प्रदेश भाजपा की कोर कमेटी की बैठक में हुई चर्चाओं के सार्वजनिक होने का मुद्दा अब गोपनीयता और अनुशासन से जुड़ गया है। डिप्टी मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने बैठक की गोपनीयता को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि जो बातें लीक करेगा, उसे बैठने लायक नहीं छोड़ेंगे। उनके इस बयान को बंद कमरे में होने वाली बैठकों की जानकारी बाहर आने पर कड़ी नाराजगी के तौर पर देखा जा रहा है।
दरअसल बीते दिनों मध्यप्रदेश भाजपा की कोर कमेटी की बैठक में हुई चर्चाओं के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल मची थी। बैठक में नेताओं के बीच अधिकारियों के रवैये, प्रोटोकॉल और नाराजगी जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की खबरें सामने आई थीं। अब बैठक की गोपनीयता को लेकर राजेंद्र शुक्ला के सख्त बयान ने इस पूरे घटनाक्रम को फिर चर्चा में ला दिया है।
अधिकारियों की नहीं सुनते अफसर
कोर कमेटी की बैठक को लेकर सामने आई खबरों में दावा किया गया था कि राजेंद्र शुक्ला ने अधिकारियों द्वारा उनकी बात नहीं सुने जाने का मुद्दा उठाया था। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा उन्हें खरी-खोटी सुनाए जाने की चर्चा भी हुई थी। हालांकि बैठक के भीतर हुई बातचीत की स्वतंत्र पुष्टि के बिना इन दावों को अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता।
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शिवराज सिंह के प्रोटोकॉल का मुद्दा
बैठक को लेकर सामने आई चर्चाओं में पूर्व मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की नाराजगी का मुद्दा भी शामिल था। बताया गया था कि उन्होंने प्रोटोकॉल नहीं मिलने को लेकर अपनी बात रखी थी। वहीं वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की नाराजगी की खबरों ने भी राजनीतिक चर्चाओं को हवा दी थी। इन तमाम चर्चाओं के बीच अब राजेंद्र शुक्ला का गोपनीयता को लेकर दिया गया बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके बयान से साफ संकेत मिलता है कि बैठक के भीतर होने वाली बातचीत को सार्वजनिक किए जाने का मुद्दा उनके लिए गंभीर है।
बंद कमरे की बातें बाहर कैसे आईं?
राजनीतिक बैठकों में संगठन और सरकार से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा होती है। ऐसे में बैठक के भीतर की बातें बाहर आने पर नेताओं के बीच असहजता पैदा होना स्वाभाविक है। लेकिन यहां सवाल यह भी है कि आखिर कोर कमेटी की बैठक में हुई चर्चाएं सार्वजनिक कैसे हुईं और क्या पार्टी स्तर पर इस मामले में कोई कार्रवाई होगी? फिलहाल राजेंद्र शुक्ला के बयान के बाद कोर कमेटी की बैठक की गोपनीयता का मुद्दा चर्चा में है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि भाजपा संगठन इस मामले में कोई कदम उठाता है या यह विवाद बयानबाजी और राजनीतिक चर्चाओं तक ही सीमित रहता है।