दतिया जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता भर्ती प्रक्रिया के दौरान बड़ी अनियमितता सामने आई है। जांच समिति ने दस्तावेजों की पड़ताल के बाद 17 आवेदनों को निरस्त कर दिया है। इन सभी आवेदनों में प्रस्तुत अंकसूचियों को संदिग्ध और प्रथमदृष्टया फर्जी पाया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने आगे की कार्रवाई के लिए दस्तावेज पुलिस को सौंप दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पदों पर भर्ती के लिए प्राप्त आवेदनों की जांच के दौरान समिति को कुछ अभ्यर्थियों की अंकसूचियों में गड़बड़ी की आशंका हुई। विस्तृत परीक्षण और संबंधित बोर्ड/संस्था से मिलान कराने पर 17 अभ्यर्थियों द्वारा प्रस्तुत अंकसूचियां सत्यापन में सही नहीं पाई गईं। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि अंकपत्रों में अंकों की हेराफेरी या दस्तावेजों की प्रमाणिकता संदिग्ध है।
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इस खुलासे के बाद मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) जिला पंचायत ने तत्काल प्रभाव से संबंधित 17 आवेदनों को निरस्त करने के आदेश जारी किए। साथ ही पूरे प्रकरण की प्रतिलिपि और दस्तावेज पुलिस विभाग को सौंपे गए हैं, ताकि फर्जी दस्तावेज तैयार करने या प्रस्तुत करने के मामले में वैधानिक कार्रवाई की जा सके। प्रशासन का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जिला पंचायत कार्यालय के अनुसार, जिन आवेदकों के आवेदन निरस्त किए गए हैं, उन्हें अंतिम सुनवाई का अवसर भी दिया जाएगा। इसके लिए 10 मार्च की तिथि निर्धारित की गई है। संबंधित अभ्यर्थियों को निर्देशित किया गया है कि वे निर्धारित तिथि पर उपस्थित होकर अपने पक्ष में प्रमाण प्रस्तुत करें। यदि वे वैध दस्तावेज पेश करने में असफल रहते हैं, तो उनके विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी। इस कार्रवाई के बाद भर्ती प्रक्रिया में शामिल अन्य अभ्यर्थियों में भी सतर्कता बढ़ी है। प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी सभी आवेदनों का कड़ाई से सत्यापन किया जाएगा। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की नियुक्ति ग्रामीण स्तर पर महिलाओं और बच्चों के पोषण एवं विकास से सीधे जुड़ी होती है, ऐसे में चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और ईमानदारी अत्यंत आवश्यक है। फर्जी दस्तावेजों के जरिए नियुक्ति पाने की कोशिश न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है। फिलहाल मामला पुलिस जांच के अधीन है और 10 मार्च की सुनवाई के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी। प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।