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बिलासपुर: हवाण धर्म परिवर्तन विवाद में ग्रामीणों ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग, डीसी को सौंपा ज्ञापन
बिलासपुर जिले के घुमारवीं उपमंडल के हवाण गांव में धर्म परिवर्तन के आरोपों से जुड़े दो एफआईआर मामलों को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को ग्रामीणों ने उपायुक्त बिलासपुर को ज्ञापन सौंपकर दोनों मामलों की निष्पक्ष जांच करवाने की मांग उठाई। ग्रामीणों ने कहा कि जांच में किसी भी पक्ष के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए और पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति सामने लाई जानी चाहिए।
ग्रामीणों ने ज्ञापन की प्रतियां हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, पुलिस महानिदेशक और पुलिस अधीक्षक बिलासपुर को भी भेजी हैं। अधिवक्ता तुषार डोगरा की अगुवाई में ग्रामीणों ने गुरद्वारा चौक से उपायुक्त कार्यालय तक रैली निकाली और अपनी मांगों को लेकर प्रशासन के समक्ष पक्ष रखा।
ग्रामीणों के अनुसार, सात जून 2026 को हवाण गांव में कुछ लोग ग्रामीणों के बीच हिंदू धर्म के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक बातें कर रहे थे। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ लोगों ने इसका विरोध किया, जिसके बाद दोनों पक्षों में कहासुनी हुई। इसके बाद पुलिस ने 17 ग्रामीणों के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया।
ग्रामीणों ने ज्ञापन में कहा कि इसी घटनाक्रम से संबंधित दूसरे मामले में संदीप कुमार की शिकायत पर आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर नंबर 115/2026 दर्ज की गई। शिकायत में कथित तौर पर हिंदू धर्म छोड़कर ईसाई धर्म अपनाने के लिए पांच लाख रुपये का प्रलोभन दिए जाने का आरोप लगाया गया था। ग्रामीणों ने इस शिकायत की भी निष्पक्ष जांच की मांग की है।
ज्ञापन में ग्रामीणों ने बताया कि दोनों मामलों में संबंधित लोगों के मेडिकल करवाए गए और बयान दर्ज किए गए। इसके बाद दोनों पक्षों से जुड़े लोगों को जमानत मिल गई। ग्रामीणों के अनुसार, एफआईआर नंबर 114/2026 में 22 जुलाई को राधे श्याम, विशाल चंदेल, सूर्य चंदेल, रमाकांत शर्मा, संदीप और रविंद्र ठाकुर को गिरफ्तार किया गया।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इसके बाद मामले में एकतरफा कार्रवाई की जा रही है। उनका दावा है कि घटना के करीब 45 दिन बाद हत्या के प्रयास, एससी-एसटी एक्ट सहित अन्य धाराएं जोड़ी गईं। ग्रामीणों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें कथित तौर पर दबाव में लेने का प्रयास किया जा रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जिन लोगों पर धर्म परिवर्तन के लिए कथित रूप से उकसाने का आरोप लगाया गया है, उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही, जबकि ग्रामीणों के खिलाफ कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है। उन्होंने हिमाचल प्रदेश में लागू धर्मांतरण संबंधी कानूनी प्रावधानों के तहत भी पूरे मामले की जांच करने की मांग की।
ग्रामीणों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी समुदाय के खिलाफ कार्रवाई करवाना नहीं, बल्कि दोनों एफआईआर में सामने आए आरोपों की निष्पक्ष जांच करवाना है। उनका कहना है कि सभी आरोपों और घटनाक्रम की जांच तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर होनी चाहिए।
ज्ञापन में ग्रामीणों ने दोनों मामलों की न्यायिक और सीबीआई जांच करवाने की मांग की। इसके साथ ही हवाण गांव के लोगों को पुलिस के कथित दबाव से राहत देने और वर्तमान जांच अधिकारी को बदलकर किसी अन्य अधिकारी को जांच सौंपने की मांग भी उठाई गई।
ग्रामीणों का कहना है कि निष्पक्ष जांच से ही पूरे मामले की वास्तविकता सामने आ सकती है। इससे किसी भी पक्ष के साथ अन्याय की आशंका कम होगी और विवाद से जुड़े आरोपों की सच्चाई स्पष्ट हो सकेगी।
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