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रामपुर में आरएसएस का पथ संचलन, सत्यनारायण मंदिर के पास महिलाओं ने की पुष्पवर्षा
Ankesh Dogra
Updated Tue, 20 Oct 2026 03:12 PM IST
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की रामपुर नगर इकाई की ओर से मंगलवार को विजयदशमी पर्व और संघ का 101वां स्थापना दिवस उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर सैकड़ों स्वयंसेवकों ने शस्त्र पूजन किया और अनुशासित पथ संचलन निकालकर राष्ट्रभक्ति, एकता और सामाजिक समरसता का संदेश दिया। चाटी से शुरू हुआ पथ संचलन राष्ट्रीय राजमार्ग-5 से होते हुए रामपुर बाजार पहुंचा। बाजार की परिक्रमा करने के बाद संचलन सत्यनारायण मंदिर परिसर में संपन्न हुआ। मंदिर के समीप महिलाओं ने स्वयंसेवकों पर पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ चाटी में शस्त्र पूजन के साथ हुआ। इसके बाद स्वयंसेवक हाथों में दंड लेकर अनुशासित पंक्तियों में पथ संचलन पर निकले। चाटी पुल से होते हुए स्वयंसेवक मुख्य बाजार पहुंचे और वहां से सत्यनारायण मंदिर परिसर तक पहुंचे। इस दौरान विजयदशमी के महत्व, राष्ट्र के प्रति समर्पण और सामाजिक एकता का संदेश दिया गया।
सत्यनारायण मंदिर परिसर में आयोजित कार्यक्रम में संघ के प्रांत कार्यवाह डॉ. चंद्र प्रकाश ने स्वयंसेवकों को विजयदशमी के महत्व और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की पृष्ठभूमि से अवगत करवाया।
उन्होंने कहा कि शस्त्र पूजन और विजयदशमी संघ के प्रमुख उत्सवों में शामिल हैं। संघ में छह उत्सव मनाए जाते हैं, जिनमें विजयदशमी का विशेष महत्व है। यह पर्व स्वयंसेवकों को राष्ट्र के प्रति संकल्प, समर्पण और कर्तव्यभाव के साथ कार्य करने की प्रेरणा देता है।
डॉ. चंद्र प्रकाश ने बताया कि वर्ष 1925 में विजयदशमी के दिन डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी। उन्होंने कहा कि संघ के संस्थापक का ध्येय राष्ट्र को परम वैभव तक पहुंचाना था और संगठन इसी उद्देश्य को लेकर निरंतर कार्य कर रहा है।
उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न स्थानों पर पथ संचलन के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य समाज में अनुशासन, एकता और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना को मजबूत करना है।
प्रांत कार्यवाह ने कहा कि संघ समाज परिवर्तन के उद्देश्य से पंच परिवर्तन के विचार को आगे बढ़ा रहा है। इसमें सामाजिक समरसता, परिवारों में संस्कारों को मजबूत करना, स्वच्छ पर्यावरण, नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता और सेवा भाव को बढ़ावा देना शामिल है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विश्व के विभिन्न हिस्सों में अराजकता, आतंकवाद और आपसी मतभेद जैसी चुनौतियां सामने आ रही हैं। ऐसे में भारत की सनातन परंपरा के मूल्यों और विचारों के माध्यम से शांति, सद्भाव और आपसी समन्वय का मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है।
कार्यक्रम के अंत में विश्व शांति और समाज में सद्भाव की कामना की गई। विजयदशमी के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में स्वयंसेवकों ने राष्ट्र निर्माण के संकल्प को दोहराया।
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