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Dispute between Chairperson and councilors resolved through MLA's intervention; development work to gain momentum.
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विधायक के हस्तक्षेप से चेयरपर्सन व पार्षदों का विवाद सुलझा, विकास को मिलेगी गति
रतिया। नगरपालिका चेयरपर्सन प्रीति खन्ना और पार्षदों के बीच लंबे समय से चल रहा राजनीतिक विवाद आखिरकार विधायक जरनैल सिंह के हस्तक्षेप के बाद सुलझ गया है। दोनों पक्षों में आपसी सहमति बनने के बाद चेयरपर्सन की कुर्सी पर मंडरा रहे अविश्वास प्रस्ताव के बादल छंट गए हैं।
विधायक जरनैल सिंह ने पार्षदों और चेयरपर्सन प्रतिनिधि की संयुक्त बैठक करवाकर दोनों पक्षों के आपसी मतभेदों को दूर कराया। विधायक जरनैल सिंह ने कहा कि उन्होंने पार्षदों और चेयरपर्सन प्रतिनिधि की आपसी बैठक करवाकर दोनों के बीच चल रहे आपसी मन मुटाव को दूर करवाया है व चेयरपर्सन पक्ष ने सभी पार्षदों को साथ लेकर चलने का भरोसा दिया। विधायक ने कहा कि अब आपसी तालमेल और मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में शहर के रुके हुए विकास कार्यों को तेजी से पूरा करवाया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जल्द ही जिला उपायुक्त से मिलकर अविश्वास प्रस्ताव से जुड़ी औपचारिकताओं का विधिवत निपटारा करवा दिया जाएगा।
दो साल से चल रहा था सियासी घमासान:-
रतिया नगरपालिका में चेयरपर्सन और पार्षदों के बीच खींचतान पिछले दो सालों से जारी थी। पिछले वर्ष मई 2025 में 14 पार्षदों ने अविश्वास प्रस्ताव की मांग की थी। मामला उच्च न्यायालय तक पहुंचा और 22 मई को बैठक तय हुई। हालांकि, बैठक में केवल 11 पार्षद पहुंचे, जिससे कोरम पूरा न होने पर अविश्वास प्रस्ताव गिर गया था।
जून 2026 में दोबारा खोला मोर्चा:
2 जून को 14 पार्षदों ने उपायुक्त को दोबारा अविश्वास प्रस्ताव का ज्ञापन सौंपा। पार्षदों ने चंडीगढ़ जाकर मुख्यमंत्री से भी मुलाकात की और शहर में विकास कार्य ठप होने का आरोप लगाया।
9 जुलाई की बैठक हुई थी स्थगित:
प्रशासनिक स्तर पर 9 जुलाई को अविश्वास प्रस्ताव पर बैठक तय की गई थी, लेकिन एडीसी के अवकाश पर जाने के कारण यह स्थगित हो गई।
मुख्यमंत्री दरबार तक पहुंचा था मामला :-
विवाद का समाधान निकालने के लिए मामला दो बार मुख्यमंत्री के दरबार में पहुंचा। मुख्यमंत्री ने हांसी विधायक विनोद भयाना, विधायक जरनैल सिंह को दोनों पक्षों से समन्वय स्थापित कर मामला सुलझाने के निर्देश दिए थे।15 जुलाई को पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में हुई पहली बैठक में सहमति बनने के बावजूद प्रेस वार्ता के दौरान कुछ बिंदुओं पर बात फिर बिगड़ गई थी। इसके बाद वरिष्ठ नेताओं के लगातार प्रयासों और बैठकों के दौर के बाद विधायक जरनैल सिंह ने दोनों पक्ष गिले-शिकवे भुलाकर एक मंच पर आने का प्रयास किया, जिससे लगता है अब शहर में राजनीतिक स्थिरता का रास्ता साफ हो गया है हालांकि जब तक अविश्वास प्रस्ताव से जुड़ी औपचारिकताओं का विधिवत निपटारा नही हो जाता तब तक कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी क्योंकि राजनीति में कुछ भी संभव है।
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