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दमोह: 40 साल से सड़क का इंतजार, कीचड़ से निकलकर स्कूल जाने को मजबूर नौनिहाल, खाट पर अस्पताल पहुंचते हैं मरीज
Thu, 27 Aug 2026 02:53 PM IST
दमोह ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
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Published by: दमोह ब्यूरो
Updated Thu, 27 Aug 2026 02:53 PM IST
सार
हटा के पास बोरी और बोरी कला गांव में सड़क की 40 साल पुरानी समस्या अब भी जस की तस है। बारिश में 3 से 4 किलोमीटर का रास्ता दलदल में बदल जाता है, जिससे बच्चे कीचड़ में चलकर स्कूल पहुंचते हैं और मरीजों को खाट पर मुख्य मार्ग तक ले जाना पड़ता है।
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कीचड़ में से होकर स्कूल जाने को मजबूर बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जिले के हटा तहसील मुख्यालय से महज चार किलोमीटर दूर स्थित बोरी और बोरी कला गांव के ग्रामीण पिछले करीब 40 साल से पक्की सड़क की राह देख रहे हैं। हटा-पटेरा मुख्य मार्ग से गांवों को जोड़ने वाला कच्चा रास्ता बारिश होते ही कीचड़ और दलदल में बदल जाता है। इससे स्कूली बच्चों, मरीजों, बुजुर्गों और रोजमर्रा के काम से आने-जाने वाले ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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कीचड़ में धंस जाते हैं बच्चों के पैर
बारिश के बाद रास्ते पर जगह-जगह पानी और कीचड़ जमा हो गया है। ग्रामीणों के मुताबिक कई जगह हालात इतने खराब हैं कि बच्चों के पैर करीब दो इंच तक कीचड़ में धंस जाते हैं। जूते पहनकर चलना मुश्किल होने के कारण बच्चे जूते-चप्पल हाथ में लेकर रास्ता पार करते हैं और स्कूल के पास पहुंचकर उन्हें पहनते हैं। कक्षा 11वीं की छात्रा रानी कुशवाहा ने बताया कि स्कूल जाते समय रास्ते कीचड़ से यूनिफॉर्म गंदी हो जाती है। गंदी यूनिफॉर्म में स्कूल पहुंचने पर शिक्षकों से डांट भी सुननी पड़ती है। कई बार रास्ते की खराब स्थिति के कारण स्कूल पहुंचने में देरी हो जाती है।
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रानी का कहना है कि उन्होंने गांव में आज तक पक्की सड़क नहीं देखी। बारिश के दिनों में स्कूल जाना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। उन्होंने प्रशासन से गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाली पक्की सड़क का निर्माण कराने की मांग की है ताकि बच्चों को रोज होने वाली परेशानी से राहत मिल सके।
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मरीजों को खाट पर लेकर पहुंचते हैं मुख्य मार्ग तक
सड़क की बदहाली का असर सिर्फ बच्चों की पढ़ाई पर नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच पर भी पड़ रहा है। ग्रामीण महिला ममता कुशवाहा के अनुसार बारिश में रास्ता इतना खराब हो जाता है कि बीमार व्यक्ति को खाट पर लिटाकर मुख्य मार्ग तक ले जाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस भी गांव के अंदर तक नहीं पहुंच पाती। ऐसे में परिजन मरीज को किसी तरह मुख्य सड़क तक पहुंचाते हैं और वहां से वाहन की व्यवस्था करनी पड़ती है।
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रोजमर्रा की जरूरतें भी हुईं मुश्किल
ग्रामीणों के मुताबिक सड़क खराब होने से सामान्य जीवन भी प्रभावित हो रहा है। ममता कुशवाहा ने बताया कि बारिश के दौरान रास्ते की हालत इतनी खराब हो जाती है कि जरूरी कामों के लिए भी बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। घर में आटा खत्म हो जाए तो गेहूं पिसाने के लिए भी कई बार दो दिन तक इंतजार करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बारिश में यही स्थिति बनती है लेकिन सड़क निर्माण की समस्या का अब तक स्थायी समाधान नहीं हुआ।
40 साल से सड़क निर्माण का इंतजार
ग्रामीण परमलाल कुशवाहा ने बताया कि करीब 40 साल से गांव में पक्की सड़क नहीं बनी है। बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी होती है और बारिश में उनकी यूनिफॉर्म खराब हो जाती है। ग्रामीणों ने कई बार सरपंच और संबंधित अधिकारियों से सड़क निर्माण की मांग की लेकिन अब तक उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला है।
ग्रामीणों के अनुसार यह रास्ता केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि स्कूल, अस्पताल, बाजार और मुख्य मार्ग तक पहुंचने का प्रमुख जरिया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से हटा-पटेरा मुख्य मार्ग से बोरी और बोरी कला को जोड़ने वाले रास्ते का स्थायी निर्माण कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के मौसम में बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों की परेशानी को देखते हुए सड़क निर्माण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
एसडीएम बोले- पहले वैकल्पिक व्यवस्था करेंगे
हटा एसडीएम राकेश कुसरे ने कहा कि ग्रामीणों की समस्या को देखते हुए फिलहाल रास्ते पर वैकल्पिक व्यवस्था कराने के प्रयास किए जाएंगे। इसके बाद पक्की सड़क के निर्माण की दिशा में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीणों को अब उम्मीद है कि प्रशासन का यह आश्वासन धरातल पर भी दिखाई देगा और चार दशक पुरानी सड़क की समस्या का स्थायी समाधान हो सकेगा।
