अलवर के प्रभारी मंत्री किरोड़ी लाल मीणा पूरी फॉर्म में आ गए है। वे जिस अंदाज में वे एक्शन ले रहे हैं उससे जिला प्रशासन, भूमाफिया और साइबर क्राइम करने वाले भी परेशानी में आ गए हैं। मीणा पहले अपने इस्तीफे को लेकर और फिर फोन टैपिंग को लेकर भी चर्चा में रहे हैं। सरकार को घेरे रहे, लेकिन अब उन्होंने एक्शन में आकर फिर से प्रशासन और सरकार के लिए दिक्कतें खड़ी कर दी हैं।अलवर में दो दिन पहले साइबर अपराधियों पर नकेल कसने वाले डॉ. किरोड़ी लाल मीणा गुरुवार शाम को अचानक यूआईटी पहुंचे और अफसरों की क्लास ले ली। उन्होंने बाद में कहा कि अलवर में भूमाफिया बेखौफ हो रहे हैं और अफसर और कर्मचारी दबाव में हैं।
कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा गुरुवार शाम को अचानक अलवर यूआईटी सचिव के चैंबर में पहुंच गए। सचिव तो दफ्तर में नहीं मिलीं, लेकिन डॉ. किरोड़ी ने अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को बुलाया और उनके जवाब लिए कि अलवर में भूमाफिया कितनी जगह सरकारी जमीनों पर कब्जे करके बैठा है। कहां कितना विकास हुआ है। अतिक्रमण के मामले क्यों दबा दिए जाते हैं। अफसरों से बड़े बिल्डरों के अवैध कब्जों की जानकारी ली। इसके अलावा खुद की ओर से भेजी गई शिकायतों पर लिए गए एक्शन की जानकारी ली।
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प्रशासन के अधिकारी दबाव में
डॉ. किरोड़ी ने कहा कि पिछली बार अलवर आया तो अलवर के लोगों ने शिकायत की थी कि भूमाफिया कई जगह कब्जे करके बैठ गए हैं। भूमाफिया बेखौफ हैं। प्रशासन के अधिकारी दबाव में होने के कारण एक्शन नहीं ले पा रहे हैं। वे यहां मीटिंग के दौरान बातचीत में पता चला कि यूआईटी हेल्पलेस हो गई है, अधिकारी अच्छे हैं। एक दिन पहले बड़ा अतिक्रमण हटाया है। कहीं अन्य जगह हैं, वहां भी अतिक्रमण हटाया जाना चाहिए। यूआईटी में शाम को औचक निरीक्षण करने पहुंचे डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने जब अतिक्रमण, अवैध निर्माण और अवैध कब्जों के बारे में अधिकारियों से सवाल पूछे तो वे एक दूसरे की तरफ देखने लगे और बगल झांकने लगे।
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अधिकारियों और कर्मचारियों की लगी क्लास
निरीक्षण के दौरान यूआईटी सचिव तो नहीं मिली, लेकिन बाकी अधिकारियों और कर्मचारियों कि उन्होंने जमकर क्लास लगाई। मंत्री ने जब अततिक्रमन संबंधी मामलों में कार्रवाई नहीं होने का कारण पूछा तो अतीक्रमण निरोधक अधिकारी ने पुलिस जब्त नहीं मिलने की बात कही। उन्होंने कई प्रश्नों के जवाब नहीं मिलने पर सारे प्रश्न अधिकारियों को नोट करवाये ओर जल्द जानकारी देने के लिए निर्देशित कर दिया। उन्होंने कहा कि यूआईटी का निरीक्षण करने आये थे, लेकिन सचिव नहीं मिलीं। वे दोबारा आकर विभागीय बैठक लेंगे। इस दौरान एडीएम प्रथम मुकेश कायथवाल मौजूद थे। उन्होंने कहा कि यूआईटी की टीम अच्छी है, लेकिन कर्मचारी हेल्पलेस लगे। उन्होंने मंदिर माफी की जमीनों पर हो रहे अवैध कब्जों सिहित सभी अतिक्रमणों के खिलाफ कार्रवई की बात भी मजबूती से रखी।