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चार किस्तों में जमा करा सकते हैं बिजली बिल, लॉकडाउन के दौरान नहीं काटा जाएगा कनेक्शन

एक जून तक बिजली के बिल जमा कराने में असमर्थ रहने वाले उपभोक्ता चार मासिक किस्तों में अपने बिल जमा करा सकते हैं। पंजाब सरकार ने कोरोना संकट को देखते हुए राज्य से बिजली उपभोक्ताओं को बिजली के बिल भरने में कई तरह की राहत का एलान किया है।

प्रमुख सचिव (पॉवर) की ओर से जारी पत्र में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा गया है कि सभी घरेलू और वाणिज्यक उपभोक्ता जिनके मासिक या दो माह का बिजली बिल 10 हजार रुपये तक हैं और सभी औद्योगिक उपभोकता, जिनमें स्माल पावर, मीडियम सप्लाई और लार्ज सप्लाई शामिल हैं, की देय तिथि जो कि 20 मार्च से मई माह के अंत तक थी, को बिना लेट फीस के बढ़ाकर एक जून कर दिया गया है। 


ऐसे घरेलू, वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ता जो एक जून तक बिल जमा कराने में असमर्थ रहते हैं, उन्हें अधिकतम चार मासिक किस्तों में बिल जमा कराने का विकल्प दिया जाएगा। हालांकि इस विकल्प में किसी लेट फीस या लेट पेमेंट ब्याज की बजाए वार्षिक 10 फीसदी की दर से घटती बकाया राशि पर ब्याज लिया जाएगा। 

यह भी फैसला किया गया है कि 15 जून तक बिल न भरने की स्थिति में किसी भी नए उपभोक्ता का बिजली कनेक्शन नहीं काटा जाएगा। इसके साथ ही सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं की सिक्योरिटी (खपत) में संशोधन 31 दिसंबर 2020 तक के लिए टाल दिया गया है। बिजली विभाग लंबित पड़े सभी नए बिजली कनेक्शन भी 15 जून तक लागू कर देगा।
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मोबाइल खरीद की फाइल में आए इंटरनेशनल ब्रांड, विज ने लिखा- लेाकल को वोकल करो

हरियाणा में आशा वर्कर की कार्य प्रणाली में सुधार के लिए सरकार उन्हें मोबाइल देने पर विचार कर रही है। ऐसे में विभाग के अफसरों ने मोबाइल खरीद के लिए लंबी चौड़ी फाइल मोबाइल कंपनियों के प्रजेंटेशन के साथ लगाकर स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के पास भेज दी। मोबाइल खरीद की भनक लगते ही मोबाइल कंपनियां भी सक्रिय हो गईं, जिसमें कई विदेशी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने स्वास्थ्य मंत्री के दफ्तर के चक्कर काटने शुरू कर दिए।

ऐसे में अनिल विज ने फाइल पर लिख दिया है कि पीएम हैज सैड बी वोकल फार लोकल। देयरफोर प्रेफरेंस शुड भी गिवेन टू द इंडियन मेड प्रोडक्ट। आशा वर्कर्स को मोबाइल इसलिए दिए जा रहे हैं कि वे जो भी एक्टिविटी करें उसका कंप्यूटर के साथ लिंक हो और सरकार को पता चले कि कहां एक्टिविटी की है और कहां नहीं की है। 


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वर्तमान में जो भी काम आशा वर्कर करती हैं। वह उनकी सुपरवाइजर को बताती हैं और मामला कागजों में ही रह जाता है। मोबाइल देने से यह होगा कि सरकार को कंप्यूटर देखकर यह पता चल जाएगा कि क्या काम हुआ। मसलन दवा देने और टीकाकरण का कैंपेन है। आशा वर्कर जाएंगी तो उसकी लोकेशन भी आएगी। क्या दवा दी है वह भी बताना होगा। इनको पेमेंट भी काम के हिसाब से मिलती है। उसी हिसाब से इनके बिल बनेंगे।
मैं तो लिखता रहता हूं आशा वर्कर के लिए बहुत बड़ी संख्या में मोबाइल खरीद रहे हैं। फाइल साइन होने के लिए आई थी नेशनल इंटरनेशनल कई कंपनियों ने आवेदन किया था। मैने फाइल देखने के बाद ही अपनी टिप्पणी लिखी है। चूंकि प्रधानमंत्री महोदय ने लोकल को वेाकल करने के लिए कहा है। ऐसे में उनके आदेशों का पालन होना भी जरूरी है। अनिल विज, गृह मंत्री हरियाणा
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पढ़ें- क्या है महेंद्रगढ़-देहरादून फॉल्ट लाइन, जिस वजह से आते हैं भूकंप, आगे भी रहें तैयार

दिल्ली एनसीआर सहित आधा रोहतक जिला खतरनाक जोन-4 में शामिल है। विशेषज्ञों के अनुसार इस क्षेत्र में भूकंप आते रहते हैं। इसलिए रोहतक जिलावासियों को भी भविष्य में भूकंप के झटके सहने को तैयार रहना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार गांव चुलियाणा में भूकंप जिस केंद्र पर आया उस फॉल्ट लाइन को महेंद्रगढ़-देहरादून फॉल्ट कहा जाता है।

भूवैज्ञानिकों के मुताबिक महेंद्रगढ़-दूहरादून फॉल्ट जमीन के अंदर है। इसकी सतह से गहराई करीब एक किलोमीटर है। राष्ट्रीय भूकंप केंद्र के मुताबिक शुक्रवार को आए भूकंप का केंद्र रोहतक शहर से 15 किलोमीटर दूर चुलियाणा एरिया रहा। ये एरिया उसी फॉल्ट एरिया में आता है।


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गौरतलब है कि शुक्रवार की रात 9:08 बजे 4.5 की तीव्रता का भूकंप आया था। इसके 58 मिनट बाद ही 2.9 की तीव्रता से दूसरी पर भूकंप के झटके महसूस किया गया। शनिवार को जिला प्रशासन व आपदा विभाग की टीम जांच में जुटी रही। लेकिन कहीं कोई जान माल का नुकसान नहीं पाया गया। 

इन जिलों से गुजरती है फॉल्ट लाइन 
महेंद्रगढ़-देहरादून फॉल्ट लाइन हरियाणा के महेंद्रगढ़ से शुरू होकर झज्जर, रोहतक, सोनीपत, पानीपत होती हुई देहरादून में हिमालय के नीचे चली जाती है। हिमालय से जुड़े होने की वजह से फॉल्ट में हलचल बनी रहती है। इस फॉल्ट लाइन पर छोटे-छोटे भूकंप आते रहते हैं। 
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अनलॉक-1 : कल से रात 9 से सुबह 5 बजे तक ही कर्फ्यू, आठ जून से सभी मॉल व धार्मिक स्थल खुलेंगे

64 दिनों के लॉकडाउन के बाद चंडीगढ़ को धीरे-धीरे पूरी तरह से खोलने की तैयारी हो गई है। शनिवार शाम केंद्र सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों को चंडीगढ़ में लागू किया जाएगा। इसके अनुसार, 8 जून के बाद होटल, रेस्टोरेंट, एलांते मॉल जैसे शॉपिंग मॉल और धार्मिक स्थल शर्तों के साथ खुल जाएंगे। हालांकि स्कूल-कॉलेज जुलाई तक बंद रहेंगे। वहीं, अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू करने और सिनेमा हॉल खोलने पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है।

जानकारी के अनुसार, सोमवार को प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने अधिकारियों की बैठक बुलाई है, जिसमें शहरवासियों को और कौन सी छूट दी जा सकती है, इस पर आखिरी फैसला लिया जाएगा। लॉकडाउन को आगे बढ़ाने की जगह इस बार इसे केंद्र सरकार ने अनलॉक-1 का नाम दिया है, जो 30 जून तक लागू रहेगा। केंद्र सरकार ने अनलॉक के लिए तीन चरणों की योजना बनाई है। पहले चरण के तहत शहर में सार्वजनिक स्थल, धार्मिक स्थान, होटल, रेस्तरां और अन्य आतिथ्य सेवाएं और शॉपिंग मॉल को 8 जून से खोलने की अनुमति दी जाएगी। 


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हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से आने वाले दिनों में इन्हें खोलने से संबंधित शर्तें जारी की जाएंगी। दूसरे चरण में स्कूल, कॉलेज, शैक्षणिक, प्रशिक्षण, कोचिंग संस्थान आदि को जुलाई में राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों से बातचीत के बाद खोला जाएगा। तीसरे चरण में अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा, सिनेमा हॉल, जिम, स्वीमिंग पूल, मनोरंजन पार्क आदि को खोला जाएगा, हालांकि इसके लिए अभी कोई तिथि निर्धारित नहीं की गई है। इसके अलावा शहर में सैलून को खोलने पर सोमवार को फैसला लिया जाएगा।
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चंडीगढ़। चंडीगढ़।

भीख मांगकर समाजसेवा करते हैं राजू, पीएम मोदी भी मुरीद, मन की बात में किया जिक्र

प्रधानमंत्री मोदी ने आज (31 मई) मन की बात में राजू नाम के शख्स का जिक्र किया। राजू इससे पहले भी अपने काम की वजह से चर्चा में रहे हैं। राजू ने कोरोना काल में लोगों की मदद कर मानवता की शानदार मिशाल पेश की है। यही वजह रही है कि प्रधानमंत्री मोदी ने राजू के बारे में पूरे देश को बताया।

राजू पंजाब के पठानकोट के रहने वाले हैं। वह दिव्यांग हैं और भीख मांगते हैं। भीख से मिलने वाले रुपयों को राजू लोगों की सहायता में खर्च करते हैं। भीख के पैसों से राजू ने अब तक 100 से ज्यादा परिवारों को एक महीने का राशन दिया और 2500 से ज्यादा लोगों में मास्क भी बांट चुके हैं। यह सब पैसे राजू ने भीख से जुटाए थे।



दिन भर मांगते हैं भीख फिर उसी रकम से लोगों की करते हैं मदद
राजू व्हीलचेयर पर दिनभर भीख मांगते हैं। वह भीख मांगकर अपने पास सिर्फ उतना रखते हैं, जितने में उनका गुजारा हो। बाकी सब वह दूसरे लोगों में बांट देते हैं। मैले-कुचैले कपड़ों में लोगों के घरों तक राशन पहुंचाने वाले राजू दिव्यांग ही नहीं स्वस्थ व्यक्ति के लिए भी प्रेरणा स्त्रोत है। वहीं, लोगों को पता है कि उनका पैसा भलाई के कामों में लगना है तो लोग राजू को खुले दिल से पैसे भी देते हैं। 
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चंडीगढ़: भइया! सामान घर भेज दिया, अब ट्रेन ही कैंसिल हो गई.. हम 70 लोग कहां जाएं

उत्तर प्रदेश के सीतापुर के रहने वाले 70 लोग बड़ी मुश्किल में पड़ गए हैं। 29 मई को उत्तर प्रदेश जाने वाली श्रमिक ट्रेन के कैंसिल होने से अब यह सभी छत की तलाश में भटक रहे हैं। ट्रेन में पंजीकरण होने के बाद घर का सामान पहले ही सीतापुर पहुंचा दिया, अब इन लोगों के पास रहने के लिए मकान भी नहीं है। घर नहीं होने के कारण महिलाओं के साथ मासूम बच्चे खुले में छत पर सोने को मजबूर हैं।   

यूटी प्रशासन ने घर जाने वाले प्रवासियों की घटती संख्या को देखते हुए चंडीगढ़ से जाने वाली विशेष श्रमिक ट्रेनों के संचालन पर रोक लगा दी है। इस कारण से चंडीगढ़ में कई प्रवासी परिवार फंस गए हैं। इसमें सीतापुर के 70 लोग भी शामिल हैं। चंडीगढ़ के हल्लोमाजरा में रहने वाले इन 70 लोगों ने 29 मई को जाने वाले श्रमिक ट्रेन में पंजीकरण मिल जाने के बाद घर का सारा सामान ट्रक के जरिए सीतापुर भेज दिया। अब ट्रेन के कैंसिल होने के बाद ये लोग घर नहीं पहुंच पाए, जिससे अब इनके पास मकान भी नहीं है। 


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आसपास के लोग कर रहे मदद, एक कमरे में रह रहे 10 लोग   
घर नहीं पहुंच पाए इन लोगों की मदद हल्लोमजरा के लोग कर रहे हैं। आसपास के लोगों ने अपने घर में खाली पड़े इन्हें दिए हैं लेकिन इनमें 10 लोगों को एक कमरे में रहना पड़ रहा है। वहीं, कुछ लोगों को कमरे में भी जगह नहीं मिल पाई है, जिससे वह लोगों के घर की छतों पर खुले में सोने को मजबूर हैं। जैसे तैसे अपना काम चला रहे लोगों ने यूटी प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है।  
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कोरोना की चपेट में आया परिवार तो 12 साल की बेटी ने दिया हौंसला, पढ़ें- वायरस पर जीत की प्रेरक कहानी

हौसले भी किसी हकीम से कम नहीं होते हर तकलीफ में ताकत की दवा देते हैं... इन लाइनों को सच कर दिखाया है बापूधाम निवासी रामनाथ चंदानिया के परिवार ने। इनके घर के 1-2 नहीं 6 सदस्य कोरोना की चपेट में आकर अस्पताल पहुंच गए। चार सदस्यों को जिनकी रिपोर्ट निगेटिव थी, उन्हें दूसरी जगह क्वारंटीन कर दिया गया। हौसला दिखाया और सभी सदस्य कोरोना को हराकर घर पहुंचे। अब खुशी का माहौल है। 

एक पल को लगा सब खत्म हो गया  
इंश्योरेंस एडवाइजर के पद पर कार्यरत रामनाथ के परिवार में वह, उनकी पत्नी और एक 12 साल की बिटिया के अलावा माता-पिता, उनका भाई और भाई का पूरा परिवार एक साथ एक ही मकान में रहता है। रामनाथ ने बताया कि 3 मई को परिवार के सभी सदस्यों का कोरोना टेस्ट हुआ। इसमें उनके अलावा भाई दीपक, तीन भतीजे क्रमश: यश, शुभम और मुकुल के साथ ही 12 साल की बेटी जिया की रिपोर्ट पॉजिटिव आई।


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यह सबके लिए सदमे से कम नहीं था। अभी यह संकट टला भी नहीं था कि माता- पिता, भाई की पत्नी, मेरी पत्नी और भाई की बेटी को सेक्टर 47 में क्वारंटीन करने टीम घर पहुंच गई। घर में किसी को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था सभी एक दूसरे की तरफ निराशा भरी निगाहों से देख रहे थे। उस समय मेरी बेटी जिया ने मुझे गले लगाया और कहा, चलो पापा कोरोना से जंग जीतकर आते हैं। उसकी वो बातें सुनकर मन में एक आशा की किरण जगी।    
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लॉकडाउन में भी पीजीआई में मिल रहा इलाज, आप भी इस तरह उठा सकते हैं लाभ

पीजीआई में भर्ती के दौरान परिवार की फोटो।
कोरोना महामारी के दौरान अस्पतालों की ओपीडी बंद है। इससे हजारों मरीजों का इलाज रुका हुआ है। ऐसी स्थिति में पीजीआई की ओर से शुरू की गई टेली कंसल्टेशन सर्विस इन मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही है। 19 मई से शुरू इस सुविधा का कुछ ही दिनों में हजारों मरीजों ने लाभ उठाया है। इतना ही नहीं जरूरत पड़ने पर डॉक्टर चुनिंदा मरीजों को ओपीडी में एग्जामिन के लिए भी बुला रहे हैं ताकि उन्हें समय रहते बेहतर इलाज मुहैया कराया जा सके। 

शुक्रवार को ऐसे 329 मरीजों को ओपीडी में बुलाकर डॉक्टरों ने उनका इलाज किया। वहीं, शुक्रवार को कुल एक हजार मरीजों ने इस सुविधा का लाभ उठाया। शनिवार को भी 1190 मरीजों को बिना अस्पताल बुलाए इलाज मुहैया कराया गया। टेली कंसल्टेशन सर्विस के शुरू होने से मरीजों ने राहत की सांस ली है। 


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उनका कहना है कि लॉकडाउन में पीजीआई की इस सुविधा के कारण उन्हें इलाज उपलब्ध हो रहा है। इस सुविधा के कारण वह कोरोना संक्रमण से खुद को बचाते हुए अपना फॉलोअप ट्रीटमेंट भी सही तरीके से करा पा रहे हैं। टेली कंसल्टेशन सर्विस के तहत न्यू ओपीडी के सभी विभागों के साथ ही एडवांस्ड आई सेंटर ,एडवांस कार्डियक सेंटर, एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर, ओरल हेल्थ साइंस और मनोचिकित्सा विभाग के मरीज लाभ उठा रहे हैं। 
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माता-पिता जरूर ध्यान दीजिए... धीरे-धीरे मोबाइल एडिक्शन की चपेट में आ रहे बच्चे

लॉकडाउन में स्कूल बंद हुए तो प्रबंधकों ने ऑनलाइन कक्षाएं शुरू कर दीं। स्कूल प्रबंधन ने सोचा इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी। अब इसके दुष्परिणाम सामने आने लगे हैं। बच्चे मोबाइल एडिक्शन की चपेट में आ रहे हैं। इससे बच्चों का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। सुबह से लेकर शाम तक की सभी क्रियाएं प्रभावित हो रही हैं। बच्चे सुबह समय से न उठ पा रहे हैं और न शाम को सो पा रहे हैं। लगता है जैसे बस मोबाइल ही उनकी दुनिया हो गई है। 

पंजाब यूनिवर्सिटी के मनोवैज्ञानिक विभाग के प्रोफेसर रोशन लाल का कहना है कि लॉकडाउन के कारण 13 से 19 साल तक के बच्चे मोबाइल को अधिक समय दे रहे हैं। इसके कारण मोबाइल एडिक्शन उन पर धीरे-धीरे हावी होता जा रहा है। 


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क्या है मोबाइल एडिक्शन...
प्रो. रोशन लाल के मुताबिक मोबाइल एडिक्शन का मतलब है शारीरिक और मानसिक विकास का प्रभावित होना। मोबाइल एडिक्शन से बच्चे सुबह से लेकर शाम तक क्रियाएं नहीं कर पाते हैं। उनके व्यवहार में सबसे पहले अंतर आना शुरू हो जाता है। उसके बाद चिड़चिड़ापन, नींद कम होना, बेचैनी, खाने का समय बदल जाना और पाचन शक्ति कमजोर हो जाना आदि नुकसान होने लगते हैं। 

क्या कदम उठाएं पैरेंट्स 
परिजन इसके लिए अपने बच्चों को प्रोत्साहित करें। उन्हें समझाएं और मोबाइल चलाने का शेड्यूल बनाकर उन्हें दें। उन पर शारीरिक दंड न डालें। प्रोत्साहन के जरिए ही इस आदत को बच्चे छोड़ पाएंगे। 

ध्यान रहे... यह नौबत न आए 
एक अनुमान के अनुसार मुंबई के बच्चों में यह समस्या लगातार बढ़ी तो वहां इसके लिए बाकायदा मोबाइल एडिक्शन क्लीनिक खोले गए हैं। यह लॉकडाउन हम सभी के लिए एक चुनौती है। ऐसे में बच्चों के मानसिक विकास को ध्यान में रखना बहुत जरूरी है।
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मनीमाजरा: किशनगढ़ में पीएनबी बैंक के ताले तोड़कर चोरी का प्रयास , सीसीटीवी में दिखे दो लोग

पूरा शहर कोरोना के खौफ से जूझ रहा है। कर्फ्यू के कारण लोग रात को घरों से नहीं निकलते हैं। इसी बात का फायदा उठाकर शनिवार रात को  किशनगढ़ गांव स्थित पंजाब नेशनल बैंक में चोरों ने शटर की दो कुंडी तोड चोरी करने का प्रयास किया।

गनीमत यह रही कि चोर बैंक के अंदर तक पहुंच कर भी कैश वाला लॉकर खोल नहीं पाए। हालांकि चोरों ने बैंक के अंदर सभी दराज आदि खोलकर सारा समान उथल-पुथल दिया। इसके साथ बैंक के अंदर लगी डीआरएन मशीन को भी तोड़ने का प्रयास किया।  


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हालांकि चोर अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हुए। पुलिस मौके पर पहुंचकर सीसीटीव फुटेज जांच रही है। जिसमें दो लोग बैंक के अंदर आकर चोरी करते नजर आ रहे हैं। हालांकि दोनों ने बैंक के शटर के ऊपर लगे सीसीटीवी कैमरे की दिशा को बदलकर बैंक के अंदर घुसे थे लेकिन अंदर लगे कैमरे में दोनों की गतिविधियां कैद हो गई हैं।

मौके पर डीएसपी दिलशेर सिंह चंदेल व आईटी पार्क थाना प्रभारी लखबीर सिंह और क्राइम ब्रांच के प्रभारी रंजीत सिंह अपनी टीम के साथ जांच करने के लिए पहुंचे। पुलिस ने अंदर बाहर के सभी सीसीटीवी कैमरे की जांच करने के बाद चोरों के बारे में पता लगाना शुरू कर दिया है।
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चंडीगढ़ में जून के आखिर में आएगा मानसून, अभी 40 तक जाएगा तापमान, आगे ऐसा रहेगा मौसम

मई की पहचान झुलसा देनी वाली गर्मी से होती है, मगर इस बार हालात कुछ बदले हुए हैं। महीने की शुरुआत सुहावने मौसम से हुई थी। बीच में जबरदस्त गर्मी पड़ी तो आखिरी में ठंडी हवाओं ने गर्मी को छू मंतर कर दिया।

मौसम विभाग के मुताबिक, पश्चिमी विक्षोभ का असर 31 मई तक रहने के आसार हैं। शनिवार 30 मई को अच्छी बारिश और तेज हवाएं चलने के आसार हैं। रविवार से पश्चिमी विक्षोभ कमजोर पड़ने लगेगा। रविवार को एक दो इलाके में छिटपुट बारिश हो सकती है। एक जून से मौसम साफ होने लगेगा और तापमान में फिर से गर्मी बढ़ेगी। तापमान एक बार फिर से 40 के नजदीक पहुंच सकता है।

हरियाणा के 6 जिलों में 50 किमी. प्रति घंटा से आई आंधी, पेड़-खंभे गिरे, बदला मौसम छाई ठंडक

मानसून पर असर नहीं, जून के आखिरी पहुंचेगा
मौसम विभाग के निदेशक सुरेंद्र पाल ने बताया कि इस पश्चिमी विक्षोभ का मानसून पर कोई असर नहीं पड़ेगा। अभी जो स्थितियां बनी हुई हैं, उसके मुताबिक मानसून तय समय पर आएगा। यदि बीच में कोई परिवर्तन आया है तो थोड़ा ऊपर नीचे हो सकता है।

चंडीगढ़ में मानसून आने की तारीख 27 जून तय है। स्काईमेट के मौसम वैज्ञानिक महेश पलावत ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून केरल के काफी करीब पहुंच चुका है। यदि हालात ऐसे बने रहे तो 30 मई को मानसून केरल में एंट्री कर जाएगा। ... और पढ़ें

केंद्र में नरेंद्र मोदी और चंडीगढ़ में किरण खेर का एक साल...उपलब्धियां और चुनौतियां साथ-साथ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल का एक साल शनिवार को पूरा कर लिया है। केंद्र में मोदी सरकार की तरह शहर में खेर राज के भी 6 साल पूरे हो चुके हैं। सालभर में केंद्र सरकार ने तो कई साहसिक कदम उठाए हैं, लेकिन पिछले एक साल में चंडीगढ़ में कुछ खास बदलाव देखने को नहीं मिला है।

बल्कि सड़कों की स्थिति को लेकर प्रशासन और सांसद की काफी किरकिरी हुई है। पीएम मोदी को देश की जनता ने बड़े जनादेश से चुना था, इसलिए उम्मीदें बहुत थीं। किरण खेर को भी दोबारा मौका देकर शहरवासियों ने बता दिया था कि वह सांसद के पिछले पांच साल के कार्यकाल से संतुष्ट हैं।

पिछले एक साल से हवा का रुख बदला
प्रशासन के अफसर कई फैसलों में हावी होते दिखाई दिए। टूटी सड़कों की वजह से शहर को ‘गड्ढागढ़’ कहा जाने लगा। शहर के कई कॉलोनियों का नाम बदल दिया। मनीमाजरा, सेक्टर-13 हो गया। चुनाव से पहले मोनो रेल की खूब चर्चा रही लेकिन एक साल के कार्यकाल में न तो मेट्रो की चर्चा हुई, न मोनो रेल की।

सांसद ने कॉलोनी नंबर-4 के हजारों लोगों के पक्के छत के सपने को पूरा किया। सेक्टर-17 से रोज गार्डन अंडर पास का उद्घाटन किया। लेकिन सबसे पुरानी प्रेस सेक्टर-18 गवर्नमेंट प्रिंटिग प्रेस पर ताला लग गया, जिसे सांसद खेर भी रोक नहीं पाईं।
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पीयू में हो क्या रहा है.. एडीएसडब्ल्यू विदेश में, पीयू दिए जा रहा एक्सटेंशन

चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी के खेल निराले हैं। पीयू में काम करने वाले शिक्षकों को पदों पर तैनात नहीं किया जा रहा और विदेशों में सेवा दे रहे शिक्षकों को चार्ज दिया जा रहा है। प्रो. रंजन कुमार को दो पहले एडीएसडब्ल्यू का चार्ज दिया गया था। वह विदेश में हैैं। उनका चार्ज यहां किसके पास है यह भी पीयू को पता नहीं। इस पर सवाल खड़े हुए हैं।
जानकारों का कहना है कि क्या पीयू के पास इस पद का संचालन करने वाले शिक्षक नहीं हैं। लगातार उनको एक्सटेंशन क्यों दी जा रही है। सबसे रोचक बात यह है कि शनिवार को सिंडिकेट की बैठक में एडीएसडब्ल्यू को फिर से कंटीन्यू कर दिया गया।
क्यों महत्वपूर्ण है एडीएसडब्ल्यू का पद
डीएसडब्ल्यू के बाद एडीएसडब्ल्यू का पद महत्वपूर्ण हो जाता है। डीएसडब्ल्यू की गैर हाजिरी में इस पद की जिम्मेदारी आ जाती है। छात्रों के कल्याण से जुड़ा यह पद महत्वपूर्ण है। छात्रों को हमेशा इस पद पर तैनात व्यक्ति की जरूरत होती है, लेकिन मदद करे तो कौन।
क्या कहते हैं जानकार
डीएसडब्ल्यू अब तक काम चलाते आ रहे हैं, लेकिन जानकारों का कहना है कि केवल नाम का पद नहीं रहना चाहिए। जिस व्यक्ति की सेवाएं हम नहीं ले रहे हैं तो उस पद को किसी अन्य शिक्षकों को दे देना चाहिए। इस चार्ज के हटाने के बाद विदेश गए शिक्षक यहां शिक्षक ही रहेंगे न कि उनकी नौकरी जा रही है। दूसरे शिक्षक को एडीएसडब्ल्यू का चार्ज दिया जाता है तो वह अनुभव भी प्राप्त करेगा और पीयू समय-समय पर उनकी सेवाएं भी लेता रहेगा। सिंडिकेट की बैठक में एडीएसडब्ल्यू को फिर से कंटीन्यू कर दिया गया। हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि उनका कार्यकाल दूसरे साल का कुछ बचा हुआ है।
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