Rajasthan News: सवाई माधोपुर के रणथंभौर टाइगर रिजर्व की फलौदी रेंज के गांवों में दहशत का पर्याय बने लेपर्ड को आखिरकार वन विभाग ने पिंजरे में कैद कर लिया है। यही वह लेपर्ड बताया जा रहा है, जिसने बीते गुरुवार रात दुमोदा गांव में घर के आंगन से तीन साल के मासूम दिलखुश बैरवा को अपना शिकार बना लिया था। लेपर्ड के पकड़े जाने के बाद ग्रामीणों और वन विभाग ने राहत की सांस ली है।
दरअसल, गुरुवार रात दुमोदा गांव में परिवार के बीच आंगन में खेल रहे तीन साल के मासूम दिलखुश को लेपर्ड घर की दहलीज से उठा ले गया था। बाद में गांव के नजदीक पहाड़ी पर झाड़ियों में बच्चे का शव मिला था। घटना के बाद ग्रामीणों में वन विभाग के खिलाफ खासा आक्रोश देखने को मिला था और ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया था।
40 से ज्यादा कैमरे और केज ट्रैप, 24 घंटे चला ऑपरेशन
पुलिस और वन विभाग के अधिकारियों की समझाइश तथा ग्रामीणों की मांगों पर सहमति बनने के बाद मामला शांत हुआ। इसके बाद वन विभाग ने हमलावर लेपर्ड को पकड़ने के लिए अभियान तेज कर दिया। दुमोदा, कैलाशपुरी और आसपास के क्षेत्रों में 40 से ज्यादा कैमरा ट्रैप और केज ट्रैप लगाए गए। रेस्क्यू टीम को भी 24 घंटे तैनात रखा गया।
कई दिनों की निगरानी के बाद पिंजरे में फंसा लेपर्ड
लगातार निगरानी और कई दिनों की मेहनत के बाद आखिरकार लेपर्ड वन विभाग के पिंजरे में कैद हो गया। लेपर्ड के पकड़े जाने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी राहत महसूस की है।
चार बहनों का इकलौता भाई था दिलखुश
तीन साल का दिलखुश चार बहनों के बीच इकलौता भाई था। परिवार ने देवी-देवताओं की मन्नतों के बाद चार बेटियों के बाद दिलखुश को पाया था। लेकिन रक्षाबंधन से महज आठ दिन पहले लेपर्ड के हमले ने परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया। भाई की कलाई पर राखी बांधने का सपना संजोए बैठी चारों बहनों का सपना भी टूट गया।
अधिकारियों की टीम ने संभाला मोर्चा
रणथंभौर के डीएफओ मानस सिंह के मुताबिक, फलौदी रेंज के दुमोदा और कैलाशपुरी गांवों में लेपर्ड की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए लगातार निगरानी और रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा था। विभाग की सतर्कता और अथक प्रयासों के चलते लेपर्ड को सुरक्षित रूप से पकड़ लिया गया।
पीड़ित परिवार से मिले DFO, सुरक्षा का दिया भरोसा
डीएफओ मानस सिंह ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी और हरसंभव सहयोग एवं सुरक्षा का भरोसा दिलाया। वहीं ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय कर पूरे क्षेत्र में निगरानी व्यवस्था भी मजबूत की गई है।
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फिलहाल लेपर्ड के पिंजरे में कैद होने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है, लेकिन रणथंभौर से सटे गांवों में लगातार बढ़ रही लेपर्ड की दस्तक वन विभाग के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। विभाग ने ग्रामीणों से सतर्क रहने और वन विभाग के साथ सहयोग बनाए रखने की अपील की है।