक देखा गया। कहा जाता है कि चौपाल पर लिया गया निर्णय पत्थर की लकीर माना जाता था। इसी स्थान से 1857 की क्रांति का बिगुल भी फूंका गया था, जिसने स्वतंत्रता आंदोलन की दिशा बदल दी थी।
सोरम में 15 साल बाद आयोजित सर्वखाप महापंचायत में आए लोगों ने इस ऐतिहासिक धरोहर का दर्शन किया और अपने पूर्वजों की स्मृतियों को याद किया। बुजुर्गों ने बताया कि चौपाल सिर्फ निर्णय लेने का स्थान नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और न्याय का प्रतीक रही है। महापंचायत में विभिन्न प्रदेशों से पहुंचे लोगों ने भी इस स्थल की ऐतिहासिकता को महसूस किया और बताया कि यह पीढ़ियों को जोड़ने वाला केंद्र है।
आज भी सोरम की यह चौपाल लोगों के लिए गर्व और संघर्ष की विरासत है, जो उन्हें अपने इतिहास और परंपराओं से जोड़ती है।
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