ईद-ए-मिलादुन्नबी के मौके पर थांदला में निकला जुलूस उस वक्त इंसानियत की मिसाल बन गया, जब जुलूस के बीच एक मरीज को लेकर एंबुलेंस पहुंची। सैकड़ों की भीड़ और धार्मिक उत्साह के बीच जैसे ही लोगों को पता चला कि एंबुलेंस में मरीज है, पूरा जुलूस कुछ पल के लिए थम गया। जुलूस में शामिल समाजजनों ने तत्काल रास्ता खाली कराया और एंबुलेंस को सुरक्षित निकलने के लिए जगह दी।
बुधवार को थांदला नगर में ईद मिलादुन्नबी का जुलूस पूरे उत्साह और धार्मिक आस्था के साथ निकाला जा रहा था। जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल थे। जगह-जगह नात-ए-पाक की सदाएं गूंज रही थीं और लोग उत्साह के साथ जुलूस में आगे बढ़ रहे थे। इसी दौरान जुलूस के बीच अचानक एंबुलेंस पहुंची। सामान्य परिस्थितियों में इतनी बड़ी भीड़ के बीच एंबुलेंस को रास्ता मिलना मुश्किल हो सकता था, लेकिन यहां नजारा कुछ अलग ही देखने को मिला।
एंबुलेंस में मरीज होने की जानकारी मिलते ही जुलूस में शामिल समाज के लोगों ने बिना किसी देरी के मोर्चा संभाल लिया। लोगों को एक तरफ किया गया और देखते ही देखते एंबुलेंस के लिए रास्ता बना दिया गया। जुलूस में शामिल सैकड़ों लोग खुद पीछे हटकर खड़े हो गए। खास बात यह रही कि एंबुलेंस के निकलने तक किसी तरह की अफरा-तफरी नहीं हुई और पूरा जुलूस अनुशासन के साथ शांत रहा। एंबुलेंस के गुजरने तक लोगों की नजरें उसी ओर टिकी रहीं। जैसे ही मरीज को लेकर एंबुलेंस आगे बढ़ी, लोगों ने राहत की सांस ली। इसके बाद जुलूस फिर उसी उत्साह के साथ आगे बढ़ा और नात-ए-पाक की सदाओं के बीच धार्मिक कार्यक्रम जारी रहा।
ये भी पढ़ें- दमोह: 40 साल से सड़क का इंतजार, कीचड़ से निकलकर स्कूल जाने को मजबूर नौनिहाल, खाट पर अस्पताल पहुंचते हैं मरीज
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है। वीडियो में बड़ी संख्या में लोग जुलूस को रोककर एंबुलेंस के लिए रास्ता बनाते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद लोग मुस्लिम समाज के इस कदम की जमकर तारीफ कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि यह केवल एंबुलेंस को रास्ता देने की घटना नहीं, बल्कि समाज को इंसानियत और भाईचारे का संदेश देने वाला दृश्य है।
धार्मिक आयोजनों में अक्सर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ती है, लेकिन ऐसे समय में किसी मरीज को प्राथमिकता देना सामाजिक संवेदनशीलता का परिचय है। थांदला में सामने आया यह दृश्य बताता है कि धर्म के साथ इंसानियत का भाव जुड़ जाए तो समाज में भाईचारे की तस्वीर और भी खूबसूरत हो जाती है। ईद-ए-मिलादुन्नबी के मौके पर मुस्लिम समाज ने अपने आचरण से यही संदेश दिया कि खुशियां मनाना जरूरी है, लेकिन किसी जरूरतमंद की जिंदगी बचाने के लिए एक पल रुक जाना उससे भी ज्यादा जरूरी है। थांदला की यह तस्वीर निश्चित रूप से सामाजिक सौहार्द और इंसानियत की भावना को मजबूत करने वाली है।