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'PM Kisan Utsav Diwas' was celebrated at NDRI Karnal, with an emphasis on the prosperity of farmers through the agriculture and dairy sectors.
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एनडीआरआई करनाल में मनाया गया पीएम किसान उत्सव दिवस, कृषि और डेयरी क्षेत्र से किसानों की समृद्धि पर दिया जोर
कृषि विज्ञान केन्द्र, राष्ट्रीय डेरी अनुसंधान संस्थान करनाल द्वारा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 24वीं किस्त जारी होने के अवसर पर ‘पीएम किसान उत्सव दिवस’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में श्री कृष्ण पाल गुर्जर, माननीय राज्य मंत्री, सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर गुजरात के बनासकांठा जिले के भीलड़ी से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश के लगभग 9 करोड़ किसानों के बैंक खातों में योजना की 24वीं किस्त हस्तांतरित की गई। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम का दो-तरफा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सीधा प्रसारण किया गया, जिसमें करनाल जिले के पुंडरक, जुंडला, कालरों, रम्भा, बुढनपुर, इंद्री एवं सरवनमाजरा सहित विभिन्न गांवों के महिला एवं पुरुष किसानों, संस्थान के वैज्ञानिकों, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों सहित लगभग 165 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
संस्थान के निदेशक डॉ. धीर सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में संस्थान की ओर से मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए संस्थान की शैक्षणिक, अनुसंधान एवं विस्तार गतिविधियों तथा राष्ट्रीय स्तर पर प्राप्त उपलब्धियों की जानकारी दी गई। इस दौरान संस्थान की उपलब्धि तथा डेरी एवं पशुपालन क्षेत्र में इसके वैज्ञानिक योगदान को रेखांकित किया गया। विशेष रूप से करन फ्रिजियन नस्ल के विकास एवं संवर्धन, ओवम पिक-अप, इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन, भ्रूण उत्पादन एवं स्थानांतरण तथा सेक्स-सॉर्टेड सीमन जैसी आधुनिक प्रजनन तकनीकों के माध्यम से पशुओं की आनुवंशिक गुणवत्ता सुधारने के प्रयासों की जानकारी दी गई। बनास डेयरी के साथ पशु प्रजनन, पशु स्वास्थ्य सेवाओं, पशु चिकित्सकों एवं किसानों के प्रशिक्षण तथा तकनीकी सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई। बनासकांठा क्षेत्र में कांकरेज नस्ल के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु क्लोनिंग तकनीक के संभावित उपयोग तथा दूध में मिलावट की पहचान के लिए पेपर-स्ट्रिप आधारित त्वरित परीक्षण तकनीक जैसे संस्थान के नवाचारों का भी उल्लेख किया गया।
मुख्य अतिथि श्री कृष्ण पाल गुर्जर ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना को किसानों को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने वाली महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि किसानों की आर्थिक मजबूती देश की कृषि व्यवस्था एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का आधार है। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। उन्होंने कृषि एवं पशुपालन को एकीकृत रूप से अपनाने, पशुओं को संतुलित पोषण उपलब्ध कराने, वैज्ञानिक प्रजनन प्रबंधन, नियमित टीकाकरण, समय पर उपचार तथा आधुनिक पशु स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक पशुपालन पद्धतियों को अपनाकर दुग्ध उत्पादन एवं पशुपालकों की आय में वृद्धि की जा सकती है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में पशुपालन क्षेत्र में डिजिटलाइजेशन, वैज्ञानिक नस्ल सुधार एवं आधुनिक प्रजनन तकनीकों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अंतर्गत गिर, साहीवाल एवं कांकरेज जैसी स्वदेशी गोवंश नस्लों तथा मुर्रा, मेहसाणा एवं जाफराबादी जैसी भैंसों की नस्लों के संरक्षण एवं संवर्धन पर बल दिया। उन्होंने भ्रूण स्थानांतरण एवं सेक्स-सॉर्टेड सीमन जैसी तकनीकों को उत्कृष्ट आनुवंशिक क्षमता वाले पशुधन के विकास में महत्वपूर्ण बताया। साथ ही खुरपका-मुंहपका रोग के नियंत्रण एवं उन्मूलन के लिए चलाए जा रहे निःशुल्क टीकाकरण कार्यक्रम का लाभ उठाने तथा पशुओं के नियमित टीकाकरण एवं स्वास्थ्य प्रबंधन को अपनाने का आह्वान किया।
प्रधानमंत्री ने अमूल एवं बनास डेयरी जैसे सफल सहकारी मॉडलों का उल्लेख करते हुए सहकारिता के माध्यम से किसानों एवं पशुपालकों को संगठित करने, उनके उत्पादों का उचित मूल्य सुनिश्चित करने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने पर जोर दिया। उन्होंने दुग्ध सहकारी संस्थाओं में महिलाओं की महत्वपूर्ण भागीदारी को रेखांकित करते हुए महिला पशुपालकों के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण में उनकी भूमिका की सराहना की। बनास डेयरी में गोबर से बायोगैस, जैव-सीएनजी एवं जैविक खाद के उत्पादन हेतु संयंत्रों की स्थापना को अपशिष्ट प्रबंधन, अतिरिक्त आय सृजन एवं पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, पीएम-कुसुम एवं राष्ट्रीय गोकुल मिशन जैसी योजनाओं के माध्यम से कृषि जोखिम कम करने, उत्पादन लागत घटाने एवं किसानों की आय बढ़ाने की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने मधुमक्खी पालन के माध्यम से ‘मीठी क्रांति’, मत्स्य पालन, बागवानी एवं कृषि विविधीकरण को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ जल एवं ऊर्जा संरक्षण तथा कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन को एकीकृत रूप से अपनाने का संदेश दिया। उन्होंने वैज्ञानिक अनुसंधान, आधुनिक तकनीकों एवं सहकारिता के समन्वय से कृषि एवं डेयरी क्षेत्र को अधिक लाभकारी, आत्मनिर्भर एवं टिकाऊ बनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के अंत में कृषि विज्ञान केन्द्र करनाल के अध्यक्ष डॉ. पंकज कुमार सरस्वत ने मुख्य अतिथि श्री कृष्ण पाल गुर्जर, संस्थान के निदेशक डॉ. धीर सिंह, वैज्ञानिकों, अधिकारियों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों एवं उपस्थित किसान भाई-बहनों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
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